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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

गुरु पूर्णिमा का महत्व : क्या अर्पण करें हम इस पावन पर्व पर..?


🌕 गुरु पूर्णिमा का महत्व : क्या अर्पण करें हम इस पावन पर्व पर..?

गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु गुरुर्देवो महेश्वरः।

गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्री गुरवे नमः॥

गुरु पूर्णिमा का दिन मात्र एक पर्व नहीं, अपितु वह दिव्य अवसर है जब हम अपने जीवनदाता, मार्गदर्शक, और आत्मिक संरक्षक गुरु को स्मरण करते हैं, उनके प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और हृदय से आशीर्वाद की याचना करते हैं।


🌺 गुरु पूर्णिमा का आध्यात्मिक महत्व

गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। यह वही दिन है जब आदि गुरु महर्षि वेदव्यास ने चारों वेदों का संकलन किया और संपूर्ण ज्ञान परंपरा को एक सूत्र में बांधा। इसी कारण यह दिन व्यास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। यही वह दिवस है जब शिष्य अपने गुरु के चरणों में अपने समर्पण, श्रद्धा और प्रेम को प्रकट करता है।

🙏 क्या अर्पण करें हम इस पावन पर्व पर?

इस दिन बाजार से कीमती वस्तुएं लाकर अर्पण करना आवश्यक नहीं, बल्कि शुद्ध मन, श्रद्धा से पूर्ण हृदय और समर्पित भाव ही वह पुष्प हैं जिन्हें देखकर गुरु का हृदय आनंदित होता है।

1. अपना चित्त (मन-बुद्धि) समर्पित करें

गुरु वही हैं जो अंधकार में ज्योति का दीप जलाते हैं। यदि हम इस दिन अपने चित्त को गुरु में स्थिर कर दें, तो यही सबसे सुंदर गुरु-दक्षिणा है।

2. अपने दोषों का त्याग करें

गुरु को क्या अर्पण करें? — अपनी आलस्य, क्रोध, मोह, और स्वार्थ को त्याग कर एक सच्चे साधक की तरह अपने आप को रूपांतरित करें।

3. सेवा भाव रखें

गुरु की सेवा केवल चरणों में बैठने से नहीं होती, बल्कि उनके बताए हुए मार्ग पर चलना और समाज में सच्चाई, प्रेम और करुणा को फैलाना ही सेवा है।

4. गुरुवाणी का श्रवण और चिंतन

इस दिन गुरु की वाणी का श्रवण करें, उन्हें ध्यान से सुनें, और अपनी दिनचर्या में उन वचनों को अनुप्रयोग करें।

5. मौन व्रत या ध्यान

गुरु पूर्णिमा पर एक घंटा मौन या गुरु ध्यान करके आप अपने आंतरिक संसार को गुरु के प्रति खोल सकते हैं। मौन में ही ईश्वर और गुरु की वास्तविक अनुभूति होती है

6. संकल्प अर्पण करें

इस दिन यह संकल्प लें कि आप अपने गुरु के बताए मार्ग पर निष्ठा पूर्वक चलेंगे, न तो भटकेंगे और न ही हटेंगे।


🌸 मेरे गुरुवर कैसे प्रसन्न होंगे?

गुरु का प्रेम स्वार्थरहित होता है। वे किसी वस्तु के इच्छुक नहीं होते। उन्हें प्रसन्न करने का एक ही मार्ग है — श्रद्धा, समर्पण और साधना।

जो शिष्य अपने गुरु में मन लगाकर, उनके बताए सत्य-पथ पर चलते हुए निरंतर आत्म-सुधार करता है, वह गुरु का सबसे प्रिय होता है।

गुरु के प्रति निष्कलंक भक्ति और आचरण की शुद्धता ही सबसे श्रेष्ठ पुष्प हैं जिन्हें हम इस पावन पर्व पर अर्पित कर सकते हैं।


🌼 निष्कर्ष :

गुरु पूर्णिमा एक ऐसा क्षण है जहाँ हम रुककर पीछे देख सकते हैं — कि हमारे जीवन में गुरु का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। जो सदा गुरु की कृपा का स्मरण करता है, उसमें अहंकार टिकता नहीं। ऐसे शिष्य की मनोकामनाएँ भी गुरु की कृपा से पूर्ण होती हैं।

तो आइए, इस गुरु पूर्णिमा पर अपने भीतर के दोषों को त्यागें, सत्य और प्रेम का दीप जलाएं और अपने गुरुवर के श्रीचरणों में श्रद्धा का पुष्प अर्पित करें। यही सच्चा अर्पण है।


🪔 शुभ गुरु पूर्णिमा..! 

आपके जीवन में सदैव गुरु कृपा बनी रहे…!! 

 श्री गुरुदेव भगवान सदा मुझ पर प्रसन्न रहें..!!! 

अपने गुरु महाराज जी का सेवक : विजय कुमार कश्यप 

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