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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

अच्छे स्वास्थ्य का मंत्र: बहुआयामी स्वच्छता और प्रकृति का रहस्य

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⏩ अच्छे स्वास्थ्य का मंत्र: बहुआयामी स्वच्छता और प्रकृति का रहस्य ​ अक्सर हम स्वास्थ्य का अर्थ केवल 'बीमारी का न होना' समझ लेते हैं, लेकिन वास्तव में स्वास्थ्य एक गहरी और बहुआयामी अवस्था है। प्रकृति का एक बड़ा रहस्य यह है कि हमारा शरीर और मस्तिष्क तभी पूर्ण क्षमता से कार्य करते हैं जब हम 'सर्वांगीण स्वच्छता' को अपनाते हैं। आइए, स्वास्थ्य के उन सात स्तंभों को समझें जो एक आदर्श जीवन की नींव रखते हैं। ​ 1. शरीर एवं वस्त्र: प्रत्यक्ष स्वच्छता: ​ स्वच्छता की शुरुआत स्वयं से होती है। प्रतिदिन स्नान केवल धूल साफ करना नहीं, बल्कि शरीर के रोम-छिद्रों को जागृत करना है। स्वच्छ और सूती वस्त्र न केवल त्वचा को सांस लेने में मदद करते हैं, बल्कि हमारे आत्मविश्वास और ऊर्जा के स्तर को भी बढ़ाते हैं। गंदे वस्त्र नकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जबकि स्वच्छता तन को स्फूर्ति और मन को प्रसन्नता देती है। ​2. भोजन एवं पानी: आंतरिक शुद्धता: ​हम जो खाते हैं, वही हम बन जाते हैं। सात्विक, ताजा और घर का बना भोजन शरीर के पोषण के लिए अनिवार्य है। पानी न केवल प्यास बुझाता है, बल्कि यह शरीर के व...

मुँह के लार की निर्झर धार : वेलनेस की अविरल बहती गंगोत्री की विशिष्टता

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मुँह के लार की निर्झर धार : वेलनेस की अविरल बहती गंगोत्री की विशिष्टता हमारा शरीर प्रकृति की अद्भुत कृति है। यह निरंतर अपने संतुलन और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अनेक तरह की प्रक्रियाएँ करता रहता है। इन्हीं में से एक प्रक्रिया है — मुँह में लार (Saliva) का लगातार स्रावित होते रहना  । सामान्यतः लोग इसे केवल भोजन पचाने में सहायक मानते हैं, परंतु वास्तविकता यह है कि यह एक अविरल बहती गंगोत्री है, जो हमें भीतर से वेलनेस प्रदान करती रहती है। शरीर की अम्लीय प्रकृति और लार का क्षारीय संतुलन: मानव शरीर की आंतरिक प्रकृति सामान्यतः अम्लीय (Acidic) होती है। भोजन, तनाव, प्रदूषण और आधुनिक जीवनशैली की वजह से यह अम्लीयता और भी बढ़ जाती है। यदि यह अम्लीयता बिना संतुलित हुए बढ़े तो शरीर अनेक रोगों का घर बन सकता है। यहीं पर लार (Saliva) अपनी विशेष भूमिका निभाता है। लार स्वभाव से क्षारीय (Alkaline) होता है। जब यह लगातार मुँह में बनता रहता है और पाचन तंत्र में जाता है, तो शरीर की अम्लीयता को संतुलित करता है। यही कारण है कि इसे "वेलनेस की गंगोत्री" कहा जा सकता है। लार में कैल्शियम...

