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दिमाग और शरीर का अद्भुत तालमेल: माइंड एंड बायोलॉजी के 10 रहस्य

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दिमाग और शरीर का अद्भुत तालमेल : माइंड एंड बायोलॉजी के 10 रहस्य ​ हमारे शरीर और दिमाग का रिश्ता बेहद दिलचस्प और गहरा है। हम अक्सर अपने शरीर को एक मशीन की तरह समझते हैं और दिमाग को उसका ड्राइवर, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अधिक जटिल और जादुई है। माइंड एंड बायोलॉजी (Mind & Biology) से जुड़े कुछ रोचक और वैज्ञानिक तथ्यों को आधार बनाते हुए आइए यहाँ जानते हैं कि हमारा दिमाग और शरीर कैसे काम करता है ?  ​ 1. विचारों का शारीरिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव ​हम जो कुछ भी सोचते हैं, उसका सीधा असर हमारे शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ता है। सकारात्मक सोच रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immune System ) को मजबूत करती है, जबकि लगातार तनाव और नकारात्मक विचार शरीर को अंदर से कमजोर कर सकते हैं। ​ 2. मस्तिष्क की असीमित क्षमता ​मानव मस्तिष्क ब्रह्मांड की सबसे जटिल संरचनाओं में से एक है। यह अनगिनत सूचनाओं को प्रोसेस कर सकता है और जरूरत के हिसाब से नए न्यूरल कनेक्शन (Neural Connections) बनाकर खुद ढलने की अद्भुत क्षमता रखता है। ​ 3. भावनाओं का बायोलॉजिकल आधार ​जब हम खुशी, डर, गुस्सा या उदासी महसूस करते हैं, तो केवल हम...

स्वास्थ्य काअसली खजाना: प्रकृति की गोद में पैदल चलने का अचूक वरदान

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​The Health Journal Blog..  स्वास्थ्य का असली खजाना: प्रकृति की गोद में पैदल चलने का अचूक वरदान ​ भागदौड़ भरी आधुनिक जीवनशैली और हर काम में आराम ढूंढने की हमारी आदत ने अनजाने में हमारे शरीर को सुस्त बना दिया है। नतीजा यह है कि कम उम्र में ही बीमारियां और मानसिक तनाव हमें घेरने लगे हैं। लेकिन क्या आपने कभी गहराई से सोचा है कि कुदरत ने हमारी शारीरिक बनावट में ही एक ऐसा अनमोल और बिल्कुल मुफ्त उपहार छिपा रखा है, जो हमें जीवनभर जवां, तंदुरुस्त और रोगमुक्त रख सकता है? जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उसी बेहद साधारण सी दिखने वाली आदत की, जिसे हम रोजमर्रा की भागदौड़ में अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं— नियमित रूप से पैदल चलना (Walking) । ​मानव शरीर की लगभग 50% नसें, 50% रक्त वाहिकाएं और कुल खून का एक बहुत बड़ा हिस्सा हमारी टांगों में ही निहित है। आइए गहराई से समझते हैं कि इस सहज सी आदत को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर हम अपने शरीर और मस्तिष्क पर कितने गहरे और चमत्कारी प्रभाव डाल सकते हैं : ​ शारीरिक स्वास्थ्य और ऊर्जा के अद्भुत आयाम ​ दीर्घायु और चिर-युवा का राज: नियमित रूप से टहलने पर पैरों...

