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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली (Gall Bladder) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulgar...

गर्मी और सर्दी की संवेदनशीलता का स्वास्थ्य पर प्रभाव : जानिए बचाव के उपाय

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ग र्मी और सर्दी की संवेदनशीलता का स्वास्थ्य पर प्रभाव : जानिए बचाव के सरल उपाय  🌡️ हमारे शरीर का तापमान सामान्यतः लगभग 98.4°F (37°C) के आसपास रहता है। लेकिन जब बाहरी तापमान — चाहे वह अधिक गर्मी हो या अधिक ठंड — शरीर के इस संतुलन को प्रभावित करता है, तब हम ‘संवेदनशीलता’ महसूस करते हैं। कुछ लोग सर्दी लगते ही कांपने लगते हैं, जबकि कुछ को हल्की गर्मी में ही बेचैनी, सिरदर्द या थकान महसूस होती है। यह स्थिति शरीर की थर्मो-रेगुलेटरी प्रणाली (Temperature controlling mechanism) के असंतुलन का परिणाम होती है। गर्मी की संवेदनशीलता (Heat Sensitivity) गर्मी के मौसम में शरीर पसीने के माध्यम से अपने तापमान को नियंत्रित करता है। लेकिन जब यह प्रक्रिया बाधित होती है, तो शरीर में हीट इंटोलरेंस या गर्मी की असहनीयता उत्पन्न होती है। गर्मी की संवेदनशीलता के लक्षण : हल्की या अधिक थकान सिरदर्द, चक्कर आना पसीना अधिक या कम आना त्वचा का लाल होना या जलन नींद न लगना, बेचैनी आयुर्वेदिक कारण : आयुर्वेद के अनुसार गर्मी की संवेदनशीलता पित्त दोष के बढ़ने से होती है। पित्त बढ़ने पर शरीर में गर्मी, जलन, औ...

ज्ञानम् भारम् क्रियाम् बिना : क्रिया के बिना ज्ञान एक बोझ समान है

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ज्ञानम् भारम् क्रियाम् बिना : क्रिया के बिना ज्ञान एक बोझ है हमारे शास्त्रों में कहा गया है -  "ज्ञानम् भारम् क्रियाम् बिना" अर्थात्, क्रिया के बिना ज्ञान एक बोझ के समान है। इस वाक्य में छिपा है मानव जीवन का एक अत्यंत गहरा सत्य। आज के युग में जहाँ सूचनाओं का सागर हमारे चारों ओर फैला हुआ है, वहाँ यह बात और भी प्रासंगिक हो जाती है।   ज्ञान का अर्थ केवल जानकारी नहीं : बहुत से लोग ज्ञान को जानकारी ( Information ) समझ लेते हैं। लेकिन सच्चा ज्ञान वह है जो जीवन में उतरकर कर्म में परिणत हो। यदि किसी व्यक्ति को यह पता है कि ध्यान करने से मन शांत होता है, लेकिन वह स्वयं ध्यान नहीं करता, तो उसका वह ज्ञान केवल एक बौद्धिक बोझ बनकर रह जाता है।   क्रिया से रहित ज्ञान – एक अतिरिक्त वजन जैसे किसी विद्यार्थी के पास किताबें तो बहुत हों, पर वह उनका अध्ययन न करे, तो वे किताबें ज्ञान नहीं, बोझ बन जाती हैं। उसी प्रकार जब हम अनेक बातें, सिद्धांत, उपदेश, और ज्ञान-सूत्र जानते हैं लेकिन उन्हें अपने व्यवहार में नहीं लाते, तो हमारा मस्तिष्क उन सूचनाओं से भर तो जाता है, परंतु मन और...

