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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

सौ साल तक जीने के मंत्र: स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए छोड़नी होंगी ये 7 आदतें


सौ साल तक जीने के मंत्र: स्वस्थ और लंबी उम्र के लिए छोड़नी होंगी ये 7 आदतें

​एक लंबी, स्वस्थ और सुखद उम्र जीना हर किसी का सपना होता है। अक्सर हम लंबी उम्र के लिए महंगे स्वास्थ्य विकल्पों या विशेष आहार की तलाश में रहते हैं। हालांकि, दीर्घायु का असली रहस्य क्या शुरू करना है, इसमें नहीं, बल्कि यह है कि आप अपने जीवन से क्या 'छोड़' देते हैं। यहाँ वे 7 महत्वपूर्ण आदतें दी गई हैं, जिन्हें त्यागकर आप अपने जीवन की गुणवत्ता और अवधि में सुधार कर सकते हैं।

​1. रात को देर से भोजन करना बंद करें

हमारा शरीर रात के समय अपनी मरम्मत (Repair) और विश्राम के लिए बना है, न कि भारी पाचन प्रक्रिया के लिए। देर रात तक भोजन करने से शरीर को आराम नहीं मिल पाता और वह पूरी रात ऊर्जा पचाने में ही खर्च कर देता है।

  • बदलाव: सूरज ढलने के बाद भोजन करना बंद करें या बहुत हल्का भोजन लें। इससे सुबह उठने पर शरीर हल्का और मन अधिक सक्रिय महसूस होता है।

​2. व्यर्थ की बहसों से बचें

दूसरों को अपनी बात सही साबित करने की कोशिश में अपनी मानसिक ऊर्जा बर्बाद करना सेहत के लिए नुकसानदायक है। फालतू की बहसों से केवल तनाव और उच्च रक्तचाप (High BP) ही मिलता है।

  • बदलाव: हर बार सही साबित होने की जिद छोड़ें। चुप रहकर आगे बढ़ जाना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी शांति को सुरक्षित रखने की एक बुद्धिमानी भरी रणनीति है।

​3. शारीरिक निष्क्रियता को त्यागें

​'रुका हुआ पानी और रुका हुआ शरीर' दोनों ही सड़ने लगते हैं। लगातार एक ही कुर्सी या स्थान पर बैठे रहना शरीर के अंगों को धीरे-धीरे शिथिल बना देता है।

  • बदलाव: अपने छोटे-मोटे काम खुद करें और दिन भर में सक्रिय रहने की आदत डालें। शारीरिक सक्रियता ही शरीर को लंबे समय तक जवान बनाए रखती है।

4. पुराने गिले-शिकवों का बोझ हटाएँ

किसी के प्रति मन में गुस्सा, नफरत या कड़वाहट रखना एक 'धीमे जहर' की तरह है। यह बोझ बाहर से नहीं दिखता, लेकिन अंदर ही अंदर इंसान को मानसिक और शारीरिक रूप से बीमार कर देता है।

  • बदलाव: लोगों को माफ करना सीखें। यह उनके लिए नहीं, बल्कि खुद को उस मानसिक तनाव से मुक्त करने के लिए अनिवार्य है।

5. सोने से पहले नकारात्मकता का त्याग

सोने से पहले हम जो भी जानकारी दिमाग में डालते हैं, हमारा अवचेतन मन रात भर उसी पर काम करता है। नकारात्मक खबरें, डर या लड़ाई-झगड़े वाली चीजें नींद की गुणवत्ता और मानसिक शांति को खत्म कर देती हैं।

  • बदलाव: सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल और तनावपूर्ण चीजों से दूरी बना लें। कुछ शांत पढ़ें या ध्यान करें।

6. 'सबको खुश करने' का दबाव छोड़ें

दूसरों की अपेक्षाओं को पूरा करने के चक्कर में अक्सर हम खुद को भूल जाते हैं। हर बात पर 'हाँ' कहना असल में अपनी ऊर्जा का गलत उपयोग है।

  • बदलाव: विनम्रता के साथ 'ना' कहना सीखें। आपकी ऊर्जा सीमित है, इसे उन कार्यों और लोगों पर खर्च करें जो वास्तव में आपके लिए मायने रखते हैं।

7. जीवन को 'कल' पर टालना बंद करें

सबसे घातक आदत जीवन को भविष्य के लिए टालना है। अक्सर लोग सोचते हैं कि "जब सब सही होगा, तब जिएंगे," लेकिन वह सही समय कभी नहीं आता।

  • बदलाव: आज में जीना सीखें। जो छोटी-छोटी खुशियाँ आप कल के लिए टाल रहे हैं, उन्हें अभी और इसी वक्त पूरा करें।

निष्कर्ष:

लंबी उम्र का कोई एक जादुई नुस्खा नहीं है, बल्कि यह हमारे द्वारा रोजमर्रा में लिए गए निर्णयों का परिणाम है। ये सात आदतें सुनने में सामान्य लग सकती हैं, लेकिन यदि इन्हें जीवन का हिस्सा बना लिया जाए, तो ये शारीरिक और मानसिक बीमारियों के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकती हैं। याद रखें, आप अपनी आदतों से ही अपने आने वाले कल का निर्माण करते हैं। बेहतर कल के लिए आज से ही इन बाधाओं को अपने जीवन से बाहर निकालें। 

✍️ लेखक: विजय कुमार कश्यप 

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