https://www.thehealthjournal.co.in THE HEALTH JOURNAL written and designed by VIJAY K KASHYAP

पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

चित्र
पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

क्या नवजात को छाती से लगाने से दूर हो सकता है बांझपन? जानिए इसके पीछे का अद्भुत विज्ञान


क्या नवजात को छाती से लगाने से दूर हो सकता है बांझपन?
जानिए इसके पीछे का अद्भुत विज्ञान

                   (भाग - 1) 

निःसंतानता का दर्द वही दंपत्ति समझ सकते हैं जो सालों से सूनी गोद को भरने की आस में डॉक्टरों और अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं। कई बार हर मेडिकल रिपोर्ट नॉर्मल होने के बावजूद गर्भधारण (Pregnancy) नहीं हो पाता। ऐसे में समाज में कई तरह के उपाय या टोटके बताए जाते हैं।
​आज हम एक ऐसे ही पारंपरिक अनुभव और उसके पीछे छिपे अद्भुत वैज्ञानिक रहस्य की बात करेंगे, जिसने कई डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया है और सालों से सूनी गोद को किलकारियों से भर दिया है।

1. क्या है यह अनोखा अनुभव और पारंपरिक मान्यता?

​हमारे समाज में बुजुर्गों के अनुभवों से निकली कई ऐसी बातें हैं जो आज भी सच साबित होती हैं। अक्सर देखा गया है कि अगर कोई महिला (जिसकी उम्र 40 वर्ष से कम हो और मासिक धर्म यानी पीरियड्स नियमित हों) किसी दूसरे के नवजात शिशु को अपने कलेजे से लगाती है, उसे दुलारती है या स्तनपान कराने जैसा प्रयास लगातार 1 से 2 सप्ताह तक करती है, तो उसके भीतर एक बड़ा बदलाव आता है।
​कई मामलों में तो इसके ठीक अगले मासिक चक्र (Next Menstrual Cycle) में महिला गर्भधारण कर लेती है। यह कोई जादुई चमत्कार नहीं, बल्कि प्रकृति की एक बेहद खूबसूरत व्यवस्था है।

2. ममता का जागना और हार्मोनल संतुलन: क्या कहता है विज्ञान?

​जिसे लोग महज एक टोटका या इत्तेफाक मानते हैं, उसके पीछे हार्मोनल रिफ्लेक्स (Hormonal Reflex) का पूरा विज्ञान काम करता है। जब एक महिला किसी नवजात को अपनी छाती से लगाती है, तो उसके शरीर में दो मुख्य बदलाव होते हैं:
  • ऑक्सीटोसिन का बहाव (Oxytocin - द लव हार्मोन): बच्चे के स्पर्श और त्वचा के संपर्क (Skin-to-Skin Contact) से महिला के मस्तिष्क में ऑक्सीटोसिन हार्मोन का भारी मात्रा में स्राव होता है। यह हार्मोन मानसिक तनाव, चिंता और डिप्रेशन को पूरी तरह खत्म कर देता है, जो बांझपन का एक बहुत बड़ा कारण हैं।
  • प्रोलैक्टिन और ओव्यूलेशन का संतुलन: बच्चे को दूध पिलाने के प्रयास से 'ममत्व' जागता है, जिससे शरीर का अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) एक्टिव हो जाता है। यह एक्टिवेशन महिलाओं के अंडाशय (Ovaries) को सही समय पर स्वस्थ अंडे रिलीज करने के लिए प्रेरित करता है।

3. दूसरी शादी के बाद पहली पत्नी का गर्भवती होना: इसके पीछे का सच

​अक्सर ऐसे उदाहरण भी देखने को मिलते हैं जहाँ सालों तक संतान न होने पर पुरुष ने दूसरी शादी की, जिससे बच्चा हुआ। लेकिन जब पहली पत्नी ने उस बच्चे को अपना मानकर छाती से लगाया और पाला, तो कुछ समय बाद वह पहली पत्नी भी अपने आप गर्भवती हो गई।
​इसके पीछे का मुख्य कारण 'मेंटल ब्लॉक' (Mental Block) का टूटना है। सालों तक संतान न होने का जो तनाव और हीनभावना महिला के मन में बैठी थी, वह बच्चे के आने और उसके स्पर्श से दूर हो जाती है। जैसे ही दिमाग शांत होता है, शरीर का नेचुरल रीप्रोडक्टिव सिस्टम फिर से सही तरीके से काम करने लगता है।

4. इस प्राकृतिक उपाय को अपनाते समय किन बातों का ध्यान रखें?

​यदि कोई दंपत्ति इस प्राकृतिक और भावनात्मक तरीके से लाभ उठाना चाहता है, तो कुछ बातों का होना बेहद जरूरी है:
  • उम्र और पीरियड्स: महिला पार्टनर की उम्र अधिमानतः 40 वर्ष से कम होनी चाहिए और उनके पीरियड्स नियमित (Regular) होने चाहिए।
  • सकारात्मक सोच और रजामंदी: यह प्रक्रिया पूरी तरह से बिना किसी दबाव के, केवल शुद्ध मातृत्व और प्रेम की भावना से होनी चाहिए।
  • नियमितता: बच्चे को छाती से लगाने, दुग्ध पान कराने का प्रयास और दुलारने का यह क्रम कम से कम 1 से 2 सप्ताह तक लगातार होना चाहिए।

लिंक: नीचे क्लिक कर देखें 👇

इनफर्टिलिटी का प्राकृतिक समाधान 

पुरुष इनफर्टिलिटी में स्पर्म काउन्ट

अनुभव आधारित निष्कर्ष: (Experienced Conclusion)

​प्रकृति की लीला वाकई अपरंपार है। चिकित्सा विज्ञान अपनी जगह बेहद महत्वपूर्ण है और डॉक्टरों की सलाह ली जानी चाहिए, लेकिन हमें इंसानी भावनाओं और हार्मोन्स की इस जादुई शक्ति को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। जीवन के व्यावहारिक अनुभवों ने यह साबित किया है कि जहाँ बड़ी-बड़ी दवाइयाँ और महँगे इलाज काम नहीं आते, वहाँ एक मासूम बच्चे का स्पर्श और भीतर जागी सच्ची ममता शरीर का कायाकल्प कर देती है।
​यदि आप भी इस दौर से गुजर रहे हैं, तो निराश न हों। तनाव को अपने ऊपर हावी न होने दें, सकारात्मक रहें और प्रकृति की इस अनमोल व्यवस्था पर भरोसा रखें। ममता में वह ताकत है जो सूखी डाली को भी फिर से हरा-भरा कर सकती है। प्रकृति की और से बांझपन से मुक्ति का यह अनोखा तोहफा है। 

लेखक : विजय कुमार कश्यप 

देखने के लिए स्क्रोल करें :

इन सरल अभ्यासों और रसोई की खानपान से दिमाग को बनायें शार्प

शरीर खुद ही करता है सभी रोगों का इलाज | जानें प्रकृति के अद्भुत रहस्य और प्राकृतिक उपचार

उम्र बढ़ने के साथ शरीर से ज्यादा मन जिम्मेवार है यौन दुर्बलता हेतु : नित्य नाड़ी शोधन कर इच्छा को बलवान बनायें

नीम और हल्दी का सही उपयोग करके टाइप 2 डायबिटीज (शुगर) को कंट्रोल करें – प्राकृतिक और असरदार उपाय

गर्मी के दिनों में चना सत्तू खाने के फायदे - एक संपूर्ण गाइड

अनुशासित मन-मस्तिष्क ही राज है स्वस्थ रहने का

टाईप 2 शुगर से बचाव (Type 2 Sugar prevention) का आसान और बेहतर उपाय

कान दर्द की समस्या: पाएं असरदार आयुर्वेदिक समाधान

गर्मी और सर्दी की संवेदनशीलता का स्वास्थ्य पर प्रभाव : जानिए बचाव के उपाय

गहरी नींद से खुद-ब-खुद ठीक होने लगती हैं ये बीमारियाँ : फायदे जानकर हैरान रह जायेंगे