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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड

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पथरी (Stone) की समस्या: कारण, निवारण और संपूर्ण परहेज गाइड ​ आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान की अनियंत्रित आदतों के कारण पथरी (Stone) एक आम स्वास्थ्य समस्या बन गई है। किडनी, पित्त की थैली ( Gall Bladder ) या मूत्र मार्ग में होने वाली यह समस्या असहनीय दर्द का कारण बनती है। यदि आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो केवल दवा ही पर्याप्त नहीं है; इसके साथ सही खान-पान और सख्त परहेज का पालन करना भी अनिवार्य है। आज के इस लेख में हम होम्योपैथिक दृष्टिकोण और आहार संबंधी आवश्यक सावधानियों पर चर्चा करेंगे। ​ पथरी होने के लक्षण और पहली सावधानी ​ पथरी होने का मुख्य संकेत किडनी के आसपास होने वाला तीव्र दर्द है। यदि सोनोग्राफी या अल्ट्रासाउंड में पथरी की पुष्टि होती है, तो सबसे पहली सावधानी यह बरतें कि कैल्शियम (चूना) का सेवन पूरी तरह बंद कर दें । शरीर में कैल्शियम का सही ढंग से न पचना ही स्टोन बनने का सबसे बड़ा कारण है। ​ पथरी को गलाने के लिए होम्योपैथिक उपाय ​ होम्योपैथी में पथरी को धीरे-धीरे घोलकर बाहर निकालने के लिए दो प्रभावी औषधियाँ सुझाई जाती हैं: ​ बर्बेरिस वल्गेरिस (Berberis Vulg...

बीमारी या बॉडी डिटॉक्स? शरीर के इन 7 संकेतों का असली मतलब समझें


बीमारी या बॉडी डिटॉक्स?
शरीर के इन 7 संकेतों का असली मतलब?? 

​जब हमें सर्दी-खांसी होती है, बुखार आता है या चेहरे पर कील-मुंहासे निकलने लगते हैं, तो हम तुरंत इन्हें कोई बीमारी मानकर दवाइयां खाने लगते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमेशा ऐसा नहीं होता? असल में, इनमें से कई स्थितियाँ बीमारी नहीं, बल्कि हमारे शरीर की स्वाभाविक सफाई प्रक्रिया (डिटॉक्सिफिकेशन) और सुरक्षा प्रणाली (Defense Mechanism) का हिस्सा हैं।
​हमारा शरीर एक बेहतरीन ऑटोमैटिक मशीन है जो हर पल खुद को संतुलित और साम्यावस्था (Homeostasis) में रखने के लिए काम करती है। आइए जानते हैं इन 7 शारीरिक स्थितियों का असली मतलब क्या है।

1. सर्दी और खांसी (श्वसन नली की आपातकालीन सफाई)


अक्सर बदलते मौसम में नाक बहना या खांसी आना शुरू हो जाता है। यह शरीर की कोई कमजोरी नहीं है। खांसी और छींक के जरिए हमारा श्वसन तंत्र फेफड़ों और सांस की नली में फंसे बाहरी कीटाणुओं, धूल के कणों और बलगम को बलपूर्वक बाहर फेंकता है। नाक से बहने वाला पानी भी वायरस को शरीर से बाहर बहाने का एक तरीका है।

​2. बुखार (इन्फेक्शन के खिलाफ आंतरिक युद्ध)

बुखार खुद में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह इस बात का संकेत है कि आपका इम्यून सिस्टम जाग गया है। जब शरीर में कोई हानिकारक वायरस या बैक्टीरिया प्रवेश करता है, तो मस्तिष्क शरीर का तापमान बढ़ा देता है। इस ऊंचे तापमान पर कीटाणु कमजोर हो जाते हैं और इम्यून सेल्स आसानी से उन्हें खत्म कर देती हैं।

3. दस्त या लूज मोशन (पेट का फ्लश सिस्टम)

जब हम कोई दूषित खाना या विषैला पदार्थ खा लेते हैं, तो आंतें उसे सोखने के बजाय तेजी से बाहर निकालने का फैसला करती हैं। दस्त के जरिए शरीर उस जहरीले या खराब तत्व को जल्द से जल्द बाहर फेंककर पेट को साफ करता है और खुद को बड़े नुकसान से बचाता है।

4. कील-मुंहासे (त्वचा के छिद्रों की सफाई)

त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा उत्सर्जक अंग है। जब शरीर के भीतर टॉक्सिन्स बढ़ते हैं या तेल ग्रंथियों में रुकावट आती है, तो शरीर उस कचरे को त्वचा की सतह के माध्यम से बाहर निकालने की कोशिश करता है। मुंहासे के रूप में दिखने वाली सूजन असल में त्वचा के भीतर चल रही एक छोटी सी सफाई जंग है।

5. पसीना (नेचुरल कूलिंग और डिटॉक्स)

पसीना आने के दो बेहद जरूरी मकसद होते हैं। पहला, यह शरीर के बढ़ते तापमान को कम करके उसे साम्यावस्था (कूलिंग इफेक्ट) में लाता है। दूसरा, पसीने के रास्ते त्वचा से अतिरिक्त नमक, यूरिया और सूक्ष्म अशुद्धियाँ शरीर से बाहर निकल जाती हैं।

​6. पेशाब या यूरिन (रक्त का 24 घंटे फिल्टरेशन)

हमारी किडनियां बिना रुके चौबीसों घंटे खून को छानने का काम करती हैं। पानी में घुलनशील अपशिष्ट पदार्थों, यूरिक एसिड और अतिरिक्त रसायनों को यूरिन के रास्ते बाहर निकालकर शरीर अपने खून को पूरी तरह शुद्ध और संतुलित रखता है।

​7. थकावट (शरीर का जबरन हीलिंग मोड)


जब शरीर किसी संक्रमण से लड़ रहा होता है या खुद को अंदर से रिपेयर कर रहा होता है, तो उसे बहुत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऐसे में शरीर आपको थकावट महसूस कराता है, ताकि आप आराम करें और बची हुई पूरी ऊर्जा का इस्तेमाल शरीर खुद को पूरी तरह ठीक करने में लगा सके।

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निष्कर्ष:

यह समझना बेहद जरूरी है कि ये सभी स्थितियां इस बात का प्रमाण हैं कि आपका शरीर सक्रिय है और खुद की रक्षा कर रहा है। हालांकि, यदि ये लक्षण बहुत तीव्र हो जाएं या लंबे समय तक बने रहें, तो इसका मतलब है कि शरीर का लोड बढ़ चुका है और अब इसे योग्य चिकित्सक की सलाह और बाहरी मदद की जरूरत है।

✍️ लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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