अतिरिक्त थकान, सुस्ती और आलस के प्रमुख कारण और बचाव के उपाय

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अतिरिक्त थकान, सुस्ती और आलस के प्रमुख कारण और बचाव के उपाय ​दिनभर सुस्ती, थकान रहना और जरूरत से ज्यादा नींद आना हमारे शरीर के गिरते ऊर्जा स्तर (Low Energy Level) का सीधा संकेत है। जिस प्रकार अनिद्रा स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, उसी प्रकार अत्यधिक नींद आना और हर समय आलस बने रहना भी किसी अंदरूनी शारीरिक या मानसिक समस्या की ओर इशारा करता है। आइए विस्तार से जानते हैं इसके मुख्य कारणों और इससे उबरने के उपायों के बारे में। ​ थकान और आलस के प्रमुख कारण ​ शरीर में आयरन की कमी (एनीमिया): शरीर में खून की कमी होने पर ऑक्सीजन का संचार प्रभावित होता है, जिससे व्यक्ति का ऊर्जा स्तर हमेशा निचले स्तर पर रहता है और उसे अत्यधिक थकान व आलस महसूस होता है। ​ विटामिन की कमी: आयरन के साथ-साथ विटामिन बी12 और विटामिन सी की कमी भी शरीर की सक्रियता को कम करती है, जिससे लगातार कमजोरी बनी रहती है। ​ हाइपोथायरायडिज्म: थायराइड ग्रंथि की कार्यप्रणाली धीमी होने से मेटाबॉलिज्म प्रभावित होता है, जिससे वजन बढ़ने के साथ-साथ भारी थकान और सुस्ती की शिकायत होने लगती है। ​ डायबिटीज (उच्च रक्त शर्करा): इंसुलिन की कमी ...

खाना खाने के बाद की एक छोटी सी आदत और ब्लड शुगर पर नियंत्रण

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खाना खाने के बाद की एक छोटी सी आदत और-  ब्लड शुगर पर नियंत्रण ​ डायबिटीज या प्रीडायबिटीज से जूझ रहे अधिकांश लोग अपनी डाइट को लेकर बेहद सतर्क रहते हैं—वे क्या खा रहे हैं, कौन सा अनाज चुन रहे हैं, और कितनी मात्रा में कार्बोहाइड्रेट ले रहे हैं, इस बात का पूरा हिसाब रखते हैं। लेकिन क्या कभी इस बात पर गौर किया गया है कि भोजन में क्या शामिल है, इससे भी अधिक महत्वपूर्ण यह है कि खाना खाने के तुरंत बाद हमारी दिनचर्या कैसी रहती है? बिना किसी महंगी औषधि या सप्लीमेंट के, केवल एक छोटी सी आदत अपनाकर ब्लड शुगर के अचानक बढ़ने की समस्या को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। ​ भोजन के बाद रक्त शर्करा में होने वाले बदलाव ​जब भी हम रोटी, चावल या किसी भी कार्बोहाइड्रेटयुक्त आहार का सेवन करते हैं, तो पाचन प्रक्रिया के उपरांत वह ग्लूकोज में परिवर्तित हो जाता है। यह ग्लूकोज सीधे हमारे रक्त प्रवाह में मिल जाता है, जिससे भोजन के लगभग 30 से 60 मिनट के भीतर ब्लड शुगर अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच जाती है। ​ संतुलित शरीर में: शरीर के भीतर प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होने वाला इंसुलिन इस ग्लूकोज को कोशिका...

विभिन्न रोगों के उपचार में विभिन्न प्रकार के दालों का उपयोग

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विभिन्न रोगों के उपचार: विभिन्न प्रकार के दालों के उपयोग से  ​ आयुर्वेद में भोजन को ही औषधि माना गया है, और हमारी रसोई में मौजूद विभिन्न प्रकार की दालें केवल स्वाद ही नहीं बढ़ातीं, बल्कि कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से राहत दिलाने में भी बेहद असरदार होती हैं। सही दाल का चयन करके विभिन्न प्रकार की शारीरिक समस्याओं से प्राकृतिक रूप से और सुरक्षित तरीके से राहत पाई जा सकती है। ​ रक्तचाप नियंत्रण:  उच्च रक्तचाप (बीपी) की समस्या होने पर अरहर की दाल का सेवन करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है, जो शरीर के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। ​ पाचन स्वास्थ्य (आईबीएस): इरिटेटिव बॉवेल सिंड्रोम (IBS) जैसी पाचन संबंधी दिक्कतों में साबुत मूंग की दाल का उपयोग बहुत गुणकारी और सुपाच्य होता है। ​ कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन: शरीर में बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल स्तर नियंत्रित करने के लिए छिलके वाली मूंग की दाल का नियमित प्रयोग करना चाहिए। ​ हड्डियों की मजबूती: शरीर में हड्डियों की कमजोरी को दूर करने और उन्हें अंदर से मजबूत बनाने के लिए उड़द की दाल का सेवन अत्यंत उपयोगी माना गया है। ​ ब्लड शुगर नियंत्रण: शर...

मानसिक शांति और स्वस्थ जीवन के लिए - 10 अचूक मनोवैज्ञानिक उपाय

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मानसिक शांति और स्वस्थ जीवन के लिए -  10 अचूक मनोवैज्ञानिक उपाय ​ आज की तेज-तर्रार जीवनशैली में चिंता, तनाव या मानसिक उलझनों से जूझना आम बात बन गई है। कई बार हम अनजाने में नकारात्मक विचारों और पुरानी मानसिक प्रोग्रामिंग के जाल में फंस जाते हैं, जिससे हमारा दैनिक जीवन और कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है। 'द हेल्थ जरनल' के इस लेख में हम मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने और जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाले 10 बेहद असरदार सुझावों पर चर्चा करेंगे। ​ 1. प्रमुख विचारों की वास्तविकता को समझें ​ हमारे बार-बार मन में आने वाले विचार ही अंततः हमारी वास्तविकता का निर्माण करते हैं। यदि हम खुद से लगातार यह कहते रहेंगे कि हम किसी काम के लायक नहीं हैं, तो हम वास्तव में वैसा ही महसूस करने लगेंगे। इसलिए, पुरानी और गलत प्रोग्रामिंग को पहचानें, खुद की सराहना करें और नए, रचनात्मक विचारों को अपनी पहचान बनने दें। ​ 2. हर स्वचालित विचार सच नहीं होता ​ मन में आने वाला हर विचार अंतिम सत्य या आपकी वास्तविकता नहीं होता। अतीत के पूर्वाग्रहों या बाहरी प्रभावों के कारण कई बार मन उलझन भरे सोचने के तरीके ...

कमजोर नर्वस सिस्टम: लक्षण, कारण और बचाव

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कमजोर नर्वस सिस्टम: लक्षण, कारण और बचाव ​हमारे शरीर को सुचारू रूप से चलाने और सभी अंगों तक सटीक संदेश पहुँचाने में नर्वस सिस्टम (तंत्रिका तंत्र) की भूमिका सबसे अहम होती है। जिस प्रकार एक कुशल संदेशवाहक दूर-दूर तक जरूरी सूचनाएं पहुँचाता है, ठीक उसी प्रकार हमारा नर्वस सिस्टम दिमाग से शरीर के हर कोने तक निर्देश भेजने का कार्य करता है। यदि यह संदेशवाहक कमजोर पड़ जाए, तो शरीर के लिए ऊर्जावान, फिट और स्वस्थ रहना बेहद कठिन हो जाता है। आइए इस महत्वपूर्ण विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं। ​ नर्वस सिस्टम कमजोर होने के मुख्य लक्षण ​जब शरीर का तंत्रिका तंत्र ठीक से काम नहीं करता है, तो वह कई तरह के शारीरिक संकेत देने लगता है: ​ गंभीर सिरदर्द: वैसे तो सिरदर्द होना आम बात है, लेकिन यदि सिर में तेज दर्द के साथ लगातार उल्टी आना और बेहोशी जैसे लक्षण महसूस हों, तो यह तंत्रिका तंत्र की कमजोरी का बड़ा संकेत हो सकता है। ​ आंखों के सामने अंधेरा छाना: ज्यादा देर धूप में रहने के बाद अचानक छांव में आने पर यदि आंखों के सामने अंधेरा छा जाए या विजुअल डिस्टरबेंस हो, तो इस स्थिति को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना ...

