https://www.thehealthjournal.co.in THE HEALTH JOURNAL written and designed by VIJAY K KASHYAP

जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

चित्र
​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

पंच तत्वों की साधना: एक कदम संतुलित जीवन की ओर


पंच तत्वों की साधना: एक संतुलित जीवन की ओर : 


मनुष्य का शरीर पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश — इन पंच तत्वों से निर्मित है। इन तत्वों की समुचित आपूर्ति और इनमें सामंजस्य को जानकर इन्हें जीवन में सम्मिलित करने के प्रयासों को ही पंच तत्वों की साधना कहा जाता है। यहाँ हम इनकी पृथक-पृथक महत्ता की विवेचना करेंगे जिन्हें अपने जीवन में उतारकर बुढ़ापा और बिमारी की रुग्णता को भगाने में खुद को सक्षम कर पाएंगे।


🌱 1 पृथ्वी तत्व 

पृथ्वी तत्व जीवन के मूलाधार से जुड़ा स्थूल तत्व है, जिसमें मिट्टी के प्रयोग की प्रधानता है।

  • नंगे पैर टहलना: प्रातःकाल लाभदायक गैसों के अधिक उत्सर्जन के कारण आधे घंटे नंगे पैर टहलना अत्यंत लाभकारी होता है।

  • मृत्तिका लेपन: शरीर के दर्द वाले स्थानों पर मिट्टी का लेप लगाने से तुरंत आराम मिलता है।

  • मिट्टी से मालिश: सप्ताह में एक बार गीली पीली मिट्टी से मसाज कर 10-15 मिनट छोड़कर स्नान करने से त्वचा में प्राकृतिक आभा आती है।

टिप: खुले जख्म पर मिट्टी का प्रयोग न करें।


💧 2. जल तत्व

जल तत्व की महत्ता भोजन के पश्चात प्यास की अनुभूति से स्पष्ट होती है। शरीर का लगभग 60% हिस्सा जल ही है।

  • शुद्ध जल सेवन: घूंट-घूंट कर जल पीने से लार में उपस्थित पाचक एंजाइम्स शरीर में मिलते हैं, जो पाचन में सहायक होते हैं।

  • खनिज लवण: सलाद (गाजर, मूली, खीरा, टमाटर, प्याज आदि) के रसों में खनिज लवण भरपूर होते हैं।

  • टॉक्सिन्स की निकासी: पृथ्वी और जल तत्व शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकालते हैं।


🔥 3. अग्नि तत्व

अग्नि तत्व ही शरीर में प्राण का संचालन करता है। इसका बाह्य स्रोत सूर्य है और आंतरिक रूप में यह जठराग्नि के रूप में विद्यमान है।

  • तेज भूख: यह जीवनी शक्ति का प्रतीक है।

  • सूर्यस्नान: सूर्योदय से पहले और बाद में सूर्य के समक्ष रहना अत्यंत लाभकारी होता है।

  • नमक मुक्त भोजन: रविवार को कृतज्ञता स्वरूप एक बार नमक रहित भोजन लेने की परंपरा रक्त विकारों और चर्म रोगों में लाभदायक होती है।

टिप: गर्मी में रात को स्नान करने से शरीर की उष्मा संतुलित रहती है।


🌬️ 4. वायु तत्व


वायु तत्व प्राणवायु (ऑक्सीजन) का प्रतीक है और इसके बिना जीवन असंभव है।

  • सुबह का समय: सुबह 5:30 से 6:30 के बीच ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है।

  • प्राणायाम: अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, बटरफ्लाई, कुम्भक आदि प्राणायाम मानसिक और शारीरिक आरोग्यता देते हैं।

  • पैदल चलना: सुबह आधे घंटे की सैर से शरीर में ताजगी बनी रहती है।


🌌 5. आकाश तत्व


आकाश तत्व पंच तत्वों में सबसे सूक्ष्म होता है और यह मानसिक शक्ति और आत्मिक उन्नति का आधार है।

  • सद्गुरु का महत्व: जीवन में एक समर्थ सद्गुरु का होना आत्मिक साधना के लिए अनिवार्य है।

  • गुरु का प्रकाश: सद्गुरु की साधना से आकाश तत्व की अनुभूति होती है जिसे आत्मानंद भी कहा जाता है।

  • मानवीय मूल्य: सेवा, प्रेम, करुणा, त्याग जैसे गुणों का जागरण इसी तत्व से संभव है।


हमारे ऐसे ही समर्थ सद्गुरु रामाश्रम सत्संग, मथुरा में डैम्पियर नगर में हैं। इस सत्संग की स्थापना पूज्य डॉ. श्री चतुर्भुज सहाय जी ने सन् 1930 में की थी। लाखों लोग इससे आत्मिक लाभ प्राप्त कर चुके हैं।


🔚 निष्कर्ष:

प्रकृति के नियमानुसार जन्म-मरण अटल है, किन्तु मृत्यु की घड़ी को भी आनंददायक बनाना संभव है — जब हम एक समर्थ गुरु के सान्निध्य में जीवन व्यतीत करते हैं। वह आनन्द का स्रोत हैं, जहाँ प्रेम और करुणा की तरंगें निरंतर प्रवाहित होती रहती हैं। यही पंच तत्वों की साधना का सार है — तन, मन और आत्मा की पूर्ण शुद्धि।

✍️ विजय कुमार कश्यप

देखने के लिए स्क्रोल करें :

क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रसोई ही दुनिया की सबसे बड़ी और सुरक्षित डिस्पेंसरी है?

इन सरल अभ्यासों और रसोई की खानपान से दिमाग को बनायें शार्प

शरीर खुद ही करता है सभी रोगों का इलाज | जानें प्रकृति के अद्भुत रहस्य और प्राकृतिक उपचार

उम्र बढ़ने के साथ शरीर से ज्यादा मन जिम्मेवार है यौन दुर्बलता हेतु : नित्य नाड़ी शोधन कर इच्छा को बलवान बनायें

नीम और हल्दी का सही उपयोग करके टाइप 2 डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करें – प्राकृतिक और असरदार उपाय

गर्मी के दिनों में चना सत्तू खाने के फायदे - एक संपूर्ण गाइड

अनुशासित मन-मस्तिष्क ही राज है स्वस्थ रहने का

टाईप 2 शुगर से बचाव (Type 2 Sugar prevention) का आसान और बेहतर उपाय

कान दर्द की समस्या: पाएं असरदार आयुर्वेदिक समाधान

गहरी नींद से खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं ये बीमारियाँ : फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे