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शुगर कंट्रोल करने का बेहद आसान तरीका: 7 दिन में देखें फर्क

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शुगर कंट्रोल करने का बेहद आसान तरीका: 7 दिन में देखें फर्क   ​क्या आप भी उन लोगों में से हैं जो रोजाना सुबह जल्दी उठकर वॉक करते हैं, मीठा खाना बिल्कुल बंद कर चुके हैं, चावल और आलू से परहेज करते हैं और समय पर दवाइयां भी लेते हैं, फिर भी आपकी ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं आ रही है? यदि हाँ, तो यह ब्लॉग आपके लिए ही है। ​आइए, इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए शर्मा जी के एक वास्तविक उदाहरण से शुरुआत करते हैं। ​ शर्मा जी की कहानी: सब कुछ करने के बाद भी शुगर अनियंत्रित क्यों? ​ पिछले महीने शर्मा जी डॉक्टर के पास अपनी 6 महीने की शुगर रिपोर्ट्स का पूरा बंडल लेकर आए। वे बेहद अनुशासनप्रिय व्यक्ति हैं—रोजाना सुबह 5:00 बजे उठकर 40 मिनट वॉक करते थे, मीठा, चावल और आलू पूरी तरह से छोड़ चुके थे, और बिना किसी छुट्टी के अपनी दवाइयां नियमित रूप से ले रहे थे। इसके बावजूद उनकी फास्टिंग शुगर 190 से नीचे नहीं आ रही थी। थक हारकर उन्होंने पूछा, "डॉक्टर साहब, मैं सब कुछ कर रहा हूँ, फिर भी मेरी शुगर कंट्रोल में क्यों नहीं आ रही है?" ​ यदि आपकी कहानी भी शर्मा जी जैसी ही है, तो आइए जानते वे तीन मुख्य कारण...

प्राकृतिक चिकित्सा एक लाइफस्टाइल


परिचय : 

उपचार विधि : 



यों तो सभी प्रकार के रोग तीन दोषों -
वात, कफ और पीत के कारण होते हैं किन्तु इनके
उपचार की विधि सिर्फ दो ही हैं - ठंडी और गर्मी के
प्रभावों का संतुलन बना देना।

           मनुष्य का शरीर पंच तत्वों - मिट्टी, जल, वायु,
अग्नि और आकाश से मिल कर बना है। इन्हीं तत्वों 
से शरीर का पोषण होता है और भिन्न-भिन्न प्रकार के 
व्याधियों की चिकित्सा में भी ये प्रयुक्त की जाती हैं,
ताकि ठंडी और गर्मी का सामंजस्य बना रहे।

          प्रकृति ने हरेक इंसान को अनुपम और 
अद्वितीय बनाया है, अपने अन्दर छिपी शक्ति और
पुरुषार्थ के रहस्य को लोग समझ नहीं पाते और
इलाज के लिए इधर-उधर भटकते फिरते हैं। प्रकृति
ने मनुष्य को बना कर दिन और रात बनाया, आखिर
क्यों? शायद इसलिए कि अपनी सामर्थ्य के अनुसार
दिन के उजाले में सक्रिय रहे, भाग-दौड़ में व्यस्त रहे
एवं रात्रि में निद्रा-विश्राम के पश्चात अगली सुबह वह
उसी ऊर्जा के साथ काम पर डट जाय। 


प्रकृति माता के नियम : 


             यह बात की गांठ बांध लें कि प्रकृति माता 
अपने नियमों के प्रति बड़ी सख्त है और किसी की
नहीं सुनती। जो उसके बनाए नियमों को आत्मसात 
कर अपना लाइफस्टाइल बना लेता है, मृत्यु पर्यन्त
स्वस्थ रहता है।

              किन्तु जो प्रकृति के नियमों के उलट 
चलना शुरू करता है वह देर-सवेर रोगों के चंगुल में 
फँस जाता है और तभी स्वस्थ हो पाता है जब पुनः
गांठ बांध कर प्रकृति के नियमों पर चलने लगे।


पंचभौतिक शरीर का स्वास्थ्य रहस्य : 


           पंचभौतिक शरीर के स्वास्थ्य का रहस्य 
इसके अलग-अलग तत्वों की महत्वता को बड़ी 
सरलता से समझ सकते हैं - - - - मिट्टी से अन्नादि 
खाद्य सामग्रियाँ प्राप्त हो जाती हैं, शुद्ध जल और 
शुद्ध वायु की जरूरत सबको पता है। चराचर 
जगत के सभी सजीवों में सूर्य अग्नि रूप में प्राण 
का संचार करता है। आकाश तत्व के रहस्य को 
समझने की थोड़ी जरूरत है। प्राकृतिक चिकित्सा 
में इसे AUTOPHAGY कहते हैं। आकाश शुन्यता 
का प्रतीक है और यह उपवास पर आधारित है। 


उपवास का महत्व : 


सहुलियत के अनुसार व्यस्क व्यक्ति को साप्ताहिक,. 
पाक्षिक अथवा मासिक कम से कम एक दिन का
उपवास से शरीर खुद ही उन विकारों को दूर करने 
में सक्षम है जो प्रायः जटिलता की श्रेणी में आते हैं।


लेखक : विजय कुमार कश्यप 




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