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स्वस्थ जीवन का रहस्य: दूध, दही और जूस पीने का सही समय

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स्वस्थ जीवन का रहस्य: दूध, दही और जूस पीने का सही समय ​आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर त्रिदोष - वात, पित्त और कफ के प्रभाव में रहता है। दिन के अलग-अलग समय में इन दोषों का प्रभाव बदलता है, इसलिए हमें अपने खान-पान को उसी के अनुसार निर्धारित करना चाहिए। ​1. सुबह का समय: जूस के लिए उपयुक्त ​सुबह के समय शरीर में वात का प्रभाव सबसे अधिक होता है। पेट की सफाई और मल-मूत्र के त्याग के लिए वात का संतुलित रहना आवश्यक है। ​ क्यों पिएं जूस: वात को शांत करने की सबसे अधिक शक्ति पानी में होती है। फलों और सब्जियों के जूस (जैसे संतरा, मौसमी, टमाटर, गाजर, पालक आदि) में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो सुबह वात को संतुलित करने में मदद करती है। ​ नियम: सुबह के नाश्ते के बाद जूस का सेवन करना सबसे उत्तम माना गया है। ​2. दोपहर का समय: छाछ या दही का महत्व ​दोपहर का समय पित्त की प्रधानता वाला होता है, क्योंकि इस समय सूर्य की अग्नि सबसे तीव्र होती है। ​ क्यों पिएं छाछ/दही : पित्त को शांत करने के लिए ठंडी और पचने में आसान चीजों की आवश्यकता होती है। आयुर्वेद में इसके लिए दोपहर के भोजन के बाद छाछ (मट्ठ...

आंव और पेचिश (Dysentery) का घरेलू उपचार: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

सर्व भवन्तु सुखिनः 

सर्वे सन्तु निरामया:





आंव और पेचिश (Dysentery) का  घरेलू उपचार: एक संपूर्ण मार्गदर्शिका

आंव या पेचिश की समस्या न केवल शरीर को कमजोर बनाती है, बल्कि यह पेट की कार्यप्रणाली को भी पूरी तरह असंतुलित कर देती है। यदि आप भी बार-बार होने वाली इस समस्या से परेशान हैं, तो यहाँ आयुर्वेद के अनुसार कुछ अचूक और सरल उपचार दिए गए हैं।

1. आहार में शामिल करें ये रामबाण औषधियाँ

​आयुर्वेद के अनुसार, पेट की बीमारियों के लिए कुछ प्राकृतिक चीजें सबसे अधिक प्रभावी हैं:

  • बेल का प्रयोग: यह पाचन तंत्र के लिए बेहद गुणकारी है।
  • अनार: आंव संग्रहण (पेचिश) के लिए अनार से बेहतर कुछ भी नहीं है। इसके रेशों (fiber) को धीरे-धीरे चबाकर खाना चाहिए।
  • छाछ (तक्र): ताजी और कम खट्टी छाछ का सेवन पेट की समस्याओं में बहुत राहत देता है।

2. एक विशेष घरेलू नुस्खा: दही और केला

​पुराने से पुराने आंव या पेचिश से छुटकारा पाने के लिए आप इस सरल उपाय को 7 दिनों तक अपना सकते हैं:

  • सामग्री: एक कटोरी ताजी दही (घर की जमी हुई, पाउडर के दूध वाली नहीं) और दो पूरी तरह पके हुए केले।
  • विधि: एक कटोरी ताजी दही में दो पके हुए केले को डालकर अच्छी तरह मैश कर लें।
  • सेवन: इस मिश्रण को सुबह खाली पेट खाएं। लगातार 7 दिनों तक इस क्रम को दोहराने से पुराने से पुराना पेचिश या आंव की शिकायत खत्म हो जाती है।

​3. परहेज: इन तीन चीजों का सेवन तुरंत बंद करें

​यदि आप उपचार के दौरान भी इन तीन चीजों का सेवन करते हैं, तो कोई भी दवा असर नहीं करेगी:

​◾ घी, 

◾ मीठा (मिठाइयां या चीनी), 

​◾ दूध इनका सेवन करने से रोग की स्थिति और बिगड़ सकती है।

और आगे क्या न खाएं..? 

इस स्थिति में पाचन तंत्र बेहद संवेदनशील होता है, इसलिए आम, दूध या दूध से बनी कोई भी चीज, घी, मक्खन, और ज्यादा चिकनाई या वसायुक्त भोजन का सेवन बिल्कुल न करें। पूरी, कचौड़ी जैसे तली-भुने पदार्थ, चटपटे व्यंजन, पिज्जा, बर्गर और समोसा जैसे पित्त बढ़ाने वाले खाद्य पदार्थों से पूरी तरह परहेज रखें। साथ ही, खट्टी चीजों का उपयोग न करें क्योंकि इससे ब्लीडिंग बढ़ सकती है, और पत्तेदार सब्जियों का सेवन भी इस दौरान न करें।

क्या खाएं..? (अनुशंसित भोजन):

भोजन में हमेशा सुपाच्य और हल्का आहार लें। सबसे अधिक फायदेमंद बेल का उपयोग है, जिसे शर्बत, मुरब्बे, कैंडी या पाउडर के रूप में दिया जा सकता है। इसके अलावा, शीशम के पत्तों की चटनी बनाकर ली जा सकती है। आहार में खिचड़ी, दलिया, और दाल-रोटी को शामिल करें। सब्जियों में केवल लौकी, तोरी, टिंडा और परवल जैसी सुपाच्य सब्जियां ही दें। इसके अतिरिक्त, नारियल पानी, आंवला और छाछ का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए लाभप्रद होता है।

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निष्कर्ष:

​आंव और पेचिश जैसी समस्याओं को हल्के में नहीं लेना चाहिए, क्योंकि यह व्यक्ति को पूरी तरह शक्तिहीन बना देती है। यदि आप सही परहेज (घी, मीठा और दूध का त्याग) के साथ ऊपर बताए गए आयुर्वेदिक उपायों—जैसे अनार का सेवन, या दही-केले का मिश्रण—का नियमित रूप से पालन करते हैं, तो आप बिना किसी साइड इफेक्ट के पूरी तरह स्वस्थ हो सकते हैं।

✍️ लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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