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क्या आप जानते हैं कि आपके घर की रसोई ही दुनिया की सबसे बड़ी और सुरक्षित डिस्पेंसरी है?

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क्या आप जानते हैं? : आपके घर की रसोई ही दुनिया की सबसे बड़ी और सुरक्षित डिस्पेंसरी है? ​ अक्सर छोटी-मोटी स्वास्थ्य समस्याओं के लिए हम तुरंत डॉक्टर के पास भागते हैं या महंगी दवाइयों का सहारा लेते हैं। लेकिन प्रकृति ने हमारे आस-पास, खासकर हमारी रसोई में, ऐसी अद्भुत औषधियां दी हैं जो कई समस्याओं का चुटकियों में समाधान कर सकती हैं। ​एक क्लिक, 278 समाधान ​ अब आपको स्वास्थ्य संबंधी उलझनों के लिए घंटों इंटरनेट पर भटकने की जरूरत नहीं है। 'द हेल्थ जर्नल' (The Health Journal) पर हमने आपके लिए स्वास्थ्य से जुड़ी 278 विभिन्न समस्याओं का एक व्यापक डेटाबेस तैयार किया है। ​चाहे वह मौसमी सर्दी-जुकाम हो, पाचन संबंधी दिक्कतें, या तनाव भरी जीवनशैली से जुड़ी परेशानियां—आपकी हर समस्या का समाधान अब सिर्फ एक क्लिक की दूरी पर है। ​ क्यों चुनें 'द हेल्थ जर्नल'? ​ सुलभ जानकारी: जटिल चिकित्सा शब्दावली के बजाय सरल और घरेलू भाषा में समाधान। ​ वैज्ञानिक दृष्टिकोण: आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान का बेहतरीन संगम। ​ वन-स्टॉप प्लेटफॉर्म: 278 स्वास्थ्य विषयों पर विस्तृत जानकारी एक ही वेबसाइट पर उ...

बहरापन: मुख्य कारण, प्रभावी घरेलू उपचार एवं खान-पान


बहरापन: मुख्य कारण, प्रभावी घरेलू उपचार एवं खान-पान 

सुनने की क्षमता का कम होना या पूरी तरह से खत्म हो जाना, जिसे मेडिकल भाषा में 'डेफनेस' (Deafness) या बहरापन कहा जाता है, आज के समय में एक आम समस्या बनती जा रही है। यह समस्या उम्र के साथ-साथ कई अन्य कारणों से भी उत्पन्न हो सकती है।

​बहरेपन के प्रमुख कारण

  • उम्र का प्रभाव: बढ़ती उम्र के साथ इंद्रियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे सुनने की क्षमता भी प्रभावित होती है।
  • कान के पर्दे में समस्या: कान के पर्दे में छेद होना, संक्रमण या चोट लगना बहरेपन का एक बड़ा कारण है।
  • तेज आवाज: बहुत अधिक शोर वाली मशीनों या तेज आवाज में लगातार काम करने से कान के पर्दों और मस्तिष्क की नसों पर बुरा असर पड़ता है।
  • दवाइयों का दुष्प्रभाव: एंटीबायोटिक्स, स्टेरॉयड या अन्य भारी दवाओं का अत्यधिक और लंबे समय तक सेवन करना।
  • अन्य बीमारियाँ: तेज बुखार (जो मस्तिष्क पर असर करे), कान में गंदगी (wax) का जमा होना, या वात-पित्त-कफ का असंतुलन।
  • अनुवांशिकता: हालांकि दुर्लभ है, लेकिन कुछ मामलों में यह जन्मजात या अनुवांशिक भी हो सकता है।

​बहरेपन के पीछे कई शारीरिक और बाहरी कारक जिम्मेदार होते हैं। 

​बचाव के महत्वपूर्ण उपाय

​कानों को सुरक्षित रखने के लिए कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए:

  • तेज शोर से बचें: यदि आप शोर-शराबे वाली जगह पर काम करते हैं, तो 'ईयर मफ' (Ear muffs) या 'ईयर प्लग' का उपयोग अनिवार्य रूप से करें।
  • कानों की सफाई: समय-समय पर कानों की सफाई करना आवश्यक है ताकि गंदगी जमा न हो।
  • बीपी पर नियंत्रण: तेज शोर केवल कान को ही नहीं, बल्कि बीपी को भी बढ़ा सकता है, जिससे नसों के फटने का खतरा रहता है।

