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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

पेट की गैस और एसिडिटी: तत्काल समाधान और स्थायी आयुर्वेदिक उपचार


पेट की गैस और एसिडिटी :
 


पेट की गैस और एसिडिटी आज के दौर की एक आम समस्या बन गई है, जिससे लगभग हर दूसरा व्यक्ति कभी न कभी परेशान होता है। यह समस्या न केवल असहजता पैदा करती है, बल्कि दैनिक जीवनचर्या को भी प्रभावित करती है। आयुर्वेद में इस समस्या का समाधान बहुत ही सरल, प्रभावी और स्थायी रूप से बताया या है।

तत्काल और सर्वसुलभ आयुर्वेदिक उपचार:


जब बात तत्काल राहत की हो, तो आयुर्वेद में कुछ ऐसे घरेलू नुस्खे हैं जो तुरंत असर दिखाते हैं और हर घर में आसानी से उपलब्ध होते हैं:


 * अजवाइन और काला नमक:

   * प्रयोग: एक चम्मच अजवाइन को हल्का भूनकर, इसमें चौथाई चम्मच काला नमक मिलाएं। इसे गुनगुने पानी के साथ तुरंत सेवन करें।

   * लाभ: अजवाइन पाचक अग्नि को तीव्र करती है और गैस को कम करती है, जबकि काला नमक पेट फूलने और एसिडिटी में आराम देता है। यह वात और पित्त दोनों को शांत करता है।

 * जीरा पानी:

   * प्रयोग: एक गिलास पानी में एक चम्मच जीरा डालकर उबालें। जब पानी आधा रह जाए तो उसे छानकर ठंडा कर लें और धीरे-धीरे पिएं।

   * लाभ: जीरा एक उत्कृष्ट पाचक और गैसनाशक है। यह पेट की जलन और एसिडिटी को भी शांत करता है।

 * सौंफ और मिश्री:

   * प्रयोग: भोजन के बाद एक चम्मच सौंफ को मिश्री के साथ चबाएं।

   * लाभ: सौंफ पाचन को सुधारती है और ठंडी तासीर होने के कारण एसिडिटी को कम करती है। यह मुंह को भी तरोताजा करती है।

 * अदरक की चाय:

   * प्रयोग: अदरक के छोटे टुकड़े को पानी में उबालकर चाय बनाएं। इसमें थोड़ा शहद या नींबू का रस मिला सकते हैं।

   * लाभ: अदरक पाचन को उत्तेजित करती है, गैस और ब्लोटिंग को कम करती है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं जो पेट की सूजन को कम करते हैं।


गैस और एसिडिटी से कैसे बचें: स्थायी आयुर्वेदिक उपाय


समस्या का मूल कारण समझना और उसे जड़ से खत्म करना ही स्थायी समाधान है। आयुर्वेद के अनुसार, गैस और एसिडिटी का मुख्य कारण अग्नि (पाचक अग्नि) का असंतुलन और गलत खान-पान तथा जीवनशैली है।

1. आहार संबंधी सावधानियां:


 * नियमित और संतुलित भोजन:

   * निश्चित समय पर भोजन करें। भोजन के बीच लंबा गैप न रखें।

   * अल्पाहार करें, एक बार में बहुत अधिक न खाएं।

   * आयुर्वेद में "अधो अन्नं" (पेट का आधा भाग भोजन से, एक चौथाई पानी से और एक चौथाई खाली) का सिद्धांत बहुत महत्वपूर्ण है।


 * सही खाद्य पदार्थों का चुनाव:

   * बचें: तला हुआ, मसालेदार, भारी, खट्टा, फर्मेंटेड (खमीर युक्त) और बासी भोजन। राजमा, छोले, उड़द दाल जैसे वात बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।

   * शामिल करें: हल्के, सुपाच्य, ताजे और गर्म भोजन। दलिया, खिचड़ी, उबली सब्जियां, लौकी, तोरी, टिंडा, परवल आदि।

   * दूध और डेयरी उत्पाद: कई लोगों को दूध और डेयरी उत्पादों से गैस बनती है। यदि ऐसा हो तो दही या छाछ का सेवन करें, जिसमें प्रोबायोटिक्स होते हैं।


 * पानी का सही सेवन:

   * भोजन के तुरंत बाद अधिक पानी न पिएं। भोजन से आधा घंटा पहले या बाद में पानी पिएं।

   * पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में गुनगुना पानी पिएं। यह पाचन में सहायता करता है।

 * सही तरीके से भोजन करें:

   * भोजन करते समय शांत वातावरण में रहें और अच्छी तरह चबाकर खाएं। जल्दबाजी में खाना न खाएं।

   * खाते समय बात न करें।


2. जीवनशैली में सुधार:


 * नियमित व्यायाम: योग और हल्के व्यायाम पाचन क्रिया को दुरुस्त रखते हैं और गैस व एसिडिटी को रोकते हैं। वज्रासन भोजन के बाद बहुत लाभकारी है।

 * तनाव प्रबंधन: तनाव पेट की समस्याओं का एक बड़ा कारण है। ध्यान, प्राणायाम और योग तनाव को कम करने में मदद करते हैं।

 * पर्याप्त नींद: 7-8 घंटे की गहरी नींद शरीर को ठीक होने और पाचन तंत्र को रीसेट करने का समय देती है।

 * रात का भोजन हल्का और समय पर: सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले रात का भोजन कर लें। रात में भारी भोजन से बचें।

 * शराब और धूम्रपान से बचें: ये चीजें पाचन तंत्र को खराब करती हैं और एसिडिटी बढ़ाती हैं।


3. आयुर्वेदिक औषधियां और जड़ी-बूटियां (विशेषज्ञ की सलाह पर):


 * त्रिफला: यह एक उत्कृष्ट रेचक और पाचक है, जो कब्ज और गैस दोनों में लाभकारी है।

 * अविपत्तिकर चूर्ण: यह एसिडिटी और अपच के लिए बहुत प्रसिद्ध आयुर्वेदिक औषधि है।

 * मुलेठी: मुलेठी में ऐसे गुण होते हैं जो पेट की अंदरूनी परत को शांत करते हैं और एसिडिटी से राहत देते हैं।

 * अमलाकी (आंवला): यह विटामिन सी से भरपूर होता है और पित्त दोष को शांत करता है, जिससे एसिडिटी कम होती है।


निष्कर्ष:


पेट की गैस और एसिडिटी से निजात पाना कोई रॉकेट साइंस नहीं है। आयुर्वेद के सरल सिद्धांतों का पालन करके, अपने खान-पान और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव लाकर आप इस समस्या से स्थायी रूप से छुटकारा पा सकते हैं। यह न केवल आपके पाचन तंत्र को सुधारेगा, बल्कि आपको एक स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने में भी मदद करेगा। याद रखें, हर शरीर अलग होता है, इसलिए यदि समस्या गंभीर हो तो किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।

लेखक : विजय कुमार कश्यप 


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