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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

खिसकी हुई नाभी (धरन) को 100% ठीक करें : आयुर्वेद, सरल व्यायाम और न्युरोथिरोपी से



परिचय : 

नाभी (धरन) केवल शरीर का बाहरी केन्द्र नहीं, बल्कि आंतरिक संतुलन का प्रमुख आधार भी है। हमारे पाचन, ऊर्जा प्रवाह और मानसिक स्थिति — सभी पर इसका सीधा प्रभाव पड़ता है। जब यह अपने स्थान से खिसक जाती है, तो शरीर अनेक समस्याओं से जूझने लगता है, जैसे — गैस, एसिडिटी, कब्ज, चक्कर, ऐंठन, यहां तक कि डिप्रेशन तक।


आश्चर्य की बात है कि आधुनिक चिकित्सा पद्धति (एलोपैथी) में इसका कोई विशेष निदान नहीं है। लेकिन आयुर्वेद, व्यायाम और न्युरोथिरोपी — तीन ऐसे अद्भुत उपाय हैं, जिनसे नाभी को बिना किसी दवा या ऑपरेशन के 100% ठीक किया जा सकता है।



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1. आयुर्वेदिक तरीका — नींबू और सुहागे से नाभी को स्थान पर लाएं


सामग्री : 




1 नींबू




2-3 चुटकी सुहागा (पनसारी से आसानी से उपलब्ध)






विधि




एक नींबू लें और उसे गैस या कोयले की आंच में 3-4 मिनट तक सेंकें, जब तक वह काला न हो जाए, पर फटे नहीं।




ठंडा होने दें।




अब एक लोहे के तवे पर सुहागा रखें और गरम करें जब तक उसका सारा जल वाष्पित न हो जाए।




ठंडा करके उसे पीस लें और बारीक चूर्ण बना लें।




अब नींबू का रस निचोड़कर उसमें 2-3 चुटकी सुहागा मिलाएं।




इस मिश्रण को धीरे-धीरे जीभ से चाटें — पूरे 10-15 मिनट तक।




यही प्रक्रिया 3 दिनों तक करें।


परिणाम: नाभी धीरे-धीरे स्वतः यथास्थान आ जाती है।





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2. सरल व्यायाम — केवल 6-12 सैकेंड में अद्भुत लाभ



इन 3 व्यायामों को प्रतिदिन केवल 5 मिनट देने से नाभी की स्थिति सामान्य हो जाती है:


व्यायाम 1:


पेट के बल लेट जाएं।


बायां पैर और दाहिना हाथ जितना हो सके उठाएं — 6 सैकेंड तक।


फिर दायां पैर और बायां हाथ — 6 सैकेंड।



व्यायाम 2:



पीठ के बल लेटें।


बायां पैर और दाहिना हाथ एक साथ उठाएं — 6 सैकेंड तक।
फिर दायां पैर और बायां हाथ — 6 सैकेंड।

व्यायाम 3 (नौकासन):
पीठ के बल लेटें।
दोनों हाथ, पैर और सिर को एक साथ ऊपर उठाकर नौका का आकार बनाएं — 12 सैकेंड तक।

नियम: सभी व्यायाम लगातार 3 दिन करें। पहले दिन से ही राहत मिलने लगती है।

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3. न्युरोथिरोपी विधि — हथेली से शरीर के केन्द्र तक उपचार


चरण 1:


एक हथेली के मध्य में दूसरे हाथ के अंगूठे से 6 सैकेंड दबाव दें, फिर 1 सैकेंड छोड़ें। ऐसा 3 बार।


अब हाथ बदलकर यही दोहराएं।



चरण 2:


हथेली के बीच में अंगूठे व तर्जनी/मध्यमा से एक साथ ऊपर-नीचे दबाएं — 6 सैकेंड दबाना, 1 सैकेंड छोड़ना।


दोनों हाथों में यही क्रिया 3 बार करें।



चरण 3:


एक हाथ की बांह को पकड़कर तर्जनी से 12 सैकेंड दबाएं, फिर 1 सैकेंड छोड़ें।


दूसरे हाथ में भी दोहराएं।



चरण 4:


शांत बैठकर 20 से 1 तक उल्टी गिनती करें — ध्यान केंद्रित करने हेतु।


अब हथेलियों को आपस में रगड़ें और चेहरे पर फेरें — ऊर्जा संचार हेतु।




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निष्कर्ष:

नाभी खिसकने की समस्या जितनी आम है, उसका समाधान उतना ही अनदेखा रह गया है। ऊपर बताए गए आयुर्वेदिक उपाय, व्यायाम और न्युरोथिरोपी तकनीक मिलकर न केवल इस समस्या को जड़ से मिटा सकते हैं, बल्कि शरीर के ऊर्जा-चक्र को भी संतुलित करते हैं।


स्वस्थ नाभि = स्वस्थ पाचन + संतुलित मन + ऊर्जावान शरीर।

अब जरूरत है बस इन उपायों को अपनाने की।

लेखक : विजय कुमार कश्यप

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