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शुगर कंट्रोल करने का बेहद आसान तरीका: 7 दिन में देखें फर्क

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शुगर कंट्रोल करने का बेहद आसान तरीका: 7 दिन में देखें फर्क   ​क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रोजाना सुबह जल्दी उठकर वॉक करते हैं, मीठा खाना बिल्कुल बंद कर चुके हैं, चावल और आलू से परहेज करते हैं और समय पर दवाइयां भी लेते हैं, फिर भी आपकी ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं आ रही है? यदि हाँ, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। ​आइए, इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए शर्मा जी के एक वास्तविक उदाहरण से शुरुआत करते हैं। ​ शर्मा जी की कहानी: सब कुछ करने के बाद भी शुगर अनियंत्रित क्यों? ​ पिछले महीने शर्मा जी डॉक्टर के पास अपनी 6 महीने की शुगर रिपोर्ट्स का पूरा बंडल लेकर आए। वे बेहद अनुशासनप्रिय व्यक्ति हैं—रोजाना सुबह 5:00 बजे उठकर 40 मिनट वॉक करते थे, मीठा, चावल और आलू पूरी तरह से छोड़ चुके थे, और बिना किसी छुट्टी के अपनी दवाइयां नियमित रूप से ले रहे थे। इसके बावजूद उनकी फास्टिंग शुगर 190 से नीचे नहीं आ रही थी। थक हारकर उन्होंने पूछा, "डॉक्टर साहब, मैं सब कुछ कर रहा हूँ, फिर भी मेरी शुगर कंट्रोल में क्यों नहीं आ रही है?" ​ यदि आपकी कहानी भी शर्मा जी जैसी ही है, तो आइए जानते वे तीन मुख्य कारण...

मिर्गी और भूलने की बीमारी: कारण, लक्षण और असरदार घरेलू उपाय

 

मिर्गी और भूलने की बीमारी: कारण, लक्षण और असरदार घरेलू उपाय

मिर्गी (Epilepsy) मस्तिष्क से जुड़ा एक क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार 'सीज़र्स' (Seizures) या दौरे पड़ते हैं। यह कोई मानसिक बीमारी या छुआछूत का रोग नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि (electrical activity) में अचानक आए व्यवधान के कारण होता है।


यहाँ इसके बारे में मुख्य जानकारियां दी गई हैं:


1. दौरे (Seizures) क्यों पड़ते हैं?


हमारे मस्तिष्क की कोशिकाएं (Neurons) एक-दूसरे को विद्युत संकेतों के जरिए संदेश भेजती हैं। जब इन संकेतों में अचानक कोई "शॉर्ट सर्किट" या असंतुलन पैदा होता है, तो शरीर पर नियंत्रण कम हो जाता है और दौरे पड़ने लगते हैं।


 2. लक्षण:


मिर्गी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित है:


 🔶अचानक बेहोश हो जाना या गिर पड़ना।

 🔶हाथ-पैरों में झटके लगना या शरीर का अकड़ जाना।

  🔶मुँह से झाग आना या जीभ कट जाना।

  🔶शून्य में ताकना (Blank stare) या आसपास की सुध न रहना।

 🔶अजीब सी गंध, स्वाद या डर का अनुभव होना।


 3. मुख्य कारण:


कई मामलों में इसका कारण स्पष्ट नहीं होता, लेकिन कुछ सामान्य कारण ये हो सकते हैं:


  ♦️सिर में गंभीर चोट लगना।

  ♦️ब्रेन ट्यूमर या स्ट्रोक।

  ♦️मस्तिष्क में संक्रमण (जैसे Meningitis)।

  ♦️जन्म के समय ऑक्सीजन की कमी।

  ♦️आनुवंशिक (Genetic) कारण।

 4. उपचार हेतु प्रबंधन:

मिर्गी का इलाज संभव है और अधिकांश लोग सही उपचार के साथ सामान्य जीवन जी सकते हैं:

 दवाएं (Anti-epileptic drugs): ज्यादातर मामलों में दवाओं के नियमित सेवन से दौरों को पूरी तरह नियंत्रित किया जा सकता है।

 जीवनशैली:पर्याप्त नींद लेना, तनाव कम करना और समय पर भोजन करना इसमें बहुत सहायक होता है।

 सर्जरी: यदि दवाएं काम न करें, तो कुछ विशेष मामलों में सर्जरी पर विचार किया जाता है।

