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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

क्या हम खुद को स्वस्थ नहीं रख सकते?

स्वास्थ्य ही धन है (Health is Wealth) : 



 स्वास्थ्य को धन कहा गया है, जो कहीं से गलत नहीं है।

हम सब कुछ से मालामाल हों और स्वास्थ्य ठीक नहीं तो दुनियां हमारे लिए नीरस लगती है। हम अपने को ठगा सा मानते हैं।

बात बिल्कुल सही भी है। अच्छे स्वास्थ्य को ही पुरुषार्थ कहते हैं। न तो हम अच्छे व्यंजनों का स्वाद ले सकते हैं, न दुनियां के किसी एक्टिविटी में अपना सक्रिय योगदान दे सकते हैं।


खुशहाल दाम्पत्य के लिए जरूरी : 

शरीर माद्यं खलु धर्म साधनम् : 

दाम्पत्य जीवन के लिए तो किसी प्रकार की खुशियाली का सपना की कल्पना भी नहीं कर सकते, अपना ही जीवन खुद के लिए एक बोझ बन जाता है।

और तो और जीवन की सार्थकता जिस धर्म के पथ पर चलने के कारण हो पाती है , उसका भी निर्वहन करने से वंचित रहते हैं। इसीलिए तो कहा गया है - 'शरीर माद्यं खलु धर्म साधनं'।

इसलिए चाहे जैसे भी बन पड़े अपने शरीर की रक्षा करते हुए ही और  जीवन पर्यन्त इसे सक्रिय और स्वस्थ रख कर हम वास्तविक जीवन का आनन्द ले पायेंगे। मृत्यु तो अवश्यंभावी है जब होनी होगी तो होगी, लेकिन उसके पूर्व शारीरिक कुशलता को बनाये रखें। 


निष्कर्ष : 


जीवन के हर पल का आनन्द स्वस्थ शरीर के साथ लें, क्योंकि स्वस्थ शरीर में एक स्वस्थ मन निवास करता है और मन ही हमें अपने गंतव्य तक पहुंचने में मदद करता। यह मोक्ष के दरवाजे तक पहुंचा कर लौट जाता है, जहाँ हम आध्यात्मिकता का अनुपम आनन्द लेने योग्य बन पाते हैं और हम जीवन के श्रेयस को पा लेते हैं।


लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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