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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

चेहरे पर अनचाहे तील और मस्से को हटाने के लिए सरल घरेलू उपाय



चेहरे पर अनचाहे तील और मस्से : हटाने के लिए सरल घरेलू उपाय 

1. तिल (Moles) होने के कारण:

​तिल त्वचा पर तब बनते हैं जब त्वचा की रंगत बनाने वाली कोशिकाएं, जिन्हें मेलेनोसाइट्स (Melanocytes) कहा जाता है, पूरे त्वचा में फैलने के बजाय एक जगह जमा होकर गुच्छा बना लेती हैं।

  • आनुवंशिकता (Genetics): अगर आपके परिवार में माता-पिता को अधिक तिल हैं, तो इसकी काफी संभावना है कि आपको भी बचपन या किशोरावस्था में तिल विकसित होंगे।
  • धूप का प्रभाव (Sun Exposure): सूर्य की पराबैंगनी (UV) किरणें मेलेनोसाइट्स को सक्रिय करती हैं, जिससे तिलों की संख्या बढ़ सकती है या उनका रंग गहरा हो सकता है।
  • हार्मोनल बदलाव: किशोरावस्था, गर्भावस्था या मेनोपॉज के दौरान शरीर में होने वाले हार्मोनल उतार-चढ़ाव के कारण नए तिल निकल सकते हैं।

2. मस्से (Warts) होने के कारण:

​मस्से तिल से बिल्कुल अलग होते हैं। यह त्वचा की कोशिकाओं के जमाव के बजाय एक संक्रमण का परिणाम होते हैं।

  • HPV वायरस: मस्से मुख्य रूप से Human Papillomavirus (HPV) के कारण होते हैं। यह वायरस त्वचा की ऊपरी परत में प्रवेश कर केराटिन (एक प्रकार का प्रोटीन) का तेजी से उत्पादन शुरू कर देता है, जिससे त्वचा कठोर होकर उभर आती है।
  • कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (Weak Immunity): जिन लोगों की इम्यूनिटी कमजोर होती है, उनका शरीर इस वायरस से लड़ नहीं पाता, जिससे मस्से आसानी से पनप जाते हैं।
  • छुआछूत या संपर्क: मस्से संक्रामक होते हैं। यदि आप किसी ऐसे व्यक्ति के संपर्क में आते हैं जिसे मस्से हैं, या उनके तौलिये/रेजर का उपयोग करते हैं, तो यह आपको भी हो सकते हैं।

3. स्किन टैग्स : (Skin Tags)

​अक्सर लोग त्वचा के छोटे लटकते हुए मांस को भी मस्सा समझ लेते हैं, जिन्हें स्किन टैग्स कहा जाता है। इनके होने के कारण थोड़े भिन्न हैं:

  • घर्षण (Friction): त्वचा का त्वचा से रगड़ खाना (जैसे गर्दन या पलकों के पास)।
  • मेटाबॉलिक कारण: बढ़ती उम्र, अधिक वजन या इंसुलिन रेजिस्टेंस (मधुमेह के संकेत) की वजह से भी ये अधिक निकलते हैं।

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🌑 एपल साइडर विनेगर (ACV) से चेहरे के तिल हटाने की विधि:

  • ​चेहरे के अनचाहे तिलों से प्राकृतिक रूप से छुटकारा पाने के लिए एपल साइडर विनेगर एक प्रभावी विकल्प माना जाता है। इस प्रक्रिया को सुरक्षित तरीके से करने के लिए नीचे दिए गए चरणों का पालन करें:


  • आवश्यक सामग्री और तैयारी:

  • इस मिश्रण को तैयार करने के लिए एक छोटी कटोरी में बराबर मात्रा में एपल साइडर विनेगर और पानी मिलाएं (जैसे 1 चम्मच विनेगर और 1 चम्मच पानी)। ध्यान रहे कि चेहरे की संवेदनशील त्वचा के लिए विनेगर को सीधे उपयोग करने के बजाय पानी के साथ पतला करना आवश्यक है।

  • प्रयोग की विधि:

  • सबसे पहले एक माचिस की तीली लें। तीली के उस हिस्से का चुनाव करें जहाँ मसाला (फास्फोरस) न लगा हो। तीली के पिछले सिरे पर थोड़ी सी रुई (Cotton) को सावधानीपूर्वक और मजबूती से लपेट लें।अब इस रुई वाले हिस्से को विनेगर और पानी के मिश्रण में डुबोएं।इस भीगी हुई रुई को ठीक तिल के ऊपर रखें। तीली को धीरे से हटा लें ताकि रुई का फाहा तिल पर टिका रहे।इसके बाद उस रुई को एक साफ सूखी रुई के छोटे टुकड़े से ढक दें और डॉक्टरी टेप (Micropore tape) की मदद से इसे स्थिर कर दें।​इसे लगभग एक घंटे तक लगा रहने दें और फिर हटा लें। 

  • इस प्रक्रिया को नियमित रूप से कुछ दिनों तक दोहराने से तिल धीरे-धीरे सूखने लगता है और अंततः गायब हो जाता है। ध्यान रखें कि यदि इस दौरान त्वचा पर अधिक जलन या लालिमा महसूस हो, तो तुरंत पानी से धो लें और प्रयोग बंद कर दें। उपचार के दौरान चेहरे को धूप से बचाना भी बेहतर परिणाम देता है।

  • नोट : यदि एपल साइडर विनेगर (सेब का सिरका) उपलब्ध नहीं हो तो इसके स्थान पर लहसुन का रस भी प्रयोग कर सकते हैं। 

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  • 🦥खाने वाले चूना और बेकिंग सोडा से मस्से हटाने का सुरक्षित तरीका:

    ​मस्सों से छुटकारा पाने के लिए चूना और बेकिंग सोडा का मिश्रण एक प्रभावी पारंपरिक उपाय माना जाता है। इसे तैयार करने के लिए खाने वाले चूने और बेकिंग सोडा को बराबर मात्रा में लेकर अच्छी तरह मिला लें। 

  • लगाने का सही तरीका यह है कि एक साफ तीली (जैसे टूथपिक) की मदद से इस पेस्ट को बेहद सावधानी के साथ सिर्फ मस्से के ऊपर ही लगाएं; ध्यान रहे कि यह आस-पास की स्वस्थ त्वचा पर न लगे।

  •  इसे लगाने के बाद सूखने के लिए छोड़ दें और लगभग एक घंटे बाद साफ पानी से धो लें। इस प्रक्रिया को तब तक नियमित रूप से दोहराएं जब तक मस्सा पूरी तरह सूखकर गिर न जाए। कुछ ही दिनों के निरंतर प्रयोग से मस्सा जड़ से साफ हो जाता है।

सावधानी और सुझाव:

  • बदलाव पर नजर रखें: यदि किसी तिल का आकार अचानक बढ़ रहा हो, उसका रंग बदल रहा हो या उसमें खुजली/खून आए, तो उसे नजरअंदाज न करें और किसी अनुभवी होम्योपैथिक चिकित्सक से मिलें। 

लेखक : विजय कुमार कश्यप

ब्लॉग :  द हेल्थ जनरल 

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