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जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान

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​ जौ (Barley): आयुर्वेद का 'सुपरफूड' और आपकी सेहत का वरदान ​ आज के दौर में जब हम नई-नई बीमारियों से घिरे हैं, तब आयुर्वेद की ओर लौटना ही समझदारी है। आयुर्वेद में 'यव' यानी जौ को केवल एक अनाज नहीं, बल्कि एक दिव्य औषधि माना गया है। चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे प्राचीन ग्रंथों में इसके असाधारण औषधीय गुणों का वर्णन है।  ​1. मधुमेह (Diabetes) में रामबाण ​आज भारत को 'वर्ल्ड डायबिटीज कैपिटल' कहा जा रहा है। आयुर्वेद में जौ को 'यव प्रधानस्तु भवेत प्रमेह' कहकर प्रमेह (डायबिटीज सहित 20 प्रकार के रोग) का प्रमुख आहार बताया गया है। ​ कैसे काम करता है: जौ में बीटा-ग्लूकन (Beta-glucan) नामक सॉल्युबल फाइबर होता है, जो शरीर में कार्बोहाइड्रेट के अवशोषण को धीमा कर देता है, जिससे ब्लड शुगर में अचानक उछाल (Sugar Spike) नहीं आता। ​ उपयोग: मधुमेह के रोगी जौ के सत्तू या जौ की रोटी को अपनी डाइट में शामिल कर सकते हैं। ​2. यूरिन और किडनी स्वास्थ्य (Urinary & Kidney Health) ​किडनी स्टोन, यूटीआई (UTI), और बार-बार यूरिन आने जैसी समस्याओं में जौ अत्यंत लाभकारी है। ​ ...

नर्वस सिस्टम क्या है?- कैसे रखें इसे फौलादी और सेहतमंद


नर्वस सिस्टम क्या है?
- कैसे रखें इसे फौलादी और सेहतमंद..! 

हमारा नर्वस सिस्टम (Nervous System) शरीर का सबसे महत्वपूर्ण 'कंट्रोल सेंटर' है। आसान भाषा में कहें तो, जैसे कंप्यूटर में CPU होता है, वैसे ही हमारा नर्वस सिस्टम है। यह दिमाग, रीढ़ की हड्डी और नसों का एक ऐसा जाल है जो शरीर के हर हिस्से को संदेश भेजता है और उनसे जानकारी लेता है। चाहे आप चल रहे हों, सांस ले रहे हों या सोच रहे हों - सब कुछ इसी के इशारों पर होता है।

​नर्वस सिस्टम कमजोर होने के लक्षण 

​जब हमारा नर्वस सिस्टम सुस्त या बीमार होने लगता है, तो शरीर हमें कुछ संकेत देने लगता है। इनमें से कुछ मुख्य लक्षण हैं:

  • हाथ-पैरों में झुनझुनी या सुन्नपन: अक्सर बिना किसी कारण हाथ-पैरों का सो जाना।
  • याददाश्त में कमी: छोटी-छोटी बातें भूल जाना या फोकस न कर पाना।
  • अकारण थकान: भरपूर नींद के बाद भी हर समय कमजोरी महसूस करना।
  • मांसपेशियों में कमजोरी: अचानक मांसपेशियों का फड़कना या कमजोरी महसूस होना।
  • नींद की समस्या: रात में बेचैनी होना या गहरी नींद न आना।

​नर्वस सिस्टम बिगड़ने के पीछे के कारण:

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में इसके खराब होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • तनाव (Stress): लगातार मानसिक तनाव नसों को थका देता है।
  • पोषक तत्वों की कमी: शरीर में विटामिन B12, विटामिन D और मैग्नीशियम की कमी नसों के लिए खतरनाक है।
  • अनहेल्दी डाइट: ज्यादा जंक फूड और प्रोसेस्ड फूड खाने से नसों में सूजन आ सकती है।
  • शारीरिक निष्क्रियता: दिनभर एक ही जगह बैठे रहना या एक्सरसाइज न करना।
  • नींद की कमी: पर्याप्त नींद न लेने से नर्वस सिस्टम खुद को रिपेयर नहीं कर पाता।

नसों को स्वस्थ रखने के आसान घरेलू उपाय:

​प्रकृति में हमारी नसों को शांत और मजबूत बनाने के लिए बहुत कुछ है:

  • बादाम और अखरोट: इनमें मौजूद ओमेगा-3 फैटी एसिड दिमाग और नसों के लिए 'सुपरफूड' हैं।

  • हल्दी वाला दूध: हल्दी में मौजूद 'करक्यूमिन' नसों की सूजन को कम करने में जादुई असर दिखाता है।

  • भरपूर पानी: शरीर में पानी की कमी होने पर भी नसों में खिंचाव महसूस हो सकता है।

  • विटामिन B12 का ध्यान: हरी सब्जियां, दूध और दही का सेवन नियमित करें।

नर्वस सिस्टम के लिए सर्वश्रेष्ठ योग और व्यायाम:

नसों को सक्रिय और लचीला बनाए रखने के लिए रोजाना ये 15-20 मिनट की एक्सरसाइज जरूर करें:

1. प्राणायाम

  • अनुलोम-विलोम: यह नसों में ऑक्सीजन का संचार बढ़ाता है और तनाव को जड़ से खत्म करता है।

  • भ्रामरी प्राणायाम: यह मन को शांत कर नर्वस सिस्टम को रिलैक्स करने का सबसे प्रभावी तरीका है।

​2. योगासन

  • शवासन: यह नसों को आराम देने और पूरे सिस्टम को शांत करने के लिए सबसे जरूरी है।

  • पवनमुक्तासन: यह पेट की नसों और रीढ़ की हड्डी के लिए बहुत फायदेमंद है।

​3. हल्की स्ट्रेचिंग

​रोज सुबह अपनी गर्दन, कंधों और हाथों की हल्की स्ट्रेचिंग करें। इससे नसों में खून का बहाव बेहतर होता है और ब्लॉकेज की समस्या नहीं होती।

निष्कर्ष:

​हमारा नर्वस सिस्टम ही वह डोर है जिससे हमारे जीवन की गाड़ी चलती है। अगर इसे समय रहते स्वस्थ न रखा जाए, तो शरीर के अन्य अंग भी प्रभावित होने लगते हैं। अपनी डाइट में सुधार, रोजाना 20 मिनट का योग और थोड़ा मानसिक सुकून--यही वो साधारण से नुस्खे हैं जो आपके नर्वस सिस्टम को वर्षों तक युवा और फौलादी बनाए रख सकते हैं। याद रखें, नसों की सेहत ही जीवन की असली ऊर्जा है!

लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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