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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

एड़ी का दर्द : आसान आयुर्वेदिक उपाय और घरेलू नुस्खे


एड़ी के दर्द को ठीक से समझें, घबरायें नहीं : 

अक्सर 40-50 साल की उम्र के आसपास, ख़ासकर पुरुषों में, एड़ी की हड्डी में थोड़ा फैलाव आ जाता है। इससे एड़ी के निचले हिस्से में हल्का, मीठा दर्द रह सकता है जो 6 महीने से डेढ़ साल तक चल सकता है। 


         इसे अक्सर प्लांटर फेशियाइटिस या 
हील स्पर भी कहते हैं। दर्द कम करने के दो 
आज़माए हुए तरीके: 


 1. सही जूते पहनें: आरामदायक और सही नाप के चमड़े के जूते पहनने से एड़ी पर उचित दबाव पड़ता है, जिससे दर्द धीरे-धीरे कम होता है। 


 2.  गर्म सिकाई: बालू या नमक को गर्म करके सूती कपड़े की पोटली बनाएं। इससे रोज़ सुबह-शाम 10-15 मिनट तक एड़ी पर सिकाई करें। यह ब्लड सर्कुलेशन बढ़ाता है और सूजन घटाता है। 



आयुर्वेदिक समाधान : 



एड़ी के दर्द से पाएं छुटकाराआयुर्वेद एड़ी के 
दर्द को वात दोष के बढ़ने से जोड़ता है। इसका 
इलाज वात को शांत करने और सूजन घटाने 
पर केंद्रित है। 


1. असरदार आयुर्वेदिक दवाएं : 


 * महारास्नादि क्वाथ: वात रोगों और जोड़ों के दर्द के लिए बेहतरीन। सूजन और जकड़न कम करता है।
 * सिंहनाद गुग्गुलु: दर्द और सूजन के लिए प्रभावी। शरीर से टॉक्सिन निकालने में मदद करता है।
 * योगराज गुग्गुलु: जोड़ों और मांसपेशियों के दर्द में सहायक।
 * अश्वगंधा चूर्ण: नसों और मांसपेशियों को मज़बूत करता है, दर्द सहने की क्षमता बढ़ाता है।
ज़रूरी बात: कोई भी आयुर्वेदिक दवा लेने से पहले हमेशा किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक से सलाह ज़रूर लें। 


2. बाहरी उपचार और घरेलू नुस्खे : 


 * तेल मालिश: हल्के गर्म तिल के तेल या महानारायण तेल से एड़ी और पिंडलियों की रोज़ाना मालिश करें। यह वात को शांत करता है।
 * सेंधा नमक का पानी: गर्म पानी में सेंधा नमक मिलाकर पैरों को 15-20 मिनट डुबोएं। यह मांसपेशियों को आराम देगा और सूजन घटाएगा।
 * लहसुन-सरसों तेल लेप: सरसों के तेल में लहसुन गर्म करके ठंडा होने पर एड़ी पर मालिश करें। 


3. जीवनशैली और व्यायाम

 * सही जूते: हमेशा कुशनिंग वाले और आरामदायक जूते पहनें। ऊंची एड़ी वाले या बिलकुल सपाट जूतों से बचें।
 * नियमित स्ट्रेचिंग: पिंडली और पैर के तलवे की मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग करें। ये स्ट्रेचिंग सुबह बिस्तर से उठने से पहले ज़रूर करें।
 * आराम: जब दर्द हो तो एड़ी को पर्याप्त आराम दें।
 * वज़न कंट्रोल: वज़न ज़्यादा होने पर कम करें, क्योंकि इससे एड़ी पर दबाव बढ़ता है। 


4. आयुर्वेदिक आहार : 


 * गर्म और ताज़ा खाना: हल्का, आसानी से पचने वाला भोजन खाएं।
 * वात शामक मसाले: अदरक, लहसुन, हल्दी, मेथी, अजवाइन का सेवन बढ़ाएं।
 * घी और तेल: भोजन में शुद्ध घी और तिल के तेल का प्रयोग करें।
 * ठंडी चीज़ों से बचें: दही, ठंडा पानी और ज़्यादा कच्चे सलाद से परहेज़ करें। 




निष्कर्ष : 


एड़ी के दर्द को हल्के में न लें। आयुर्वेदिक उपाय, घरेलू नुस्खे और कुछ जीवनशैली बदलावों को अपनाकर आप इस दर्द से छुटकारा पा सकते हैं और फिर से आराम से चल-फिर सकते हैं। अगर दर्द ज़्यादा या लगातार है, तो किसी विशेषज्ञ डॉक्टर से सलाह लेना न भूलें। 


लेखक : विजय कुमार कश्यप 


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