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भृंगराज के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ: एक संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि

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भृंगराज के अद्भुत स्वास्थ्य लाभ: एक संपूर्ण आयुर्वेदिक औषधि ​ भृंगराज को आयुर्वेद में एक बहुत ही गुणकारी और चमत्कारी जड़ी-बूटी माना गया है। इसे आयुर्वेद में बालों के लिए हितकारी यानी 'केश्य' और शरीर को ऊर्जा देने वाला 'रसायन' कहा गया है। यह सिर्फ आपके बालों और त्वचा के लिए ही नहीं, बल्कि शरीर की कई अंदरूनी समस्याओं को ठीक करने में भी बहुत मददगार है। आइए इस लेख में भृंगराज के गुणों और इसके फायदों के बारे में आसान भाषा में जानते हैं। ​भृंगराज क्या है और आयुर्वेद में इसका परिचय? ​भृंगराज एक आम आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी है जो भारत में अक्सर नमी वाली जगहों या पानी के आसपास आसानी से मिल जाती है। इसका वैज्ञानिक नाम 'एक्लिप्टा अल्बा' है। आयुर्वेद के अनुसार इसके गुण इस प्रकार हैं: ​ यह शरीर में हल्कापन लाने वाली और थोड़ी रूखी होती है। ​इसका स्वाद तीखा और कड़वा होता है। ​इसकी तासीर गर्म होती है। ​यह मुख्य रूप से शरीर में वात और कफ दोष को शांत करने का काम करती है। ​भृंगराज के प्रमुख औषधीय लाभ ​ 1. बालों और सिर की सेहत के लिए वरदान ​भृंगराज का नाम आते ही सबसे पहले बालों ...

डिजिटल बुढ़ापा: क्या आपका स्मार्टफोन आपकी जवानी छीन रहा है?

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डिजिटल बुढ़ापा: क्या आपका स्मार्टफोन आपकी जवानी छीन रहा है? ​क्या आपने कभी गौर किया है कि बिस्तर पर जाने के बाद, जब आप अंधेरे कमरे में अपना फोन खोलते हैं, तो वह नीली रोशनी न केवल आपके कमरे को रोशन करती है, बल्कि आपकी सेहत को भीतर से खोखला भी कर रही होती है? ​आज हम डिजिटल युग में जी रहे हैं, लेकिन क्या हम वाकई स्मार्ट हो रहे हैं? या फिर हम अनजाने में अपनी ही उंगलियों से 'डिजिटल बुढ़ापे' (Digital Aging) की पटकथा लिख रहे हैं? ​ 1. 'टेक्स्ट नेक सिंड्रोम': एक आधुनिक महामारी ​ हम अक्सर मोबाइल को अपनी दुनिया समझते हैं, लेकिन सच यह है कि मोबाइल हमारी रीढ़ की हड्डी के लिए एक अदृश्य बोझ है। जब आप सिर झुकाकर रील (Reel) स्क्रॉल करते हैं, तो आपकी गर्दन पर पड़ने वाला दबाव किसी छोटे बच्चे को कंधे पर बैठाने के बराबर होता है। ​ पोश्चर का खेल: सिर का सामान्य वजन 5-6 किलो होता है, लेकिन 30-40 डिग्री के कोण पर झुकते ही यह दबाव 30-40 किलो तक पहुंच जाता है। ​ नतीजा: गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न और डिस्क का धीरे-धीरे बाहर निकलना। यह समस्या अब सिर्फ बुजुर्गों की नहीं, बल्क...