चेहरे पर अनचाहे तील और मस्से को हटाने के लिए सरल घरेलू उपाय

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चेहरे पर अनचाहे तील और मस्से : हटाने के लिए सरल घरेलू उपाय  1. तिल (Moles) होने के कारण: ​तिल त्वचा पर तब बनते हैं जब त्वचा की रंगत बनाने वाली कोशिकाएं, जिन्हें मेलेनोसाइट्स (Melanocytes) कहा जाता है, पूरे त्वचा में फैलने के बजाय एक जगह जमा होकर गुच्छा बना लेती हैं। ​ आनुवंशिकता (Genetics): अगर आपके परिवार में माता-पिता को अधिक तिल हैं, तो इसकी काफी संभावना है कि आपको भी बचपन या किशोरावस्था में तिल विकसित होंगे। ​ धूप का प्रभाव (Sun Exposure): सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणें मेलेनोसाइट्स को सक्रिय करती हैं, जिससे तिलों की संख्या बढ़ सकती है या उनका रंग गहरा हो सकता है। ​ हार्मोनल बदलाव: किशोरावस्था, गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण नए तिल निकल सकते हैं। ​ 2. मस्से (Warts) होने के कारण: ​मस्से तिल से बिल्कुल अलग होते हैं। यह त्वचा की कोशिकाओं के जमाव के बजाय एक संक्रमण का परिणाम होते हैं। ​ HPV वायरस: मस्से मुख्य रूप से Human Papillomavirus (HPV) के कारण होते हैं। यह वायरस त्वचा की ऊपरी परत में प्रवेश कर केराटिन (एक प्रकार का प्र...

बाँए अथवा दाँए कांख में बार-बार गिल्टी बनना, घाव का रूप लेना और ठीक होने पर दुहराव : कारण, लक्षण और कारगर इलाज

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बाँए अथवा दाँए कांख में बार-बार गिल्टी बनना, घाव का रूप लेना और ठीक होने पर दुहराव : कारण, लक्षण और कारगर इलाज हमारे शरीर की कांख (बगल) एक संवेदनशील स्थान है जहाँ पसीना, तेल ग्रंथियाँ, लिम्फ नोड्स और बाल कूप (Hair Follicles) बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। कई बार देखा जाता है कि बाँए या दाँए कांख में बार-बार गिल्टी ( फोड़ा/सूजन ) बनती है, वह घाव का रूप ले लेती है और ठीक होने के बाद कुछ समय में फिर से उभर आती है। यह समस्या केवल साधारण संक्रमण नहीं बल्कि शरीर के आंतरिक असंतुलन और जीवनशैली से जुड़ी होती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि — 👉 यह कोई लाइलाज बीमारी नहीं है। सही कारण पहचान कर उपचार करने पर इससे पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है। संभावित कारण पसीना और बैक्टीरिया संक्रमण बाल कूप का इंफेक्शन (Folliculitis) हाइड्राडेनाइटिस सुप्पुरेटिवा (Hidradenitis Suppurativa) लिम्फ नोड्स की सूजन कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता मधुमेह (Diabetes) हार्मोनल असंतुलन लक्षण: कांख में छोटी कठोर गिल्टी का बनना। दर्द और लालिमा के साथ सूजन। मवाद/पीप भरकर घाव बन जाना। घाव भरने के बाद कुछ समय में फिर ...

कोलेस्ट्रॉल क्या होता है, क्या यह शुगर का कारण बनता है? : जानिए इसके लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक समाधान

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🧠 कोलेस्ट्रॉल क्या होता है, क्या यह शुगर का कारण बनता है?: जानिए इसके लक्षण, कारण और आयुर्वेदिक समाधान 🌟 परिचय: वर्तमान समय में कोलेस्ट्रॉल और डायबिटीज (शुगर) दो सबसे आम और तेजी से बढ़ती बीमारियाँ हैं। इन दोनों के बीच गहरा संबंध देखा गया है। बहुत से लोग पूछते हैं – क्या कोलेस्ट्रॉल बढ़ने से शुगर हो सकती है? इस लेख में हम जानेंगे: कोलेस्ट्रॉल क्या होता है यह शरीर में कैसे काम करता है यह शुगर से कैसे जुड़ा है लक्षण, कारण और इसे नियं त्रित करने के आयुर्वेदिक व घरेलू उपाय 🧬 कोलेस्ट्रॉल क्या है? कोलेस्ट्रॉल एक मोम जैसा वसायुक्त पदार्थ है जो शरीर की हर कोशिका में पाया जाता है। यह कुछ आवश्यक कार्य करता है: हार्मोन का निर्माण कोशिकाओं की झिल्ली बनाना पित्त रस बनाना विटामिन D का निर्माण लेकिन जब कोलेस्ट्रॉल असंतुलित हो जाता है, तो यह रक्त वाहिकाओं में जमकर रक्त प्रवाह को बाधित करता है और कई बीमारियों का कारण बनता है। ⚖️ कोलेस्ट्रॉल के प्रकार: प्रकार नाम कार्य प्रभाव 1️⃣ LDL (Low-Density Lipoprotein) शरीर में कोलेस्ट्रॉल पहुंचाता है "बुरा कोलेस्ट्रॉल", धम...

