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30 की उम्र के बाद कमजोरी? शरीर में नई ताकत भर देंगे ये 10 हाई-प्रोटीन फूड्स

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​ 30 की उम्र के बाद कमजोरी? शरीर में नई ताकत भर देंगे ये 10 हाई-प्रोटीन फूड्स ​ बढ़ती उम्र के साथ हमारे शरीर में कई अंदरूनी बदलाव होने लगते हैं। अक्सर 30 साल की उम्र के बाद शरीर की मांसपेशियां प्राकृतिक रूप से कमजोर होने लगती हैं। सीढ़ियां चढ़ते समय सांस फूलना या छोटे-छोटे कामों में जल्दी थक जाना इसके आम लक्षण हैं। मेडिकल भाषा में इसे 'सारकोपीनिया' कहा जाता है, जिससे बचने का सबसे बेहतरीन उपाय सही प्रोटीन का सेवन है। शरीर को मजबूत बनाने वाले 10 बेहतरीन हाई-प्रोटीन फूड्स ​1. काला चना ​ प्रोटीन : 100 ग्राम काले चने में लगभग 22 ग्राम प्रोटीन होता है (जो करीब 3 अंडों के बराबर है)। ​ फायदे : इसमें मौजूद आयरन खून बनाता है, फाइबर पाचन सुधारता है और मैग्नीशियम मांसपेशियों को ताकत देता है। ​ खाने का तरीका: रातभर भिगोए हुए चने में सुबह नींबू का रस, काला नमक और प्याज मिलाकर खाली पेट चबाकर खाएं। कमजोर पाचन वाले इसे उबालकर या अंकुरित करके भी खा सकते हैं। ​ 2. मूंग दाल ​ प्रोटीन : 100 ग्राम मूंग दाल में 24 ग्राम प्रोटीन होता है। ​ फायदे : यह बहुत आसानी से पच जाती है, इसलिए कमजोर पा...

गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु महिमा और समर्थ गुरु परम संत डॉ. चतुर्भुज सहाय जी, रामाश्रम सत्संग मथुरा


गुरु पूर्णिमा विशेष: गुरु महिमा और समर्थ गुरु परम संत डॉ. चतुर्भुज सहाय जी, रामाश्रम सत्संग मथुरा 

भारतीय सनातन संस्कृति में गुरु पूर्णिमा का पर्व अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक दृष्टि से सर्वोपरि माना गया है। यह वह पावन दिवस है जब साधक अपने जीवन को अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाने वाले गुरु के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करता है। आषाढ़ मास की पूर्णिमा को मनाया जाने वाला यह पर्व हमें स्मरण कराता है कि बिना गुरु के मार्गदर्शन के जीवन का उद्देश्य और परमात्मा की प्राप्ति असंभव है। 'गु' का अर्थ है अंधकार और 'रु' का अर्थ है उसे मिटाने वाला प्रकाश। जो हमारे भीतर अज्ञानता के अंधकार को दूर कर ज्ञान और चेतना का सूर्य प्रज्वलित करता है, वही वास्तविक गुरु है। गुरु पूर्णिमा का यह दिन हमें आंतरिक शुद्धि और समर्पण का संदेश देता है।
​हमारे शास्त्रों में कहा गया है—"गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णुः गुरुर्देवो महेश्वरः। गुरुः साक्षात् परं ब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः।" अर्थात गुरु ही ब्रह्मा है, गुरु ही विष्णु है और गुरु ही महेश है। इतना ही नहीं, गुरु को साक्षात् परब्रह्म परमात्मा का स्वरूप माना गया है जो भौतिक जगत में आकर जीवों का कल्याण करते हैं। ईश्वर निराकार और अज्ञेय है, किंतु जब वह मनुष्य रूप में आकर साधक की उंगली पकड़कर उसे सत्य का मार्ग दिखाता है, तब वह समर्थ गुरु कहलाता है। गुरु की महिमा अपरम्पार है क्योंकि वही ईश्वर तक पहुँचने का एकमात्र और सरल सेतु है।
​रामाश्रम सत्संग मथुरा एक ऐसा आध्यात्मिक आंदोलन और साधना पद्धति है जिसने हज़ारों-लाखों जिज्ञासुओं को ईश्वर के वास्तविक स्वरूप से जोड़ा है। यहाँ साधना की पद्धति अत्यंत सहज, वैज्ञानिक और हृदयग्राही है, जो मनुष्य को अंदर से रूपांतरित कर देती है। इस संस्था के संस्थापक और प्रेरणास्रोत समर्थ गुरु परम संत डॉ. चतुर्भुज सहाय जी एक महापुरुष थे। उनका जीवन त्याग, प्रेम, करुणा और दिव्यता की सजीव मूरत था। उन्होंने अपने शिष्यों को केवल उपदेश नहीं दिए, बल्कि अपने आंतरिक प्रकाश से उनके हृदय को आलोकित किया। डॉ. चतुर्भुज सहाय जी महाराज जैसे समर्थ गुरु साधारण मानव नहीं होते, बल्कि वे परमात्मा के ही साक्षात प्रतिनिधि और स्वरूप होते हैं। उनका सान्निध्य प्राप्त करना और उनकी शरण में जाना जन्म-जन्म के पुण्यों का फल है। उनके द्वारा दर्शित साधना मार्ग साधक को सीधे ईश्वर से जोड़ता है।
​गुरु पूर्णिमा के इस पावन अवसर पर हमारा यही संकल्प होना चाहिए कि हम अपने समर्थ गुरु के चरणों में पूर्ण रूप से समर्पित हो जाएं। उनका स्मरण और उनकी आज्ञा का पालन ही हमारा परम धर्म है।



एक तुच्छ सेवक का ह्रदय उदगार:


मैं तो इस अगाध आध्यात्मिक सागर में केवल एक अति तुच्छ सेवक हूँ। मेरी अपनी कोई ऐसी सामर्थ्य या योग्यता नहीं है कि समर्थ गुरु परम संत डॉ. चतुर्भुज सहाय जी की असीम महिमा और महानता का सही शब्दों में वर्णन कर सकूँ। यह लेख तो केवल मेरे अंतःकरण की श्रद्धा और श्री गुरु महाराज जी के श्रीचरणों में मेरी अनन्य भक्ति का एक छोटा सा प्रयास है। हे गुरुदेव! इस तुच्छ सेवक को अपनी शरण में स्थान दें और अपनी भक्ति का दान दें, यही मेरी एकमात्र प्रार्थना है।


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