क्यों होती है डायबिटीज और क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण? अपनाएं ये 5 पावरफुल टिप्स और रहें हमेशा हेल्दी

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​ क्यों होती है डायबिटीज और क्या हैं इसके शुरुआती लक्षण? अपनाएं ये 5 पावरफुल टिप्स और रहें हमेशा हेल्दी ​ आज के समय में डायबिटीज एक बेहद आम स्वास्थ्य समस्या बन चुकी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह शरीर में कैसे काम करती है? आइए, विज्ञान की दृष्टि से इसे सरल भाषा में समझते हैं। ​ डायबिटीज क्या है और यह कैसे होता है? ​ जब हम भोजन करते हैं, तो पाचन के बाद भोजन से शुगर (ग्लूकोज), प्रोटीन और फैट के अणु खून में मिल जाते हैं। जब खून में शुगर की मात्रा बढ़ती है, तो हमारा पैंक्रियाज (Pancreas) इसे पहचान लेता है और इंसुलिन नामक हार्मोन रिलीज करता है। ​ इंसुलिन एक 'चाबी' की तरह काम करता है, जो हमारी मांसपेशियों, लिवर और फैट सेल्स के 'ताले' को खोलता है, जिससे खून में मौजूद शुगर इन सेल्स के अंदर जा सके। शरीर इन सेल्स के अंदर मौजूद शुगर का उपयोग ऊर्जा (Energy) बनाने के लिए करता है। ​ डायबिटीज तब होता है जब शरीर में इंसुलिन का निर्माण रुक जाता है या वह अपना काम सही से नहीं कर पाता, जिससे खून में मौजूद शुगर सेल्स के अंदर नहीं पहुँच पाती। ​ डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकार: ​ ट...

कपूर (Camphor): केवल पूजा ही नहीं, सेहत और वातावरण के लिए भी एक जादुई औषधि

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​ कपूर (Camphor): केवल पूजा ही नहीं, सेहत और वातावरण के लिए भी एक जादुई औषधि ​ हम अक्सर कपूर का उपयोग पूजा-पाठ या हवन में करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह छोटी सी टिकिया वैज्ञानिक रूप से स्वास्थ्य के लिए कितनी फायदेमंद है? आज के इस ब्लॉग में हम कपूर के अनोखे फायदों के साथ-साथ यह भी जानेंगे कि डिफ्यूजर क्या है और इसका उपयोग करके कपूर के गुणों का अधिकतम लाभ कैसे उठाया जा सकता है। ​सबसे पहले जानते हैं: डिफ्यूजर क्या होता है? ​ डिफ्यूजर एक ऐसा आधुनिक और उपयोगी उपकरण (Device) है, जिसका उपयोग किसी भी सुगंधित तेल, कपूर या प्राकृतिक अर्क को हवा में फैलाने के लिए किया जाता है। यह कपूर या एसेंशियल ऑयल को बिना जलाए (बिना धुएं के) उसके सूक्ष्म कणों में बदलकर पूरे कमरे में एकसमान रूप से बिखेर देता है। ​ डिफ्यूजर के प्रकार: ​ इलेक्ट्रिक डिफ्यूजर (Electric Diffuser / कपूर दानी): यह बिजली से चलता है। इसमें एक छोटा हीटिंग पैड या बल्ब होता है, जो कपूर को धीरे-धीरे गर्म करके पिघलाता है और उसका वाष्प (Vapor) पूरे कमरे में फैलाता है।  ​ कैंडल डिफ्यूजर (Aroma Diffuser): इसमें नीचे एक छ...

