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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

प्राकृतिक चिकित्सा एक लाइफस्टाइल


परिचय : 

उपचार विधि : 



यों तो सभी प्रकार के रोग तीन दोषों -
वात, कफ और पीत के कारण होते हैं किन्तु इनके
उपचार की विधि सिर्फ दो ही हैं - ठंडी और गर्मी के
प्रभावों का संतुलन बना देना।

           मनुष्य का शरीर पंच तत्वों - मिट्टी, जल, वायु,
अग्नि और आकाश से मिल कर बना है। इन्हीं तत्वों 
से शरीर का पोषण होता है और भिन्न-भिन्न प्रकार के 
व्याधियों की चिकित्सा में भी ये प्रयुक्त की जाती हैं,
ताकि ठंडी और गर्मी का सामंजस्य बना रहे।

          प्रकृति ने हरेक इंसान को अनुपम और 
अद्वितीय बनाया है, अपने अन्दर छिपी शक्ति और
पुरुषार्थ के रहस्य को लोग समझ नहीं पाते और
इलाज के लिए इधर-उधर भटकते फिरते हैं। प्रकृति
ने मनुष्य को बना कर दिन और रात बनाया, आखिर
क्यों? शायद इसलिए कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार
दिन के उजाले में सक्रिय रहे, भाग-दौड़ में व्यस्त रहे
एवं रात्रि में निद्रा-विश्राम के पश्चात अगली सुबह वह
उसी ऊर्जा के साथ काम पर डट जाय। 


प्रकृति माता के नियम : 


             यह बात की गांठ बांध लें कि प्रकृति माता 
अपने नियमों के प्रति बड़ी सख्त है और किसी की
नहीं सुनती। जो उसके बनाए नियमों को आत्मसात 
कर अपना लाइफस्टाइल बना लेता है, मृत्यु पर्यन्त
स्वस्थ रहता है।

              किन्तु जो प्रकृति के नियमों के उलट 
चलना शुरू करता है वह देर-सवेर रोगों के चंगुल में 
फँस जाता है और तभी स्वस्थ हो पाता है जब पुनः
गांठ बांध कर प्रकृति के नियमों पर चलने लगे।


पंचभौतिक शरीर का स्वास्थ्य रहस्य : 


           पंचभौतिक शरीर के स्वास्थ्य का रहस्य 
इसके अलग-अलग तत्वों की महत्वता को बड़ी 
सरलता से समझ सकते हैं - - - - मिट्टी से अन्नादि 
खाद्य सामग्रियाँ प्राप्त हो जाती हैं, शुद्ध जल और 
शुद्ध वायु की जरूरत सबको पता है। चराचर 
जगत के सभी सजीवों में सूर्य अग्नि रूप में प्राण 
का संचार करता है। आकाश तत्व के रहस्य को 
समझने की थोड़ी जरूरत है। प्राकृतिक चिकित्सा 
में इसे AUTOPHAGY कहते हैं। आकाश शुन्यता 
का प्रतीक है और यह उपवास पर आधारित है। 


उपवास का महत्व : 


सहुलियत के अनुसार व्यस्क व्यक्ति को साप्ताहिक,. 
पाक्षिक अथवा मासिक कम से कम एक दिन का
उपवास से शरीर खुद ही उन विकारों को दूर करने 
में सक्षम है जो प्रायः जटिलता की श्रेणी में आते हैं।


लेखक : विजय कुमार कश्यप 




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