https://www.thehealthjournal.co.in THE HEALTH JOURNAL written and designed by VIJAY K KASHYAP

पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

चित्र
पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

55-60 के बाद शरीर को विशेष पोषण की जरूरत: नजरअंदाज बिल्कुल न करें


55-60 के बाद शरीर को विशेष पोषण की जरूरत
: नजरअंदाज बिल्कुल न करें

जीवन का हर पड़ाव अपने साथ अलग-अलग ज़िम्मेदारियाँ और ज़रूरतें लेकर आता है। जैसे बचपन में विशेष पौष्टिक आहार की आवश्यकता होती है ताकि शरीर और मस्तिष्क का विकास सही ढंग से हो सके, ठीक उसी प्रकार जब हम 55-60 की आयु पार कर लेते हैं तो शरीर को दुगने ध्यान और देखभाल की जरूरत पड़ती है।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की स्थिति

55-60 की उम्र तक आते-आते शरीर के ऊतक (सेल्स) तेज़ी से नष्ट होने लगते हैं। कोशिकाओं की मरम्मत और पुनर्निर्माण की गति कम हो जाती है, मांसपेशियाँ कमजोर होने लगती हैं और हड्डियों की मज़बूती भी घटने लगती है। ऐसे में यदि भोजन पौष्टिक और संतुलित न हो तो कमजोरी और बीमारियाँ तुरंत घेर लेती हैं।

क्यों जरूरी है विशेष पोषण..? 

  • प्रोटीन: मांसपेशियों और कोशिकाओं की मरम्मत के लिए।
  • विटामिन्स और मिनरल्स: रोग प्रतिरोधक क्षमता, हड्डियों की मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए।
  • एंटीऑक्सीडेंट्स: सेल्स को क्षतिग्रस्त होने से बचाने के लिए।
  • फाइबर: पाचन को दुरुस्त रखने और कब्ज़ से बचाव के लिए।

इस उम्र में एक समय भोजन न मिलने पर तुरंत असर दिखने लगता है—कमजोरी, चक्कर आना या थकान का अनुभव होने लगता है।

भोजन को लेकर सही दृष्टिकोण :

यह याद रखना जरूरी है कि भोजन का असली मतलब घर का बना हुआ भोजन है
बाज़ार के खाने में केवल खुशबू और स्वाद होता है, लेकिन घटिया सामग्री और मिलावट के दौर में वह शरीर को पोषण देने की बजाय बीमारियों का कारण बन सकता है।
इसलिए कोशिश करें कि—
  • दिन में दोनों समय भरपेट पौष्टिक और घर का बना भोजन लें।
  • मौसम के अनुसार हरी सब्ज़ियाँ, फल, दालें, दूध-दही, अनाज और सूखे मेवे शामिल करें।
  • भोजन में विविधता बनाए रखें ताकि सभी आवश्यक पोषक तत्व मिलते रहें।

निष्कर्ष :

जीवन के इस पड़ाव में शरीर को उतना ही विशेष ध्यान और पोषण चाहिए, जितना बचपन में दिया जाता है। अगर इस उम्र में खानपान को नजरअंदाज किया गया तो शरीर तुरंत प्रतिक्रिया देगा और रोगों की चपेट में आना आसान हो जाएगा। इसलिए अपनी दिनचर्या और व्यवस्था को इस तरह बनाइए कि घर का बना, पौष्टिक और संतुलित भोजन नियमित रूप से मिलता रहे, ताकि जीवन रोगमुक्त और सुखमय बन सके।



आप प्रतिदिन एक विशेष टाॅपिक की गहन जानकारी लिजिए मेरे ब्लॉग से जुड़कर..!

                                       धन्यवाद..!! 

देखने के लिए स्क्रोल करें :

इन सरल अभ्यासों और रसोई की खानपान से दिमाग को बनायें शार्प

शरीर खुद ही करता है सभी रोगों का इलाज | जानें प्रकृति के अद्भुत रहस्य और प्राकृतिक उपचार

उम्र बढ़ने के साथ शरीर से ज्यादा मन जिम्मेवार है यौन दुर्बलता हेतु : नित्य नाड़ी शोधन कर इच्छा को बलवान बनायें

नीम और हल्दी का सही उपयोग करके टाइप 2 डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करें – प्राकृतिक और असरदार उपाय

गर्मी के दिनों में चना सत्तू खाने के फायदे - एक संपूर्ण गाइड

अनुशासित मन-मस्तिष्क ही राज है स्वस्थ रहने का

टाईप 2 शुगर से बचाव (Type 2 Sugar prevention) का आसान और बेहतर उपाय

कान दर्द की समस्या: पाएं असरदार आयुर्वेदिक समाधान

गर्मी और सर्दी की संवेदनशीलता का स्वास्थ्य पर प्रभाव : जानिए बचाव के उपाय

गहरी नींद से खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं ये बीमारियाँ : फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे