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30 की उम्र के बाद कमजोरी? शरीर में नई ताकत भर देंगे ये 10 हाई-प्रोटीन फूड्स

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​ 30 की उम्र के बाद कमजोरी? शरीर में नई ताकत भर देंगे ये 10 हाई-प्रोटीन फूड्स ​ बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में कई अंदरूनी बदलाव होने लगते हैं। अक्सर 30 साल की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से कमजोर होने लगती हैं। सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना या छोटे-छोटे कामों में जल्दी थक जाना इसके आम लक्षण हैं। मेडिकल भाषा में इसे 'सारकोपीनिया' कहा जाता है, जिससे बचने का सबसे बेहतरीन उपाय सही प्रोटीन का सेवन है। शरीर को मजबूत बनाने वाले 10 बेहतरीन हाई-प्रोटीन फूड्स ​1. काला चना ​ प्रोटीन : 100 ग्राम काले चने में लगभग 22 ग्राम प्रोटीन होता है (जो करीब 3 अंडों के बराबर है)। ​ फायदे : इसमें मौजूद आयरन खून बनाता है, फाइबर पाचन सुधारता है और मैग्नीशियम मांसपेशियों को ताकत देता है। ​ खाने का तरीका: रातभर भिगोए हुए चने में सुबह नींबू का रस, काला नमक और प्याज मिलाकर खाली पेट चबाकर खाएं। कमजोर पाचन वाले इसे उबालकर या अंकुरित करके भी खा सकते हैं। ​ 2. मूंग दाल ​ प्रोटीन : 100 ग्राम मूंग दाल में 24 ग्राम प्रोटीन होता है। ​ फायदे : यह बहुत आसानी से पच जाती है, इसलिए कमजोर पा...

मानसिक तनाव और एंग्जायटी को कहें अलविदा: सेरोटोनिन बढ़ाने वाला यह जादुई नुस्खा है बेहद असरदार


मानसिक तनाव और एंग्जायटी को कहें अलविदा:
सेरोटोनिन बढ़ाने वाला यह जादुई नुस्खा है बेहद असरदार

आज के इस भागदौड़ भरे जीवन में मानसिक तनाव और एंग्जायटी बहुत आम बात हो गई है। छोटी-छोटी रोजमर्रा की उलझनें भी कई बार इंसान को भीतर से चिड़चिड़ा और उदास बना देती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि कुछ लोग तमाम मुश्किलों के बाद भी हमेशा खुश और भीतर से संतुष्ट क्यों नजर आते हैं? इसका सीधा संबंध हमारे मस्तिष्क में बनने वाले एक विशेष केमिकल 'सेरोटोनिन' से है। आइए आज के इस लेख में बहुत ही सरल भाषा में समझते हैं कि कैसे घर पर मौजूद कुछ आसान चीजों के जरिए हम अपने दिमाग में इस खुशी के हार्मोन को प्राकृतिक रूप से बढ़ा सकते हैं।

​सेरोटोनिन क्या है और यह हमारे मूड को कैसे नियंत्रित करता है?

​हमारे दिमाग के भीतर एक छोटी सी केमिकल फैक्ट्री की तरह सेरोटोनिन का निर्माण होता है, जो असल में एक न्यूरोट्रांसमीटर है। यह न केवल हमारे मूड को रेगुलेट करता है, बल्कि हमारी मानसिक सेहत को भी संतुलन देता है।

  • ​डोपामिन और सेरोटोनिन में अंतर: डोपामिन हमें वक्ती तौर पर यानी थोड़े समय के लिए खुशी देता है, जबकि सेरोटोनिन लंबे समय तक टिकने वाली मानसिक शांति और सच्ची खुशी का अहसास कराता है।

  • ​जब हमारे दिमाग में सेरोटोनिन का स्तर एकदम सही और संतुलित रहता है, तब हम भीतर से सकारात्मक और संतुष्ट महसूस करते हैं। इसके कम होने पर बिना किसी ठोस वजह के भी उदासी और डिप्रेशन घेरने लगता है।