बालों का झड़ना रोकें घर पर बने इस आयुर्वेदिक मैजिकल हेयर ऑयल से

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​ बालों का झड़ना रोकें: घर पर बने इस आयुर्वेदिक मैजिकल हेयर ऑयल से ​ क्या आप भी अपने गिरते बालों से परेशान हैं? महंगे केमिकल युक्त प्रोडक्ट्स और ट्रीटमेंट्स के बावजूद कोई खास फायदा नहीं मिल रहा? परेशान न हों! आज हम आपको एक ऐसे शक्तिशाली आयुर्वेदिक हेयर ऑयल के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे आप आसानी से अपने घर पर बना सकते हैं। यह नुस्खा न केवल हेयर फॉल को रोकने में मदद करेगा, बल्कि आपके बालों को मजबूती और नई चमक भी देगा। ​हेयर ऑयल बनाने की सामग्री ​इस तेल को बनाने के लिए अधिकांश सामग्री आपको अपनी रसोई में ही मिल जाएगी। ​ कोकोनट ऑयल (बेस): कोल्ड-प्रेस्ड कोकोनट ऑयल को बेस के रूप में लें, क्योंकि यह बालों की शाफ्ट में गहराई से जाकर प्रोटीन लॉस को रोकता है। ​ मेथी दाना (फेनुग्रीक सीड्स): इसमें मौजूद लेक्टिन जड़ों को हाइड्रेट करता है और हेयर फॉलिकल्स को रिपेयर करता है। ​ कलौंजी (ब्लैक सीड्स): बालों की री-ग्रोथ और थिनिंग को रोकने के लिए यह बेहतरीन है। ​ फ्लेक्स सीड (अलसी): ओमेगा-3 फैटी एसिड और बी-विटामिन्स से भरपूर, जो बालों की इलास्टिसिटी को सुधारते हैं। ​ साबुत काली मिर्च: स्कैल्प ...

शरीर और मन का अद्भुत तालमेल: आत्म-उपचार (Self-Healing) का विज्ञान

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शरीर और मन का अद्भुत तालमेल : आत्म-उपचार (Self-Healing) का विज्ञान ​ क्या आप जानते हैं कि हमारा शरीर केवल हड्डियों और मांस का ढांचा नहीं, बल्कि एक अत्यधिक बुद्धिमान तंत्र है? अक्सर हम बीमारियों को केवल बाहरी कारकों से जोड़कर देखते हैं, लेकिन स्वास्थ्य का एक बड़ा हिस्सा हमारे भीतर, यानी हमारे मन की शक्ति और भावनाओं में छिपा होता है। वैज्ञानिक शोध और व्यावहारिक अनुभव यह सिद्ध करते हैं कि हमारा मन शरीर को बीमार करने और उसे पूर्णतः स्वस्थ करने, दोनों की क्षमता रखता है। ​ मन और शरीर का रासायनिक संबंध ​हमारे शरीर की हर गतिविधि हमारे विचारों और भावनाओं से नियंत्रित होती है। जब हम सकारात्मक और खुश होते हैं, तो हमारा मस्तिष्क विशिष्ट 'हैप्पी हार्मोन्स' स्राव करता है: ​ सेरोटोनिन: यह हमारे मूड को स्थिर और प्रसन्न रखता है। ​ डोपामिन: यह हमें प्रेरित (motivate) और ऊर्जावान बनाए रखता है। ​ ऑक्सीटोसिन: इसे 'लव हार्मोन' कहा जाता है, जो तनाव को कम करके जुड़ाव और शांति का अनुभव कराता है। ​ एंडोर्फिन: यह शरीर का प्राकृतिक पेन-किलर है, जो दर्द को कम करने में मदद करता है । ​इस...

समय से पहले सफेद बालों की समस्या? जानें इसे रोकने का प्राकृतिक और असरदार तरीका

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​ समय से पहले सफेद बालों की समस्या? जानें इसे रोकने का प्राकृतिक और असरदार तरीका ​ आज के दौर में बालों का समय से पहले सफेद होना एक बेहद आम समस्या बन गई है। पहले यह केवल उम्र बढ़ने के लक्षण होते थे, लेकिन अब 20-25 साल के युवाओं और यहाँ तक कि 8-10 साल के बच्चों में भी बाल सफेद होने की शिकायतें देखी जा रही हैं। ​प्रदूषण, खान-पान में केमिकल्स, स्ट्रेस (तनाव) और खराब जीवनशैली इसके मुख्य कारण हैं। चूँकि हम प्रदूषण या तनाव को पूरी तरह खत्म नहीं कर सकते, इसलिए समाधान के लिए हमें प्रकृति की शरण लेनी चाहिए। ​बालों के लिए जादुई प्राकृतिक तेल बनाने की विधि ​इस नुस्खे के नियमित उपयोग से न केवल सफेद बालों की गति धीमी होती है, बल्कि यदि उम्र 35 वर्ष से कम है, तो सफेद बाल फिर से काले भी हो सकते हैं। ​आवश्यक सामग्री: ​ पीली सरसों का तेल (200 ml): इसे किसी तेल निकालने वाली दुकान से सामने निकलवाकर लाएं ताकि यह शुद्ध और अनफिल्टर्ड हो। (उपलब्ध न होने पर ऑर्गेनिक नारियल तेल का प्रयोग करें)। ​ भृंगराज (20 ग्राम): बालों की सेहत के लिए आयुर्वेद में उत्तम। ​ जटामासी (20 ग्राम): बालों को मजबूती देने ...

