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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

शुगर व बीपी के कारण खराब हुई किडनी की डायलिसिस कराने से ऐसे बचें


डायबिटीज (शुगर) और हाई ब्लड प्रेशर (बीपी) आज के समय में सबसे आम और खतरनाक बीमारियों में से हैं। इन दोनों स्थितियों का लंबे समय तक अनियंत्रित रहना किडनी को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है, जिससे किडनी फेलियर और डायलिसिस की आवश्यकता हो सकती है। हालांकि, उचित जीवनशैली, नियमित जांच और सही उपचार से इस स्थिति से बचा जा सकता है।



डायबिटीज और बीपी से किडनी को कैसे नुकसान होता है?


डायबिटीज का प्रभाव : 


डायबिटीज के कारण रक्त में शुगर का स्तर बढ़ जाता है, जिससे किडनी की रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। यह स्थिति डायबेटिक नेफ्रोपैथी कहलाती है, जो किडनी फेलियर का प्रमुख कारण बन सकती है। इसमें किडनी की फ़िल्टरिंग यूनिट्स (नेफ्रॉन्स) प्रभावित होती हैं, जिससे प्रोटीन यूरिन में लीक होने लगता है।


हाई ब्लड प्रेशर का प्रभाव


उच्च रक्तचाप किडनी की छोटी रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता प्रभावित होती है। यह किडनी की फ़िल्टरिंग क्षमता को कम कर सकता है और अंततः किडनी फेलियर का कारण बन सकता है।



किडनी खराब होने के लक्षण


पेशाब में झाग या प्रोटीन की उपस्थिति


पैरों, टखनों और आंखों के आसपास सूजन


थकान और कमजोरी


भूख कम लगना और मतली


रक्तचाप में वृद्धि



इन लक्षणों के प्रकट होने पर तुरंत नेफ्रोलॉजिस्ट से परामर्श लेना आवश्यक है।



डायलिसिस से बचाव के उपाय : 


1. ब्लड शुगर और बीपी को नियंत्रित रखें


ब्लड शुगर का स्तर HbA1c 7% से कम रखें।


रक्तचाप को 130/80 mmHg से नीचे बनाए रखें।



2. संतुलित आहार लें


नमक और प्रोटीन का सेवन सीमित करें।


फलों, सब्जियों और साबुत अनाज का सेवन बढ़ाएं।



3. नियमित व्यायाम करें


रोजाना कम से कम 30 मिनट की शारीरिक गतिविधि करें।


यह ब्लड शुगर और बीपी को नियंत्रित रखने में मदद करता है।



4. धूम्रपान और शराब से बचें


धूम्रपान और शराब किडनी की कार्यक्षमता को और खराब कर सकते हैं।



5. नियमित जांच कराएं


यूरिन में प्रोटीन की जांच (माइक्रोअल्बुमिन टेस्ट) कराएं।


ब्लड यूरिया और क्रिएटिनिन स्तर की जांच कराएं।



आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपाय : 


त्रिफला, गोखरू और वरुण जैसे आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियों का सेवन करें।


नीम, करेला और मेथी का सेवन ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है।


गिलोय और आंवला किडनी की कार्यक्षमता को बेहतर बनाने में सहायक हैं।



निष्कर्ष : 


डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर के कारण किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है, लेकिन उचित जीवनशैली, संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और समय-समय पर जांच से इस स्थिति से बचा जा सकता है। आयुर्वेदिक और प्राकृतिक उपायों को अपनाकर भी किडनी को स्वस्थ रखा जा सकता है। यदि समय रहते सावधानी बरती जाए, तो डायलिसिस की आवश्यकता को टाला जा सकता है।



नोट: यह लेख केवल जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

लेखक : विजय कुमार कश्यप

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