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लंबे समय से चली आ रही बीमारियाँ क्यों जल्दी ठीक नहीं होतीं? जानिए गहराई से समाधान आज के समय में अधिकांश लोग ऐसी बीमारियों से जूझ रहे हैं जो अचानक नहीं आईं—बल्कि धीरे-धीरे वर्षों में विकसित हुई हैं। चाहे वह जोड़ों का दर्द हो, मधुमेह, पाचन समस्या या नसों की कमजोरी—इन सभी का एक लंबा इतिहास होता है। 👉 सच्चाई यह है: “जिस बीमारी को बनने में वर्षों लगे हैं, उसका समाधान भी धैर्य, निरंतरता और सही दिशा में समय मांगता है।”  बीमारी बनने की असली प्रक्रिया: बीमारी अचानक नहीं आती, बल्कि यह एक धीमी प्रक्रिया है: ❌ गलत खान-पान (अत्यधिक तला, मीठा, रसायनयुक्त भोजन) ❌ अनियमित दिनचर्या (देर रात तक जागना, नींद की कमी) ❌ मानसिक तनाव और चिंता ❌ शारीरिक गतिविधि की कमी ❌ प्रकृति से दूर जीवन - ये सभी मिलकर शरीर में विष (toxins) और ऊर्जा असंतुलन पैदा करते हैं।  क्यों लंबी बीमारी जल्दी ठीक नहीं होती? जब कोई समस्या वर्षों से शरीर में जमी होती है, तो: शरीर की कोशिकाएँ उसी स्थिति में ढल जाती हैं नसों और अंगों की कार्यप्रणाली कमजोर हो जाती है शरीर की प्राकृतिक healing power धीमी हो जाती है इसलिए उपचार करते स...

मुँह के लार की निर्झर धार : वेलनेस की अविरल बहती गंगोत्री की विशिष्टता


मुँह के लार की निर्झर धार
: वेलनेस की अविरल बहती गंगोत्री की विशिष्टता

हमारा शरीर प्रकृति की अद्भुत कृति है। यह निरंतर अपने संतुलन और स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अनेक तरह की प्रक्रियाएँ करता रहता है। इन्हीं में से एक प्रक्रिया है — मुँह में लार (Saliva) का लगातार स्रावित होते रहना । सामान्यतः लोग इसे केवल भोजन पचाने में सहायक मानते हैं, परंतु वास्तविकता यह है कि यह एक अविरल बहती गंगोत्री है, जो हमें भीतर से वेलनेस प्रदान करती रहती है।


शरीर की अम्लीय प्रकृति और लार का क्षारीय संतुलन

मानव शरीर की आंतरिक प्रकृति सामान्यतः अम्लीय (Acidic) होती है। भोजन, तनाव, प्रदूषण और आधुनिक जीवनशैली की वजह से यह अम्लीयता और भी बढ़ जाती है। यदि यह अम्लीयता बिना संतुलित हुए बढ़े तो शरीर अनेक रोगों का घर बन सकता है।
यहीं पर लार (Saliva) अपनी विशेष भूमिका निभाता है। लार स्वभाव से क्षारीय (Alkaline) होता है। जब यह लगातार मुँह में बनता रहता है और पाचन तंत्र में जाता है, तो शरीर की अम्लीयता को संतुलित करता है। यही कारण है कि इसे "वेलनेस की गंगोत्री" कहा जा सकता है।


लार में कैल्शियम की भूमिका (बूझे चूने का रहस्य)

लार के अंदर कैल्शियम और फॉस्फेट जैसे खनिज (Minerals) अल्प मात्रा में पाए जाते हैं।
  • यह दाँतों की सतह (Enamel) को मजबूत बनाते हैं।
  • मुँह में बनने वाले बैक्टीरिया द्वारा पैदा अम्ल को निष्क्रिय करते हैं।
  • सूक्ष्म स्तर पर हड्डियों और दाँतों के रीमिनरलाइजेशन (Remineralization) की प्रक्रिया को सक्रिय रखते हैं।
आयुर्वेद और लोक परंपराओं में "बूझा चूना" (slaked lime) कैल्शियम का सहज स्रोत माना गया है। इसी न्यूनतम मात्रा में उपलब्ध कैल्शियम का सहयोग लार के माध्यम से शरीर को निरंतर वेलनेस की ओर अग्रसर करता है।


सूर्य की रोशनी और Vitamin D : कैल्शियम का अवशोषण

सिर्फ कैल्शियम लेना ही पर्याप्त नहीं है।
कैल्शियम को शरीर में अवशोषित (Absorb) और हड्डियों व दाँतों तक पहुँचाने के लिए Vitamin D आवश्यक है।
  • यह विटामिन हमें प्रमुख रूप से सूर्य की किरणों से मिलता है।
  • सूर्य के प्रकाश में उपस्थित UV-B किरणें हमारी त्वचा में Vitamin D को सक्रिय बनाती हैं।
  • सक्रिय Vitamin D आंत (Intestine) से कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है।
यही कारण है कि सुबह-सुबह की धूप में कुछ देर बैठना या टहलना न सिर्फ हड्डियों व दाँतों को मजबूती देता है बल्कि शरीर की अम्लीय-क्षारीय प्रकृति को भी संतुलित बनाए रखता है।


लार और वेलनेस का गहरा रिश्ता

  1. पाचन की तैयारी – लार में मौजूद एंज़ाइम (जैसे Amylase) भोजन को तोड़ने की प्रक्रिया प्रारंभ कर देते हैं।
  2. एंटी-बैक्टीरियल सुरक्षा – लार में मौजूद प्रोटीन और एंज़ाइम बैक्टीरिया को नष्ट कर मौखिक स्वास्थ्य बनाए रखते हैं।
  3. अम्ल-क्षार संतुलन – शरीर की अम्लीयता को निष्क्रिय कर वेलनेस सुनिश्चित करता है।
  4. कैल्शियम का पोषण – न्यूनतम मात्रा में उपस्थित कैल्शियम दाँतों और हड्डियों की मजबूती के लिए आधार प्रदान करता है।
  5. Vitamin D की सहक्रिया – सूर्य की रोशनी से सक्रिय हुआ Vitamin D इस कैल्शियम को अवशोषित कर शरीर को मजबूती और संतुलन प्रदान करता है।


निष्कर्ष :

मुँह की लार केवल भोजन पचाने का साधन नहीं है, बल्कि यह एक निरंतर बहती जीवनधारा है।

यह क्षारीय प्रवाह शरीर की अम्लीयता को संतुलित करता है, कैल्शियम और खनिजों के माध्यम से दाँतों-हड्डियों की सुरक्षा करता है और Vitamin D की सहक्रिया में हमें संपूर्ण वेलनेस प्रदान करता है।

अतः, अगली बार जब आप सूर्य की रोशनी में सुबह की सैर पर जाएँ और मुँह में लार की ताजगी महसूस करें, तो समझ लीजिए — यही है आपके स्वास्थ्य और वेलनेस की वास्तविक गंगोत्री।


लेखक : विजय कुमार कश्यप

ब्लॉग : THE HEALTH JOURNAL

वेबसाइट : https://healthierwaysoflife.blogspot.com 

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