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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली (Gall Bladder) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulgar...

मानसिक स्वास्थ्य को कैसे ठीक रखें?- एक संपूर्ण गाइड


मानसिक स्वास्थ्य को कैसे ठीक रखें?
- एक संपूर्ण गाइड

आजकल हम अपने शरीर को तंदुरुस्त रखने के लिए जिम जाते हैं, अच्छा खाना खाते हैं, लेकिन अपने दिमाग यानी मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) पर ध्यान देना भूल जाते हैं। सच तो यह है कि अगर हमारा दिमाग स्वस्थ रहेगा, तभी हमारा शरीर भी सही से काम करेगा। जीवन को खुशहाल बनाने के लिए हमें अपने अंदर की कुछ बुरी आदतों को तुरंत छोड़ना होगा। आइए जानते हैं ऐसी ही 13 आदतों के बारे में जिन्हें छोड़कर हम मानसिक रूप से मजबूत बन सकते हैं।

​दिमाग को बीमार करने वाली 13 आदतें - इन्हें आज ही छोड़ें

​1. बहाने बनाना (एक्सक्यूज)

​खुद को धोखे में रखना:

​जब हम कसरत न करने या किसी जरूरी काम को टालने के लिए खराब मौसम या थकान का बहाना बनाते हैं, तो हमारा दिमाग उसे सच मान लेता है। इससे धीरे-धीरे हमारी इच्छाशक्ति कमजोर हो जाती है और तनाव बढ़ने लगता है।

​2. इधर-उधर की बातें करना (गॉसिप)

​समय और ऊर्जा की बर्बादी:

​दूसरों की कमियां निकालने या पीठ पीछे उनकी बातें करने से हमारे दिमाग में सिर्फ नकारात्मकता (कचरा) भरती है। इससे हमारे अंदर जलन और नफरत की भावना पैदा होती है, जो हमारी मानसिक शांति को खत्म कर देती है।

​3. खुद पर शक करना (सेल्फ डाउट)

​भरोसे की कमी:

​कोई भी नया काम शुरू करने से पहले यह सोचना कि "मैं यह नहीं कर पाऊंगा", हमारे आत्मविश्वास को पूरी तरह खत्म कर देता है। खुद पर भरोसा रखें और छोटे-छोटे कदम बढ़ाएं।

4. बुरी लत या आदतें (टॉक्सिक हैबिट्स)

​शरीर और मन दोनों का नुकसान:

चाहे वो शराब-सिगरेट की लत हो या हर समय दूसरों में बुराई खोजना। ये आदतें हमें धीरे-धीरे मानसिक रूप से बीमार कर देती हैं। याद रखें, हमारे शरीर की बहुत सी बीमारियों की जड़ हमारा अशांत दिमाग ही होता है।

5. फेल होने का डर (फियर ऑफ फेलियर)

​आगे बढ़ने से रुक जाना:

​हारने का डर हमें नया कदम उठाने ही नहीं देता। दुनिया में ऐसा कोई इंसान नहीं है जो कभी असफल न हुआ हो। असफलता को हार मत मानिए, बल्कि इसे एक सीख (लर्निंग) समझिए। हम या तो जीतते हैं या सीखते हैं।

​6. काम को कल पर टालना (प्रोक्रैस्टिनेशन)

​आखिरी समय का भारी दबाव:

​आज का काम कल पर टालमटोल करने से काम कम नहीं होता, बल्कि दिमाग पर बोझ बढ़ जाता है। यहाँ तक कि सुबह अलार्म बजने पर उसे स्नूज़ करना भी दिमाग को टालने की गलत आदत सिखाता है। जो काम करना है, उसे तुरंत निपटाने की आदत डालें।

​7. खुद से नकारात्मक बातें करना (नेगेटिव सेल्फ टॉक)

​खुद का दुश्मन बनना:

​हम दिनभर अपने आप से जो बातें करते हैं, हमारा मूड वैसा ही हो जाता है। अगर आप हर समय खुद को कोसते रहेंगे या कमियां निकालेंगे, तो आपका दिमाग उदास रहने लगेगा। खुद से हमेशा प्यार से और हौसला बढ़ाने वाली बातें करें।

​8. दुख देने वाले रिश्ते (टॉक्सिक रिलेशनशिप)

​आत्मसम्मान को ठेस पहुंचना:

​अगर कोई रिश्ता (चाहे वह दोस्ती हो या रिश्तेदारी) आपको हर समय नीचा दिखाता है या आपके आत्मसम्मान को चोट पहुँचाता है, तो पहले उसे सुधारने की कोशिश करें। यदि सामने वाला न बदले, तो अपनी मानसिक शांति के लिए उससे दूरी बना लेना ही समझदारी है।

9. सबको खुश रखने की कोशिश करना

​एक नामुमकिन काम:

​आप अपनी जान भी दे देंगे, तब भी दुनिया में हर कोई आपसे खुश नहीं हो सकता। दूसरों को खुश करने के चक्कर में खुद को बदलना बंद करें। जब आप खुद खुश रहेंगे, तो आपके आसपास के लोग भी खुश रहेंगे। अकेले खुद को खुश रखना ही काफी है।

​10. अपने आरामदायक दायरे में बंधे रहना (कंफर्ट ज़ोन)

​आगे बढ़ने का रास्ता बंद होना:

​एक ही जगह या पुरानी आदतों में सिमटे रहना प्रगति को रोक देता है। सिर्फ इसलिए कोई नया या बेहतर काम न करना क्योंकि उसमें थोड़ी मेहनत लगेगी, हमारे दिमाग को सुस्त बना देता है। अपने दायरे से बाहर निकलें और नई चीजें सीखें।

​11. लोग क्या सोचेंगे, इसकी चिंता करना

​दूसरों के विचारों का गुलाम बनना:

​कोई आपके बारे में क्या सोचता है, इस पर आपका कोई बस नहीं है। लोग अपनी मर्जी से सोचने के लिए आजाद हैं। दूसरों के मन की बात समझने की कोशिश (Mind reading) में अपना समय बर्बाद न करें, बल्कि अपने काम पर ध्यान दें।

​12. हर समय कमियां निकालना (क्रिटिसिज्म)

​चिड़चिड़ेपन का कारण:

​लगातार खुद में या दूसरों में कमियां ढूंढने से हमारा स्वभाव चिड़चिड़ा हो जाता है। सकारात्मक चीजों को देखना शुरू करें ताकि मन शांत और खुश रहे।

​13. मन में 'ना' होने पर भी 'हाँ' कह देना

​अपनी भावनाओं को दबाना:

​जहाँ आपको मना करना चाहिए, वहाँ संकोच या दबाव में आकर 'हाँ' कह देना अंदर ही अंदर घुटने जैसा है। अपनी भावनाओं को जबरदस्ती न दबाएं। जहाँ जरूरी हो, वहाँ सम्मान के साथ 'ना' (No) कहना सीखें।

लिंक:

               हेल्थ मंत्र

निष्कर्ष:

इस पूरे विषय को अगर हम बहुत सीधे और आसान शब्दों में समझें, तो हमारा मानसिक स्वास्थ्य किसी बाहरी वजह से खराब नहीं होता, बल्कि हमारी अपनी छोटी-छोटी आदतों और सोच से बिगड़ता है। हमारा दिमाग एक खाली खेत की तरह है; हम इसमें जैसे विचार बोएंगे, वैसा ही हमारा जीवन बनेगा।
​बहाने बनाना बंद करना, खुद पर पूरा भरोसा रखना और सबको खुश करने की बेकार कोशिश से बाहर निकलना ही मानसिक शांति का असली रास्ता है। जब आपका मन शांत और खुश रहेगा, तभी आप जीवन का असली आनंद ले पाएंगे। इसलिए आज ही से इन 13 बुरी आदतों को धीरे-धीरे छोड़ें और मुस्कुराते रहें।

लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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