​बहरेपन के लिए प्रभावी घरेलू और आयुर्वेदिक उपचार

​प्राकृतिक उपचारों का सही तरीके से उपयोग करके सुनने की क्षमता में सुधार लाया जा सकता है:

1. अदरक, प्याज और लहसुन का प्रयोग

​यह मिश्रण कान की नस को मजबूती देने में सहायक माना जाता है।

  • विधि: 2 इंच अदरक, 2 प्याज और 2 लहसुन की कलियां लें। इन्हें कूटकर कपड़े से छान लें और इनका रस निकालें।
  • सेवन: इस रस को शहद के साथ मिलाकर सुबह खाली पेट और रात को खाने से आधा घंटा पहले लें।
  • उपयोग: इसी रस की 2-3 बूंदें रुई की सहायता से कान में डालें।

​2. विशेष आयुर्वेदिक तेल

​कानों की कमजोरी दूर करने के लिए आप घर पर ही एक विशेष तेल तैयार कर सकते हैं:

  • सामग्री: 20 ग्राम अश्वगंधा, 20 ग्राम दालचीनी, 20 ग्राम बावची के बीज और 240 मिली तिल का तेल।
  • तैयारी: इन औषधियों को दरदरा पीस लें। अब तिल के तेल को एक बर्तन में डालें और इसे पानी से भरे बड़े बर्तन के अंदर रखकर धीमी आंच पर उबालें (इसे डबल बॉइलर विधि कहते हैं)।
  • प्रयोग: तेल ठंडा होने पर इसे छानकर रख लें। रात को सोते समय 2-3 बूंदें कान में डालें। यह तेल नसों को पोषण देने में मददगार होता है।

स्वस्थ श्रवण शक्ति के लिए 4 सुपरफूड्स

​बेहतर सुनने की क्षमता और कानों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए अपने दैनिक आहार में इन चार पोषक तत्वों से भरपूर खाद्य पदार्थों को शामिल करें:

  • हरी पत्तेदार सब्जियां: पालक जैसी सब्जियां विटामिन B12 और फोलेट से भरपूर होती हैं, जो शोर और उम्र के कारण होने वाली सुनने की समस्याओं से बचाव में मदद करती हैं।
  • मछली और अंडे: ये ओमेगा-3 फैटी एसिड और विटामिन B12 के प्रमुख स्रोत हैं, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों के कारण कानों के लिए फायदेमंद होते हैं।
  • फल और शकरकंद: केला, संतरा और शकरकंद पोटैशियम का अच्छा स्रोत हैं, जो कानों के अंदरूनी तरल पदार्थ (inner ear fluid) के संतुलन को नियंत्रित रखते हैं।
  • बीज और नट्स: कद्दू के बीज, अलसी, काजू और बादाम जैसे नट्स में मैग्नीशियम और जिंक प्रचुर मात्रा में होता है, जो श्रवण क्षमता को सुरक्षित रखने में मददगार 'सुपरफूड्स' माने जाते हैं।

​इन सरल आहार संबंधी आदतों को अपनाकर आप अपनी सुनने की क्षमता को लंबे समय तक स्वस्थ और सुरक्षित रख सकते हैं।

निष्कर्ष:

​बहरेपन की समस्या व्यक्ति को तनाव और डिप्रेशन की ओर ले जा सकती है, इसलिए समय रहते इसकी पहचान और सावधानी बरतना बहुत महत्वपूर्ण है। जहाँ जन्मजात बहरेपन का उपचार कठिन होता है, वहीं उम्र या अन्य संक्रमणों के कारण होने वाली सुनने की समस्या को सही खान-पान और ऊपर बताए गए प्राकृतिक उपचारों से काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। याद रखें, उपचार के साथ धैर्य रखना आवश्यक है, क्योंकि आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय असर दिखाने में थोड़ा समय लेते हैं।

✍️ लेखक: विजय कुमार कश्यप 

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