सुबह की 12 जादुई आदतें: आपके जीवन और सेहत में ला सकती हैं मनचाही बदलाव

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​ सुबह की 12 जादुई आदतें:   आपके जीवन और सेहत में ला सकती हैं मनचाही बदलाव ​ क्या आपकी भी सुबह की शुरुआत अलार्म की तेज आवाज से घबराकर उठने, चाय की तलब और ऑफिस या रोजमर्रा के कामों की हड़बड़ाहट में होती है? यदि आपका जवाब हाँ है, तो आप अकेले नहीं हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सभी ने अपनी सुबह को एक 'दौड़' बना दिया है, जबकि प्राचीन आयुर्वेद और योग विज्ञान में सुबह के वक्त को दिन का सबसे पवित्र और शक्तिशाली हिस्सा माना गया है। ​आप दिन की शुरुआत कैसे करते हैं, यह तय करता है कि आपका पूरा दिन कैसा बीतेगा। आइए जानते हैं सुबह की उन 12 असरदार और प्राचीन आदतों के बारे में, जिन्हें अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर आप न सिर्फ खुद को ऊर्जावान रख सकते हैं, बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी सुरक्षित रह सकते हैं। ​ 1. मुस्कुराहट और कृतज्ञता (Gratitude) के साथ आँख खोलें ​बिस्तर से उठते ही सबसे पहला काम यह करें कि चेहरे पर एक प्यारी सी मुस्कान लाएं और ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करें। जो लोग सुबह उठकर अपने इष्ट के प्रति 'कृतज्ञता' (Gratitude) का अभ्यास करते हैं, उनका मन सकारात्मकता से भ...

बुढ़ापे तक स्वस्थ रहने के 16 सामान्य नियम: समग्र मार्गदर्शिका

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बुढ़ापे तक स्वस्थ रहने के 16 सामान्य नियम: समग्र मार्गदर्शिका ​ जब सेहत की बात आती है, तो यह कोई ऐसी मंजिल नहीं है जहाँ एक बार पहुँच जाने के बाद सब कुछ हमेशा के लिए ठीक हो जाए। सेहत एक निरंतर चलने वाली यात्रा (Journey) है। जिस प्रकार किसी भी सफर को तय करने के कुछ नियम होते हैं, ठीक उसी तरह हमारी सेहत के सफर के भी कुछ खास उसूल हैं। ​यदि आप बुढ़ापे तक चुस्त, दुरुस्त और ऊर्जावान रहना चाहते हैं, तो इन 16 नियमों को अपनी दैनिकचर्या का हिस्सा बना लीजिए। आइए इन्हें विस्तार से जानते हैं: ​ 1. सेंधा नमक (Pink Himalayan Salt) का प्रयोग करें ​अपने दैनिक भोजन में सामान्य सफेद नमक के बजाय सेंधा नमक का उपयोग शुरू करें। सफेद नमक की तरह सेंधा नमक शरीर में वॉटर रिटेंशन और ब्लड प्रेशर को तेजी से नहीं बढ़ाता है, जिससे यह सेहत के लिए काफी सुरक्षित माना गया है।  सोडियम की कमी न हो जाए इसके लिए कभी कभार सामान्य नमक का इस्तेमाल भी करना जरूरी है। अपने ब्लड प्रेशर की स्थिति की जानकारी के अनुसार आप सेंधा नमक और आयोडीन नमक का मिश्रण उपयोग में लायें। यह भी शरीर की बैलेंसिंग कैपेसिटी को बनाए रखने के लिए जरू...