​सेरोटोनिन बढ़ाने वाला जादुई नुस्खा: गर्म दूध, केसर और शहद का मेल

​इस समस्या से निपटने के लिए किसी लंबी-चौड़ी या महंगी जड़ी-बूटी की कोई आवश्यकता नहीं है। आयुर्वेद और पुरानी चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार, रसोई में मिलने वाली तीन बेहद सरल चीजों का यह मेल एक जादुई ड्रिंक तैयार करता है:

  1. ​गर्म दूध, 
  2. असली केसर, 
  3. शुद्ध शहद। 

​इस नुस्खे में शामिल तीनों चीजों के खास फायदे

  • गर्म दूध: दूध में कुछ ऐसे खास अमीनो एसिड्स और प्रोटींस होते हैं जो सेरोटोनिन के उत्पादन को तेजी से बढ़ावा देते हैं। यह न सिर्फ गहरी और अच्छी नींद लाने में मददगार है, बल्कि हमारे तंत्रिका तंत्र को शांत कर घबराहट को दूर करता है।

  • केसर: प्राचीन यूनानी और आयुर्वेदिक ग्रंथों में केसर को मूड को तरोताजा करने वाली औषधि यानी 'मुफर कल्ब' कहा गया है। आधुनिक वैज्ञानिक शोधों में भी यह बात साबित हो चुकी है कि केसर एंग्जायटी और तनाव के लक्षणों को कम करने में अचूक असर दिखाता है।

  • शहद: प्राकृतिक शर्करा से भरपूर शहद शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है और हमारे मन तथा मूड को प्रफुल्लित करने का कार्य करता है।

​इस जादुई ड्रिंक को बनाने की सही विधि और पीने का समय

​इस बेहतरीन ड्रिंक को तैयार करना बेहद आसान है और इसमें बमुश्किल 5 मिनट का समय लगता है:

  • ​बनाने की विधि: सबसे पहले एक गिलास दूध को हल्का गर्म करें, ध्यान रहे कि दूध में तेज उबाल नहीं आना चाहिए। जब दूध गुनगुना हो जाए, तब इसमें शुद्ध केसर के लगभग 5 से 6 रेशे (कोशिश करें कि अच्छी गुणवत्ता वाला कश्मीरी केसर हो) मिला दें। अंत में इसमें एक चम्मच खालिस शहद अच्छी तरह घोल लें।

  • ​सेवन का सही समय: इस ड्रिंक को पीने का सबसे उत्तम समय रात को सोते समय होता है, हालांकि जरूरत पड़ने पर इसे सुबह के वक्त भी लिया जा सकता है।

सावधानियां:

किन लोगों को इस नुस्खे से परहेज करना चाहिए? 

​हर घरेलू उपाय की तरह इस नुस्खे को अपनाते समय भी कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है:

  • ​यदि आपको लैक्टोज इनटोलरेंस की समस्या है यानी दूध सूट नहीं करता, तो इसका सेवन न करें।

  • ​केसर और शहद दोनों की तासीर गर्म होती है, इसलिए जिन लोगों को गर्म तासीर की चीजें नुकसान करती हैं, वे सावधानी बरतें।

  • ​डायबिटीज के मरीज इसमें शहद की मौजूदगी के कारण अपने डॉक्टर की सलाह के बिना इसे न लें।

  • ​अत्यधिक गर्मी के मौसम की बजाय इस नुस्खे को सर्दी के दिनों में इस्तेमाल करना ज्यादा लाभकारी माना गया है।

निष्कर्ष:

​मानसिक शांति और आंतरिक खुशी पाना हमारी अपनी जीवनशैली और खान-पान पर निर्भर करता है। दूध, केसर और शहद का यह सरल सा आयुर्वेदिक नुस्खा न केवल हमारे दिमाग में सेरोटोनिन के स्तर को कुदरती तरीके से बढ़ाता है, बल्कि रोजमर्रा के तनाव और घबराहट से भी राहत दिलाता है। यदि आप भी मानसिक थकान या एंग्जायटी महसूस करते हैं, तो इस असरदार और मौलिक नुस्खे को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्वास्थ्य लाभ ले सकते हैं।

✍️ लेखक: विजय कुमार कश्यप 

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