Horse Stands क्या है? 50 के बाद इसे नित्य करें और जवानी बनाए रखें

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Horse Stands क्या है? 50 के बाद इसे नित्य करें और जवानी बनाए रखें 🐎 क्या आप जानते हैं कि सिर्फ एक साधारण-सी मुद्रा (पोज़) आपको फिर से युवा और ऊर्जावान बना सकती है? यह मुद्रा है — Horse Stands (घोड़े जैसी खड़ी मुद्रा), जिसे योग और मार्शल आर्ट दोनों में अत्यंत लाभदायक आसन माना गया है।   Horse Stands क्या है? Horse Stand जिसे संस्कृत में अश्व-स्थिति आसन (Ashwa Sthiti Asana) भी कहा जाता है, एक ऐसी योगिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति अपने पैरों को कंधे से थोड़ा ज़्यादा फैलाकर, घुटनों को मोड़कर, और रीढ़ को सीधा रखकर खड़ा होता है — ठीक वैसे ही जैसे कोई घोड़ा युद्ध के लिए तैयार हो। यह आसन दिखने में आसान लगता है, लेकिन इसमें शक्ति, संतुलन और सहनशीलता की परीक्षा होती है।   Horse Stands करने की विधि : सीधे खड़े हों , दोनों पैरों में 2-3 फीट का अंतर रखें। पैरों की उंगलियाँ बाहर की ओर (45° कोण पर) फैलाएँ। धीरे-धीरे घुटनों को मोड़ें जब तक आपकी जाँघें ज़मीन के लगभग समानांतर न हो जाएँ। रीढ़ सीधी रखें, छाती बाहर की ओर और पेट अंदर। दोनों हाथों को प्रार्थना मुद्रा में या सामने की ओ...

तंत्र-विद्या क्या है, जीवन में इसके उपयोग की सीमाएँ : जानिए चलते-चलते

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तंत्र-विद्या क्या है, जीवन में इसके उपयोग की सीमाएँ : जानिए चलते-चलते मानव जीवन केवल भौतिक शरीर तक सीमित नहीं है — इसके भीतर एक गूढ़ ऊर्जा तंत्र सक्रिय है, जिसे समझना और जागृत करना ही तंत्र-विद्या (Tantra Vidya) का सार है। “तंत्र” शब्द संस्कृत के “तन” (विस्तार) और “त्र” (त्राण/मुक्ति देने वाला) धातुओं से बना है — अर्थात् जो जीवन की सीमाओं का विस्तार करे और मुक्ति की ओर ले जाए , वही तंत्र है। तंत्र-विद्या का मूल सिद्धांत : तंत्र-विद्या का मूल आधार ऊर्जा (शक्ति) है। यह विद्या यह बताती है कि प्रत्येक व्यक्ति के भीतर चेतन ऊर्जा (कुंडलिनी शक्ति) सुप्त अवस्था में होती है, जिसे उचित साधना, मंत्र, ध्यान और संकल्प से जागृत किया जा सकता है। इसका उद्देश्य केवल अलौकिक शक्ति पाना नहीं, बल्कि स्वयं को समझना, नियंत्रण पाना और अपने जीवन को ऊँचे स्तर पर ले जाना है।  तंत्र कहता है — “शक्ति के बिना शिव भी शव हैं।” अर्थात् बिना ऊर्जा के ज्ञान भी निष्क्रिय है। तंत्र-विद्या के प्रमुख उपयोग : तंत्र का प्रयोग केवल सिद्धि या जादू के लिए नहीं, बल्कि आध्यात्मिक विकास और मानसिक संतुलन के लिए ...

कंट्रोल्ड इन्वायरनमेंटल स्ट्रेस के बहुआयामी फायदे : जानिए सेल्फ हीलिंग के अनोखे चमत्कारी लाभ

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  कंट्रोल्ड इन्वायरनमेंटल स्ट्रेस के बहुआयामी फायदे : जानिए सेल्फ हीलिंग के अनोखे चमत्कारी लाभ परिचय :  क्या कभी आपने सोचा है कि प्रकृति हमें जितनी चुनौती देती है, हम उतने ही मजबूत बनते हैं? ठंड, गर्मी, उपवास, सांस की रोक या तीव्र व्यायाम — ये सब अगर नियंत्रित और समयबद्ध रूप में अपनाए जाएँ, तो शरीर के अंदर की छिपी हुई हीलिंग पॉवर जाग उठती है। इसी सिद्धांत पर आधारित है -   " नियंत्रित पर्यावरणीय तनाव चिकित्सा"     जहाँ शरीर को थोड़े समय के लिए ऐसी परिस्थिति में रखा जाता है, जिससे वह खुद को पुनर्जीवित करने की प्रक्रिया शुरू करता है। Controlled Environmental Stress Therapy   Controlled Stress क्या करता है? जब हम शरीर को सीमित रूप से “तनाव” में डालते हैं — जैसे ठंडा पानी, गर्म वातावरण, ऑक्सीजन की कमी या उपवास - तो शरीर की कोशिकाएं “सर्वाइवल मोड” में चली जाती हैं। इस दौरान कई अद्भुत जैव-प्रक्रियाएँ (Biological Reactions) होती हैं — Heat Shock Proteins बनते हैं जो क्षतिग्रस्त कोशिकाओं को ठीक करते हैं। Autophagy प्रक्रिया शुरू होती है — पुरानी क...

रक्त संचार, हृदय स्वास्थ्य और यौन शक्ति बढ़ाने की महाऔषधि | घर पर बनाएं ये असरदार नुस्खा

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रक्त संचार, हृदय स्वास्थ्य और यौन शक्ति तीनों को बूस्ट करें : अपने हाथों बनाए इस महाऔषधि से क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद दो साधारण चीज़ें — लहसुन और शहद — मिलकर एक ऐसी प्राकृतिक महौषधि बना सकती हैं जो शरीर की नसों को खोल देती है, रक्त संचार को तेज करती है, हृदय की सेहत को मजबूत करती है और साथ ही यौन शक्ति को भी स्वाभाविक रूप से बढ़ाती है? आइए जानते हैं इसे बनाने और सेवन करने का सम्पूर्ण तरीका।   लहसुन और शहद का अद्भुत मेल   🧄&🍯 लहसुन को आयुर्वेद में “रसोन” कहा गया है — यानी ऐसा तत्व जो शरीर में रस (रक्त) का संचार बढ़ाता है। जब इसे शुद्ध शहद के साथ मिलाया जाता है, तो यह Nitric Oxide (NO) का निर्माण बढ़ाता है। यही गैस रक्त वाहिकाओं को फैलाकर पूरे शरीर में ऊर्जा और जीवन शक्ति का संचार करती है। 🧪 महौषधि बनाने की विधि (Garlic Honey Infusion) 🔹 आवश्यक सामग्री: ताज़ी लहसुन की कलियाँ – 15 से 20 शुद्ध, कच्चा (raw) शहद – लगभग 1 कप (250 ml) काँच का जार (Glass Jar) – ढक्कन सहित (प्लास्टिक या धातु का नहीं) 🔹 बनाने की विधि: लहसुन की कलियों को छ...

सिर्फ पेट नहीं बल्कि नसों में फंसी ‘वात’ को बाहर निकाले : दिव्य औषधि बनाने की विधि

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सिर्फ पेट नहीं बल्कि नसों में फंसी ‘वात’ को बाहर निकाले :  दिव्य औषधि बनाने की विधि जानें  परिचय : उम्र बढ़ने के साथ शरीर में सबसे अधिक असंतुलन जिस दोष का होता है, वह है “वात दोष” । वात जब शरीर में असंतुलित होकर जमा हो जाता है, तो वह नसों में, जोड़ों में, पेट में और रीढ़ की हड्डी के आसपास फंस जाता है। इसी के कारण चुभन वाला दर्द , सुन्नपन , खिंचाव , गैस , कमर दर्द , घुटनों में जकड़न , और नींद न आना जैसी परेशानियां धीरे-धीरे बढ़ने लगती हैं। वास्तव में जब यह “फंसी हुई वात” बाहर नहीं निकल पाती, तो शरीर में ऊर्जा का प्रवाह रुक जाता है और यही रुकावट अनेक रोगों की जड़ बन जाती है। लेकिन आयुर्वेद में इसका एक सरल, सस्ता और पूर्णत: सुरक्षित उपाय बताया गया है — एक दिव्य औषधि जो केवल पेट की गैस नहीं बल्कि पूरे शरीर से फंसी हुई वात को बाहर निकाल देती है। दिव्य औषधि बनाने की विधि : इस औषधि को बनाने के लिए केवल पाँच प्राकृतिक सामग्रियाँ चाहिए — अजवाइन – 50 ग्राम जीरा – 50 ग्राम सौंफ – 50 ग्राम छोटी हरड़ – 50 ग्राम शुद्ध हींग – 10 ग्राम बनाने की प्रक्रिया : भूनने की त...