https://healthierwaysoflife.blogspot.com THE HEALTH JOURNAL written and designed by VIJAY K KASHYAP

चित्र
लंबे समय से चली आ रही बीमारियाँ क्यों जल्दी ठीक नहीं होतीं? जानिए गहराई से समाधान आज के समय में अधिकांश लोग ऐसी बीमारियों से जूझ रहे हैं जो अचानक नहीं आईं—बल्कि धीरे-धीरे वर्षों में विकसित हुई हैं। चाहे वह जोड़ों का दर्द हो, मधुमेह, पाचन समस्या या नसों की कमजोरी—इन सभी का एक लंबा इतिहास होता है। 👉 सच्चाई यह है: “जिस बीमारी को बनने में वर्षों लगे हैं, उसका समाधान भी धैर्य, निरंतरता और सही दिशा में समय मांगता है।”  बीमारी बनने की असली प्रक्रिया: बीमारी अचानक नहीं आती, बल्कि यह एक धीमी प्रक्रिया है: ❌ गलत खान-पान (अत्यधिक तला, मीठा, रसायनयुक्त भोजन) ❌ अनियमित दिनचर्या (देर रात तक जागना, नींद की कमी) ❌ मानसिक तनाव और चिंता ❌ शारीरिक गतिविधि की कमी ❌ प्रकृति से दूर जीवन - ये सभी मिलकर शरीर में विष (toxins) और ऊर्जा असंतुलन पैदा करते हैं।  क्यों लंबी बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती? जब कोई समस्या वर्षों से शरीर में जमी होती है, तो: शरीर की कोशिकाएँ उसी स्थिति में ढल जाती हैं नसों और अंगों की कार्यप्रणाली कमजोर हो जाती है शरीर की प्राकृतिक healing power धीमी हो जाती है इसलिए उपचार करते स...

भोजन में रेशेदार चीज़ों की आवश्यकता : इसकी कमी से होने वाले दुष्प्रभाव


भोजन में रेशेदार चीज़ों की आवश्यकता
: इसकी कमी से होने वाले दुष्प्रभाव 💢

आज की बदलती जीवनशैली में अधिकांश लोग बाहर का तला-भुना और परिष्कृत (refined) भोजन ज़्यादा खाते हैं। ऐसे भोजन में रेशे (Dietary Fiber) की मात्रा बहुत कम होती है, जिसके कारण शरीर कई प्रकार की बीमारियों का शिकार हो जाता है।

🈵रेशा (Fiber) क्या है?

रेशा भोजन का वह हिस्सा है जिसे हमारा पाचन तंत्र पूरी तरह पचा नहीं पाता, लेकिन यही अधपचा हिस्सा आंतों को स्वस्थ बनाए रखता है। रेशा मुख्यतः अनाज, दालें, फल, सब्ज़ियाँ और मेवों में पाया जाता है।
रेशा दो प्रकार का होता है –
  1. घुलनशील रेशा (Soluble Fiber): यह पानी में घुलकर जैल जैसा रूप ले लेता है और खून में शर्करा व कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है।
  2. अघुलनशील रेशा (Insoluble Fiber): यह मल को भारी बनाता है और कब्ज़ से बचाता है।


😀भोजन में रेशेदार चीज़ों की आवश्यकता

  1. पाचन को सुचारु बनाना – भोजन आसानी से हज़म होता है और कब्ज़ से राहत मिलती है।
  2. वज़न नियंत्रण – रेशा पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराता है, जिससे भूख कम लगती है।
  3. ब्लड शुगर का नियंत्रण – डायबिटीज़ वाले लोगों के लिए फाइबर बहुत फायदेमंद है।
  4. कोलेस्ट्रॉल कम करना – घुलनशील रेशा खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) को घटाता है।
  5. हृदय रोग से बचाव – नियमित रेशा सेवन से हृदय स्वस्थ रहता है।
  6. आंतों की सफाई – फाइबर शरीर से विषैले तत्व बाहर निकालने में मदद करता है।


रेशे की कमी से होने वाले दुष्प्रभाव

यदि भोजन में पर्याप्त रेशा न मिले तो कई समस्याएँ हो सकती हैं, जैसे –
  • लगातार कब्ज़ रहना
  • बवासीर (Piles) और फिशर
  • वज़न बढ़ना और मोटापा
  • ब्लड शुगर अनियंत्रित होना
  • कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ना
  • हृदय रोग और स्ट्रोक का ख़तरा
  • आंतों के कैंसर का बढ़ता जोखिम


रेशे के प्रमुख स्रोत :

  • साबुत अनाज – जौ, बाजरा, ओट्स, गेहूँ
  • दालें व बीन्स – राजमा, चना, मसूर
  • फल – अमरूद, सेब, नाशपाती, संतरा, केला
  • सब्ज़ियाँ – गाजर, पालक, लौकी, टमाटर, खीरा
  • मेवे – बादाम, अखरोट, मूँगफली
  • बीज – अलसी (Flax seeds), चिया सीड्स


निष्कर्ष :

हमारे रोज़ाना के भोजन में यदि पर्याप्त मात्रा में रेशेदार चीज़ें शामिल हों, तो न केवल पाचन शक्ति बेहतर होती है बल्कि कई गंभीर बीमारियों से भी बचाव होता है। वयस्क व्यक्ति को प्रतिदिन लगभग 25–35 ग्राम रेशा अवश्य लेना चाहिए।

👉 तो आज से ही अपने आहार में साबुत अनाज, हरी सब्ज़ियाँ और ताज़े फल शामिल करें और सेहतमंद जीवन का आनंद लें।


ब्लॉग : THE HEALTH JOURNAL

Website : https://healthierwaysoflife.blogspot.com 

देखने के लिए स्क्रोल करें :

इन सरल अभ्यासों और रसोई की खानपान से दिमाग को बनायें शार्प

शरीर खुद ही करता है सभी रोगों का इलाज | जानें प्रकृति के अद्भुत रहस्य और प्राकृतिक उपचार

उम्र बढ़ने के साथ शरीर से ज्यादा मन जिम्मेवार है यौन दुर्बलता हेतु : नित्य नाड़ी शोधन कर इच्छा को बलवान बनायें

नीम और हल्दी का सही उपयोग करके टाइप 2 डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करें – प्राकृतिक और असरदार उपाय

गर्मी के दिनों में चना सत्तू खाने के फायदे - एक संपूर्ण गाइड

अनुशासित मन-मस्तिष्क ही राज है स्वस्थ रहने का

टाईप 2 शुगर से बचाव (Type 2 Sugar prevention) का आसान और बेहतर उपाय

कान दर्द की समस्या: पाएं असरदार आयुर्वेदिक समाधान

गहरी नींद से खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं ये बीमारियाँ : फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे

गर्मी और सर्दी की संवेदनशीलता का स्वास्थ्य पर प्रभाव : जानिए बचाव के उपाय