स्वर विज्ञान के मूल सिद्धांतों को जानें : विभिन्न स्वास्थ्य समस्याओं से तत्काल निबटें

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स्वर विज्ञान :   श्वास की शक्ति से रोगों का उपचार और संतुलित जीवन :  स्वर विज्ञान एक प्राचीन भारतीय विद्या है जो श्वास-प्रश्वास की गति और उसके शरीर तथा मन पर पड़ने वाले प्रभावों का गहरा अध्ययन करती है। यह विद्या बताती है कि हमारी नाक के दोनों नथुनों (नासिका) से बहने वाली श्वास (स्वर) हमारे शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को कैसे प्रभावित करती है ।  स्वर विज्ञान का मूल सिद्धांत : प्राण, नाड़ी और पंच तत्व :  स्वर विज्ञान का आधार प्राणवायु (श्वास) और शरीर में मौजूद नाड़ियों का सिद्धांत है। हमारे शरीर में 72,000 से अधिक सूक्ष्म नाड़ियाँ मानी जाती हैं, जिनमें से तीन प्रमुख हैं :  इड़ा नाड़ी (चंद्र नाड़ी):  यह बाईं नासिका से जुड़ी है और चंद्रमा के समान शीतल, शांत और रचनात्मक ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है।  यह parasympathetic nervous system से संबंधित मानी जाती है।  पिंगला नाड़ी (सूर्य नाड़ी): यह दाहिनी नासिका से जुड़ी है और सूर्य के समान गर्म, सक्रिय और परिवर्तनकारी ऊर्जा का प्रतिनिधित्व करती है।  यह sympathetic nervous system से संबंध...

मिर्गी और भूलने की बीमारी: कारण, लक्षण और असरदार घरेलू उपाय

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  मिर्गी और भूलने की बीमारी : कारण, लक्षण और असरदार घरेलू उपाय मिर्गी (Epilepsy) मस्तिष्क से जुड़ा एक क्रॉनिक न्यूरोलॉजिकल विकार है, जिसमें व्यक्ति को बार-बार 'सीज़र्स' (Seizures) या दौरे पड़ते हैं। यह कोई मानसिक बीमारी या छुआछूत का रोग नहीं है, बल्कि मस्तिष्क की विद्युत गतिविधि (electrical activity) में अचानक आए व्यवधान के कारण होता है। यहाँ इसके बारे में मुख्य जानकारियां दी गई हैं: 1. दौरे (Seizures) क्यों पड़ते हैं? हमारे मस्तिष्क की कोशिकाएं (Neurons) एक-दूसरे को विद्युत संकेतों के जरिए संदेश भेजती हैं। जब इन संकेतों में अचानक कोई "शॉर्ट सर्किट" या असंतुलन पैदा होता है, तो शरीर पर नियंत्रण कम हो जाता है और दौरे पड़ने लगते हैं।  2. लक्षण: मिर्गी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि मस्तिष्क का कौन सा हिस्सा प्रभावित है:  🔶अचानक बेहोश हो जाना या गिर पड़ना।  🔶हाथ-पैरों में झटके लगना या शरीर का अकड़ जाना।   🔶मुँह से झाग आना या जीभ कट जाना।   🔶शून्य में ताकना (Blank stare) या आसपास की सुध न रहना।  🔶अजीब सी गंध, स्वाद या डर का अनुभव होना।  3. मुख्य क...