 5. प्राथमिक उपचार (First Aid) - यदि किसी को दौरा पड़े:

 घबराएं नहीं, व्यक्ति को सुरक्षित और खुली जगह पर लिटा दें।

 उनके सिर के नीचे कोई नरम कपड़ा या तकिया रख दें।

  उन्हें करवट (Side position) में लिटाएं ताकि सांस लेने में आसानी हो।


 क्या न करें ? :

मुँह में कुछ न डालें (चम्मच या उंगली), उन्हें कसकर न पकड़ें और न ही जूता सूंघाने जैसे अंधविश्वासों पर यकीन करें।

नोट: यदि दौरा 5 मिनट से ज्यादा देर तक रहे या व्यक्ति को चोट लग जाए, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।


 मिर्गी और विस्मृति (भूलने की बीमारी) के लिए प्रभावी प्राकृतिक उपचार:💊💊💊💊💊💊💊

मस्तिष्क से जुड़ी समस्याओं जैसे मिर्गी और याददाश्त की कमजोरी के समाधान के लिए आयुर्वेद में कुछ बेहद सरल और सटीक घरेलू उपाय बताए गए हैं। निम्न में से किसी एक को नियमित रूप से अपनाकर स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया जा सकता है:

      इन तीनों में से किसी एक का चयन करें:- 

 1. लाल प्याज का रस और पानी का प्रयोग:



मिर्गी और विस्मृति के लिए लाल प्याज का रस अत्यंत गुणकारी है। इसके लिए 30 मिली (लगभग 6 चम्मच) लाल प्याज के रस में 30 मिली पानी मिलाकर प्रतिदिन सुबह खाली पेट सेवन करें। सामान्य अवस्था में इसे 40 दिनों तक लें, परंतु यदि रोग काफी पुराना हो तो इसका सेवन 4 से 6 महीने तक निरंतर करना चाहिए। एक विशेष बात यह है कि यदि उपचार के दौरान कभी दौरा पड़ जाए, तो प्याज के रस की 2-3 बूंदें मरीज की नाक में डालने से तत्काल राहत मिलती है।


 2. तुलसी की पत्तियों का नियमित सेवन:



तुलसी न केवल एक पवित्र पौधा है बल्कि मानसिक विकारों के लिए एक अचूक औषधि भी है। प्रतिदिन सुबह खाली पेट तुलसी के 20 पत्तों को अच्छी तरह चबाकर खाएं। इस प्रयोग को 40 दिनों तक जारी रखें और पुराने मर्ज की स्थिति में इसे 4 से 6 माह तक बढ़ाएं। प्याज के रस की तरह ही, दौरा पड़ने की स्थिति में तुलसी के पत्तों के रस की 2-3 बूंदें नाक में डालना बहुत प्रभावी होता है।


3. ब्राह्मी और शहद का मिश्रण:


भूलने की बीमारी की अचूक औषधि:

मस्तिष्क की नसों को पोषण देने और याददाश्त बढ़ाने के लिए ब्राह्मी का स्थान सर्वोपरि है। एक चम्मच ब्राह्मी के रस में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह खाली पेट सेवन करें। मात्र 10-15 दिनों के सेवन से ही बड़ा अंतर दिखने लगता है, और पुराने रोगों में एक माह तक इसका प्रयोग बीमारी को जड़ से खत्म करने में सहायक होता है।

नोट: शहरी क्षेत्र में अनुपलब्धता की स्थिति में इसके टैब्लेट्स सुबह-शाम शहद के साथ लिए जा सकते हैं। 

विशेष सुझाव:


 1.इन सभी उपचारों के साथ शारीरिक और मानसिक मजबूती के लिए प्रतिदिन कम से कम दो चम्मच गाय के शुद्ध घी का सेवन अनिवार्य रूप से करना चाहिए। यह मस्तिष्क के न्युरोन्स को बल प्रदान करता है जिससे कई प्रकार के विकार दूर होते हैं और low blood pressure वालों के लिए रामबाण इलाज ही है। 


2. कम से कम 10 मिनट पेट से गहरी सांस लें और छोड़ें।मतलब भस्त्रिका प्राणायाम अवश्य करें। कपालभाति भी सामर्थ्य के अनुसार करने पर बहुत लाभ मिलता है। 

लेखक : विजय कुमार कश्यप 



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