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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण एवं महाकाल शिव के आध्यात्म गुरु : शास्त्र सम्मत जानकारियाँ



मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम, भगवान श्रीकृष्ण एवं महाकाल शिव के
आध्यात्म गुरु : शास्त्र सम्मत जानकारियाँ 


🕉️ प्रस्तावना :

सनातन धर्म की त्रिमूर्ति — ब्रह्मा, विष्णु और महेश — इस सृष्टि के संचालन के मूल आधार हैं। इनमें भगवान विष्णु के अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण जहाँ मानव रूप में अवतरित हुए, वहीं भगवान शिव आदि देव माने जाते हैं। इन तीनों की दिव्यता और लीलाओं में एक गहन आध्यात्मिक रहस्य छिपा है, जिसमें उनके आध्यात्मिक गुरुओं का योगदान भी उल्लेखनीय है। आइए इस लेख में हम इस विषय की गहराई में उतरें।


🌸 1. मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के आध्यात्म गुरु - महर्षि विश्वामित्र

  • यद्यपि महर्षि वशिष्ठ भगवान राम के कुलगुरु थे और उन्होंने राम को राज्य एवं मर्यादा धर्म की शिक्षा दी, परंतु आध्यात्मिक मार्ग की ओर उनका अग्रसरण महर्षि विश्वामित्र ने किया।

  • विश्वामित्र जी ने राम और लक्ष्मण को तपश्चर्या, अस्त्र-शस्त्र, ध्यान और ब्रह्म ज्ञान की शिक्षा दी। उन्होंने ही श्रीराम को ताड़का वध और मारीच-सुबाहु के विरुद्ध खड़ा किया।

  • रामचरितमानस में स्वयं तुलसीदास जी ने लिखा है:

    “विश्वामित्र मुनि अनुज समेता, लीन दोउ अनुज राज सचेता।”

  • राम ने ऋषियों की रक्षा, ब्रह्मज्ञान का अभ्यास और जनकपुर की यात्रा सब विश्वामित्र की छत्रछाया में किया।


🌼 2. भगवान श्रीकृष्ण के आध्यात्म गुरु - महर्षि दुर्वासा

  • महर्षि संदिपनि भगवान श्रीकृष्ण के बाल्यकाल के गुरु थे, जिनसे उन्होंने वेद, नीति, गणित, शास्त्र, अस्त्र-शस्त्र आदि विद्याएं 64 दिनों में प्राप्त कीं।

  • किंतु जब बात आती है अंतर्ज्ञान, तप, योग एवं अद्वैत की शिक्षा की, तब महर्षि दुर्वासा का उल्लेख प्रमुख रूप से आता है।

  • पुराणों के अनुसार:

    • दुर्वासा ऋषि ने श्रीकृष्ण को योगबल, ब्रह्मज्ञान, आत्मनिष्ठा और ध्यान की शिक्षा दी।

    • महाभारत के अनुशासन पर्व में भी इसका संकेत है कि श्रीकृष्ण ने दुर्वासा मुनि के सान्निध्य में तप किया।

  • श्रीकृष्ण का निरहंकारिता और योगबल से युक्त निर्णयात्मक चरित्र दुर्वासा जैसे ऋषि के सान्निध्य में और प्रबल हुआ।


🔱 3. महाकाल भगवान शिव के गुरु कौन.. ?

  • शिवजी स्वयं 'आदि गुरु' हैं — शिवपुराण के अनुसार शिव ने ही सबसे पहले ब्रह्मा को उत्पन्न किया, फिर उनकी नाभि से विष्णु प्रकट हुए।

  • अतः शिव का कोई गुरु नहीं। उन्हें 'स्वयंभू' कहा जाता है — बिना किसी से उत्पन्न हुए, स्वयं से प्रकट।


  • लेकिन शिव को गुरु परंपरा का सर्वोच्च संरक्षक माना गया है। 

  • उन्होंने ही - 


  • सप्त ऋषियों को ज्ञान दिया।


  • गुरु गीता का उपदेश पार्वती को दिया, जो आज भी शिव उपासकों की प्रमुख गुरु स्तुति है।


  • भगवान राम, जिन्हें शिवजी अपना आराध्य मानते हैं, वे स्वयं शिवजी को गुरु मानते हैं।

  •  रामेश्वरम में राम द्वारा शिवलिंग की स्थापना इसका प्रमाण है।


  • वहीं रामचरितमानस में शिवजी कहते हैं:
    “गुरु गृहनाथ राम सिव मानी।
    निज अचरज मनभा समानी।।”


  • अर्थात शिव भी श्रीराम को ही अपना गुरु मानते हैं।

  • 🧘‍♂️ निष्कर्ष:

  • श्रीराम के आध्यात्मिक गुरु विश्वामित्र रहे, जिन्होंने उन्हें ब्रह्मज्ञान, आत्मबल और धर्म युद्ध की शिक्षा दी।

  • श्रीकृष्ण के आध्यात्मिक गुरु दुर्वासा रहे, जिन्होंने उन्हें योग, ध्यान और आत्मनिष्ठा सिखाई।

  • भगवान शिव का कोई गुरु नहीं, वे स्वयं आदि देव हैं, लेकिन गुरु परंपरा के मूल स्तंभ भी वही हैं।

  • अंत में यह निष्कर्ष निकलता है कि शिव, विष्णु और ब्रह्मा – ये तीनों एक ही परमात्मा के विभिन्न रूप हैं।

    • विष्णु के अवतार श्रीराम और श्रीकृष्ण, मर्यादा और योग का संदेश देते हैं।
    • और शिव, जो स्वयं अद्वैत के मूर्तिमान स्वरूप हैं, संसार को गुरु का महत्व सिखाते हैं।

🙏 गुरु परंपरा की यह अखंड धारा आज भी सनातन धर्म की आत्मा है।


🙏यह लेख सनातन धर्म के समस्त जिज्ञासुओं के लिए शास्त्र सम्मत उद्धरणों के साथ भ्रम निवारण हेतु प्रस्तुति मात्र समझा जाए। मुझसे कहीं कोई त्रुटि हुई हो तो क्षमा प्रार्थी हूँ,निःसंकोच कमेंट कर सकते हैं। किन्हीं को कोई आपत्ति होने पर मैं गुरु कृपा से निवारण करने का प्रयास करुंगा।

लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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