लंबे समय से चली आ रही बीमारियाँ क्यों जल्दी ठीक नहीं होतीं? जानिए गहराई से समाधान

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लंबे समय से चली आ रही बीमारियाँ क्यों जल्दी ठीक नहीं होतीं? जानिए गहराई से समाधान आज के समय में अधिकांश लोग ऐसी बीमारियों से जूझ रहे हैं जो अचानक नहीं आईं—बल्कि धीरे-धीरे वर्षों में विकसित हुई हैं। चाहे वह जोड़ों का दर्द हो, मधुमेह, पाचन समस्या या नसों की कमजोरी—इन सभी का एक लंबा इतिहास होता है। 👉 सच्चाई यह है: “जिस बीमारी को बनने में वर्षों लगे हैं, उसका समाधान भी धैर्य, निरंतरता और सही दिशा में समय मांगता है।”  बीमारी बनने की असली प्रक्रिया: बीमारी अचानक नहीं आती, बल्कि यह एक धीमी प्रक्रिया है: ❌ गलत खान-पान (अत्यधिक तला, मीठा, रसायनयुक्त भोजन) ❌ अनियमित दिनचर्या (देर रात तक जागना, नींद की कमी) ❌ मानसिक तनाव और चिंता ❌ शारीरिक गतिविधि की कमी ❌ प्रकृति से दूर जीवन - ये सभी मिलकर शरीर में विष (toxins) और ऊर्जा असंतुलन पैदा करते हैं।  क्यों लंबी बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती? जब कोई समस्या वर्षों से शरीर में जमी होती है, तो: शरीर की कोशिकाएँ उसी स्थिति में ढल जाती हैं नसों और अंगों की कार्यप्रणाली कमजोर हो जाती है शरीर की प्राकृतिक healing power धीमी हो जाती है इसलिए उपचार करते स...

लो ब्लड प्रेशर (Low BP) को सामान्य करने के अचूक आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे

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​ लो ब्लड प्रेशर (Low BP) को सामान्य करने के अचूक आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे ​आज के समय में हम अक्सर हाई ब्लड प्रेशर की चर्चा सुनते हैं, लेकिन लो ब्लड प्रेशर (Hypotension) भी स्वास्थ्य के लिए उतना ही खतरनाक हो सकता है। यदि आपका ब्लड प्रेशर 90/60 mmHg से कम रहता है, तो इसे नजरअंदाज न करें। यह लेख आपको लो बीपी के लक्षणों, कारणों और प्रभावी आयुर्वेदिक समाधानों के बारे में विस्तार से बताएगा। ​ लो ब्लड प्रेशर के मुख्य लक्षण: ​जब शरीर के अंगों तक रक्त का प्रवाह कम हो जाता है, तो शरीर ये संकेत देने लगता है: ​अचानक चक्कर आना या सिर घूमना। ​आंखों के सामने अंधेरा छाना या धुंधला दिखाई देना। ​अत्यधिक थकान और सुस्ती महसूस होना। ​जी मिचलाना या उल्टी जैसी अनुभूति। ​हाथ-पैर ठंडे पड़ना और त्वचा का पीला होना। ​एकाग्रता में कमी और सांस लेने में कठिनाई। ​ बीपी लो होने के कारण: ​ डॉक्टरी सलाह के अनुसार, लो बीपी के पीछे कई कारण हो सकते हैं: ​ पानी की कमी (Dehydration): शरीर में तरल पदार्थों की कमी से रक्त का आयतन घट जाता है। ​ एनीमिया: शरीर में खून की कमी होना। ​ हृदय संबंधी समस्याएं: दिल की...

पुरानी से पुरानी खांसी का रामबाण इलाज: 7 दिनों में जड़ से खत्म करने वाला आयुर्वेदिक घरेलू नुस्खा

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  पुरानी और जिद्दी खांसी के लिए आयुर्वेदिक अमृत: एक अचूक घरेलू नुस्खा बदलते मौसम और प्रदूषण के कारण आजकल खांसी की समस्या आम हो गई है। कई बार दवाइयां लेने के बाद भी खांसी पीछा नहीं छोड़ती। आयुर्वेद में रसोई में मौजूद मसालों को औषधि का दर्जा दिया गया है। आज हम एक ऐसे ही प्रभावी नुस्खे के बारे में जानेंगे जो सूखी और बलगम वाली, दोनों तरह की खांसी को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखता है।   आवश्यक सामग्री और उनका वैज्ञानिक महत्व : इस नुस्खे को तैयार करने के लिए आपको निम्नलिखित छह चीजों की आवश्यकता होगी -    1. कसा हुआ अदरक (4 चम्मच): अदरक में 'जिंजरॉल' नामक सक्रिय तत्व होता है जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं। यह गले की सूजन को कम करता है और संक्रमण से लड़ता है।   2. गुड़ (6 चम्मच): गुड़ फेफड़ों की सफाई करने के लिए जाना जाता है। यह एक 'एक्सपेक्टोरेंट' की तरह काम करता है, जो जमा हुए बलगम को बाहर निकालने में मदद करता है।   3. अजवाइन (1 चम्मच): इसमें 'थायमोल' होता है जो श्वसन मार्ग को साफ करता है और फेफड़ों की कार्यक्षमता बढ़ाता है।   4. का...

