https://www.thehealthjournal.co.in THE HEALTH JOURNAL written and designed by VIJAY K KASHYAP

जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

चित्र
​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड: स्वास्थ्य का एक अदृश्य रक्षक

 

बाॅडी में नाइट्रिक ऑक्साइड: स्वास्थ्य का एक अंदरूनी रक्षक

क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में एक ऐसा प्राकृतिक मॉलिक्यूल है, जो हमारी सेहत का सबसे बड़ा रक्षक है? इसे 'नाइट्रिक ऑक्साइड' कहते हैं। यह न केवल हृदय और मस्तिष्क की कार्यक्षमता बढ़ाता है, बल्कि स्टैमिना, इम्यूनिटी और पाचन को बेहतर बनाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

1. नाइट्रिक ऑक्साइड जरूरी क्यों है - दिल की सेहत को सुधारता है 


यह हमारे शरीर में रक्त प्रवाह
(Blood circulation) को सुचारू बनाए रखने का काम करता है। यह रक्त वाहिकाओं को लचीला और चौड़ा रखता है, जिससे ऑक्सीजन और पोषक तत्व शरीर के हर अंग तक आसानी से पहुँचते हैं।

​2. सांस लेने का सही तरीका: 'नेज़ल ब्रीथिंग'

​हमारे शरीर का लगभग 30-35% नाइट्रिक ऑक्साइड नाक के साइनस में बनता है।

  • नाक से सांस लें: मुंह से सांस लेने पर हम इस कुदरती 'नाइट्रिक ऑक्साइड फैक्ट्री' को बाईपास कर देते हैं। 


  • नेज़ल हमिंग (भंवरे जैसी गूंज): योग में जिसे 'भ्रामरी प्राणायाम' कहते हैं, वह नाइट्रिक ऑक्साइड बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका है। सांस छोड़ते समय गले से जो गूंज पैदा होती है, उससे इसका उत्पादन 15 गुना तक बढ़ सकता है।

​3. व्यायाम और सक्रियता

​एरोबिक व्यायाम जैसे तेज चलना, जॉगिंग, साइकिलिंग या स्विमिंग करने से हमारी धमनियों की आंतरिक परत सक्रिय होती है। जब हम सक्रिय होते हैं, तो शरीर को अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जिससे हमारा शरीर खुद-ब-खुद अधिक नाइट्रिक ऑक्साइड बनाने लगता है।

4. आहार में बदलाव: क्या खाएं?

​कुछ विशेष खाद्य पदार्थ नाइट्रिक ऑक्साइड के स्तर को बढ़ाने में जादुई असर दिखाते हैं:

  • नाइट्रेट रिच फूड: चुकंदर (बीटरूट), पालक, और सभी हरी पत्तेदार सब्जियाँ।

  • लहसुन: यह नाइट्रिक ऑक्साइड बनाने वाले एंजाइम को सक्रिय करता है।

  • तरबूज और खट्टे फल: तरबूज (एल-सिट्रुलिन के लिए) और संतरा, नींबू, आंवला जैसे विटामिन-सी युक्त फल इसे प्रोटेक्ट करते हैं।

  • खास सलाह: खाना धीरे-धीरे और अच्छी तरह चबाकर खाएं। मुंह की लार और बैक्टीरिया ही नाइट्रेट को नाइट्रिक ऑक्साइड में बदलने की प्रक्रिया शुरू करते हैं।

5. किन चीजों से बचें?

  • स्मोकिंग: यह धमनियों की उस परत को खराब कर देती है जहाँ नाइट्रिक ऑक्साइड बनता है।

  • एंटी-बैक्टीरियल माउथवॉश: ये मुंह के उन 'अच्छे बैक्टीरिया' को मार देते हैं जो नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन के लिए जरूरी हैं।

नाइट्रिक ऑक्साइड है क्या..? 

नाइट्रिक ऑक्साइड शरीर द्वारा निर्मित एक गैसीय अणु है जो रक्त वाहिकाओं को आराम (relax) देकर रक्त के संचार को सुचारू बनाने का काम करता है। यह एक ट्राफिक पुलिस की तरह सिग्नल देने वाला मोलेक्युल है। 

इसका निर्माण कैसे होता है? 

​शरीर इसे भोजन में मौजूद अमीनो एसिड (जैसे L-arginine) का उपयोग करके स्वयं बनाता है।

​विटामिन B12 बनाम नाइट्रिक ऑक्साइड: मुख्य अंतर

  • प्रकृति: विटामिन B12 एक विटामिन है, जबकि नाइट्रिक ऑक्साइड एक गैस है।
  • कार्य: B12 कोशिकाओं की मरम्मत करता है, जबकि नाइट्रिक ऑक्साइड रक्त संचार को नियंत्रित करता है।
  • संग्रह: विटामिन B12 लीवर में जमा हो सकता है, लेकिन नाइट्रिक ऑक्साइड तुरंत उपयोग होकर समाप्त हो जाता है।

​आपको क्या याद रखना चाहिए?

​सेहत के लिए दोनों का महत्व

​विटामिन B12 की कमी से थकान और नसों की समस्या हो सकती है, जबकि नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी रक्तचाप और हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। अपने आहार में सुधार और नियमित शारीरिक गतिविधि से आप इन दोनों को संतुलित रख सकते हैं।

लिंक: अधिक जानकारी हेतु देखें 👇 

विटामिन B12 कमी के लक्षण और पूर्ति के उपाय

निष्कर्ष:

नाइट्रिक ऑक्साइड कोई बाहर से लेने वाली दवा नहीं, बल्कि आपके शरीर का अपना एक अनमोल घटक है। इसे बढ़ाने के लिए किसी महंगी सप्लीमेंट की नहीं, बल्कि सही आदतों की जरूरत है। बस नाक से सांस लेने की आदत डालें, हर दिन थोड़ा पैदल चलें और अपनी थाली में ताजी हरी सब्जियां शामिल करें। थोड़ी देर खुली धूप में बैठना भी इसमें बहुत मददगार है। साधारण बदलाव, बड़ा फायदा--आज से ही अपने शरीर के इस रक्षक को मजबूत बनाना शुरू करें!

लेखक : विजय कुमार कश्यप 

देखने के लिए स्क्रोल करें :

क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रसोई ही दुनिया की सबसे बड़ी और सुरक्षित डिस्पेंसरी है?

इन सरल अभ्यासों और रसोई की खानपान से दिमाग को बनायें शार्प

शरीर खुद ही करता है सभी रोगों का इलाज | जानें प्रकृति के अद्भुत रहस्य और प्राकृतिक उपचार

उम्र बढ़ने के साथ शरीर से ज्यादा मन जिम्मेवार है यौन दुर्बलता हेतु : नित्य नाड़ी शोधन कर इच्छा को बलवान बनायें

नीम और हल्दी का सही उपयोग करके टाइप 2 डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करें – प्राकृतिक और असरदार उपाय

गर्मी के दिनों में चना सत्तू खाने के फायदे - एक संपूर्ण गाइड

अनुशासित मन-मस्तिष्क ही राज है स्वस्थ रहने का

टाईप 2 शुगर से बचाव (Type 2 Sugar prevention) का आसान और बेहतर उपाय

कान दर्द की समस्या: पाएं असरदार आयुर्वेदिक समाधान

गहरी नींद से खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं ये बीमारियाँ : फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे