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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

अल्सर क्या होता है : जानिये इसके प्रकार, शुरूआती लक्षण और कारगर उपचार


अल्सर क्या होता है
: जानिये इसके प्रकार, शुरूआती लक्षण और कारगर उपचार

🔹 अल्सर क्या है?

अल्सर (Ulcer) एक प्रकार का घाव या जख़्म है, जो शरीर की अंदरूनी या बाहरी सतह (mucosa/skin) पर बनता है। यह घाव धीरे-धीरे बनता है और दर्द, जलन या असुविधा पैदा करता है। सरल भाषा में कहें तो जहाँ शरीर की परत क्षतिग्रस्त होकर एक गहरा घाव बन जाता है, वहीं अल्सर कहलाता है।


🔹 अल्सर कहाँ-कहाँ हो सकता है?

अल्सर शरीर के अलग-अलग हिस्सों में हो सकता है, जैसे –
  • मुख का अल्सर (Mouth ulcer) – जीभ, होंठ, गाल या तालु पर।
  • गैस्ट्रिक / पेप्टिक अल्सर – पेट की अंदरूनी दीवार या आंतों में।
  • ड्यूडेनल अल्सर – छोटी आंत की शुरुआत में।
  • इसोफेजियल अल्सर – भोजन नली में।
  • त्वचा का अल्सर (Skin ulcer) – पैरों, टांगों या अन्य हिस्सों पर, विशेषकर circulation कम होने पर।


🔹 अल्सर के प्रकार

  1. माउथ अल्सर (Aphthous ulcer) – छोटे, दर्दनाक छाले, खाने-पीने में तकलीफ।
  2. पेप्टिक अल्सर – पेट/आंत में, ज़्यादा एसिडिटी और H. pylori बैक्टीरिया के कारण।
  3. वेनस/आर्टेरियल अल्सर – खून के प्रवाह में रुकावट के कारण पैरों में।
  4. प्रेशर अल्सर (Bed sore) – लंबे समय तक लेटे रहने वाले मरीजों में।
  5. इन्फेक्शियस अल्सर – कुछ बैक्टीरिया, फंगस या वायरस के कारण।


🔹 अल्सर के शुरूआती लक्षण

  • मुख का अल्सर → छोटा गोल/अंडाकार सफेद या पीला spot, लाल किनारे के साथ, खाने-पीने में जलन।
  • पेट का अल्सर → पेट में जलन, भूख न लगना, खट्टे डकार, खाली पेट या रात में दर्द।
  • त्वचा का अल्सर → सूजन, लालिमा, घाव से पानी या मवाद निकलना।
  • गंभीर लक्षण → लगातार जलन, खून आना, वजन घटना, कमजोरी।


🔹अल्सर के दर्द कैसा लगता है?

  • चुभन/जलन – जैसे सुई चुभी हो या आग की चिनगारी रखी हो।
  • भोजन पर बढ़ना – मसालेदार/खट्टा खाने पर दर्द बढ़ता है।
  • खाली पेट या रात में दर्द – खासकर पेट के अल्सर में।
  • लगातार दुखदायी – लंबे समय तक आराम न मिले तो यह बहुत कष्टदायी हो जाता है।


🔹 तुरंत आराम के उपाय

घरेलू / देशी नुस्खे

  • नमक-पानी का गरारा – माउथ अल्सर में दिन में 2–3 बार।
  • शहद + हल्दी – छाले पर लगाने से एंटीसेप्टिक असर।
  • मुलेठी का पानी – पेट के अल्सर में soothing effect देता है।
  • नारियल पानी / ठंडी छाछ – पेट और मुँह के छालों में आराम।
  • एलोवेरा जेल – त्वचा के अल्सर पर लगाने से घाव जल्दी भरता है।

आयुर्वेदिक/यूनानी उपचार

  • त्रिफला चूर्ण – पेट और मुँह के छालों में लाभकारी।
  • यष्टिमधु (मुलेठी) – पेट के अल्सर में।
  • खादीरा चूर्ण से कुल्ला – मुख के छाले में।
  • यूनानी दवाएँ – जौ का पानी, सफ्फूफ मुलस्सिन, माजून दवा, cooling तासीर के लिए।

अंग्रेज़ी (Allopathic) उपचार

  • Mouth ulcer gel (Dologel, Mucopain, Zytee gel) – तुरंत दर्द में आराम।
  • Antacid syrup / PPI (Omeprazole, Pantoprazole) – पेट के अल्सर में।
  • Antibiotics (H. pylori infection) – डॉक्टर की सलाह पर।
  • Painkiller (Paracetamol) – ज़रूरत पड़ने पर।


🔹 सावधानियाँ

  • मसालेदार, गरम, खट्टा और कठोर भोजन से परहेज़ करें।
  • धूम्रपान और शराब से दूर रहें।
  • नियमित और संतुलित आहार लें।
  • Vitamin B-complex और Iron-rich diet अपनाएँ।
  • 2 हफ्ते से ज़्यादा अल्सर न भरे, खून आए या वजन घटे → तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।


 निष्कर्ष : 

अल्सर शरीर का साधारण छाला भी हो सकता है और कभी-कभी गंभीर समस्या का संकेत भी। शुरूआती लक्षणों को पहचानकर सही समय पर घरेलू, आयुर्वेदिक, यूनानी या अंग्रेज़ी किसी भी पद्धति से उपचार लिया जाए तो कष्ट तुरंत कम होता है और अल्सर पूरी तरह ठीक हो सकता है। सबसे महत्वपूर्ण है – कारण को पहचानना और जीवनशैली में सुधार करना।



लेखक
: विजय कुमार कश्यप 

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