आपकी रसोई में छिपा है बीमारियों का जाल: क्या आप अनजाने में 'धीमा जहर' खा रहे हैं?

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  आपकी रसोई में छिपा है बीमारियों का जाल: क्या आप अनजाने में 'धीमा जहर' खा रहे हैं? आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हमने समय बचाने के चक्कर में अपनी सेहत को दांव पर लगा दिया है। डायबिटीज (शुगर) और दिल की बीमारियाँ अब केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रहीं, बल्कि युवाओं को भी तेजी से अपनी चपेट में ले रही हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसका सबसे बड़ा कारण हमारे किचन में मौजूद कुछ खास चीजें हैं।   1. सफेद मिठास या सफेद जहर? (ज्यादा शुगर) चीनी केवल कैलोरी बढ़ाती है, पोषण नहीं। अधिक मात्रा में शुगर का सेवन शरीर में इंसुलिन के संतुलन को बिगाड़ देता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। यह शरीर में सूजन पैदा कर दिल की धमनियों को भी नुकसान पहुँचाती है।   2. नमक और तीखे मसालों का घातक मेल स्वाद के चक्कर में हम अक्सर जरूरत से ज्यादा नमक और चटपटे मसालों का सेवन करते हैं। ज्यादा सोडियम ब्लड प्रेशर को बढ़ाता है, जो सीधे तौर पर हाइपरटेंशन और हार्ट अटैक का कारण बनता है।   3. रिफाइंड तेल: धमनियों का दुश्मन बाजार में मिलने वाले रिफाइंड तेल को बहुत अधिक तापमान पर प्रोसेस किया जाता ह...

खराब पाचन और कब्ज का आयुर्वेदिक इलाज | सोने से पहले अपनाएं ये आसान और असरदार घरेलू उपाय

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खराब पाचन और कब्ज दूर करें - इन उपायों को अपनाकर  आजकल खराब पाचन (डाइजेशन) और कब्ज की समस्या बहुत आम हो गई है। इसका मुख्य कारण हमारे शरीर के वात, पित्त और कफ (त्रिदोष) का असंतुलन होता है। आयुर्वेद के अनुसार जब ये तीनों दोष बिगड़ जाते हैं, तो पाचन अग्नि (जठराग्नि) मंद हो जाती है और शरीर में विषैले तत्व (आम) जमा होने लगते हैं, जिससे कब्ज, गैस, एसिडिटी जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। वात, पित्त और कफ से पाचन कैसे बिगड़ता है? - वात दोष बढ़ने पर आंतों में सूखापन आता है, जिससे मल कठोर हो जाता है और कब्ज होती है। - पित्त दोष बढ़ने पर एसिडिटी, जलन और अपच की समस्या होती है। - कफ दोष बढ़ने पर पाचन धीमा हो जाता है, भारीपन और सुस्ती महसूस होती है। इसलिए जरूरी है कि हम रात को सोने से पहले कुछ ऐसे आसान उपाय अपनाएं जो पाचन को सुधारें और कब्ज को जड़ से खत्म करें। --- सोने से पहले अपनाएं ये 7 असरदार उपाय इन उपायों को रोज एक साथ करने की जरूरत नहीं है, बल्कि इन्हें अदल-बदल कर प्रयोग करें। 1. गुनगुना पानी पिएं रात्रि में सोने से एक घंटे पहले एक ग्लास गुनगुना पानी जरूर पिएं। इससे आंतें साफ होती हैं और पा...