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स्वस्थ जीवन का रहस्य: दूध, दही और जूस पीने का सही समय

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स्वस्थ जीवन का रहस्य: दूध, दही और जूस पीने का सही समय ​आयुर्वेद के अनुसार हमारा शरीर त्रिदोष - वात, पित्त और कफ के प्रभाव में रहता है। दिन के अलग-अलग समय में इन दोषों का प्रभाव बदलता है, इसलिए हमें अपने खान-पान को उसी के अनुसार निर्धारित करना चाहिए। ​1. सुबह का समय: जूस के लिए उपयुक्त ​सुबह के समय शरीर में वात का प्रभाव सबसे अधिक होता है। पेट की सफाई और मल-मूत्र के त्याग के लिए वात का संतुलित रहना आवश्यक है। ​ क्यों पिएं जूस: वात को शांत करने की सबसे अधिक शक्ति पानी में होती है। फलों और सब्जियों के जूस (जैसे संतरा, मौसमी, टमाटर, गाजर, पालक आदि) में पानी की मात्रा अधिक होती है, जो सुबह वात को संतुलित करने में मदद करती है। ​ नियम: सुबह के नाश्ते के बाद जूस का सेवन करना सबसे उत्तम माना गया है। ​2. दोपहर का समय: छाछ या दही का महत्व ​दोपहर का समय पित्त की प्रधानता वाला होता है, क्योंकि इस समय सूर्य की अग्नि सबसे तीव्र होती है। ​ क्यों पिएं छाछ/दही : पित्त को शांत करने के लिए ठंडी और पचने में आसान चीजों की आवश्यकता होती है। आयुर्वेद में इसके लिए दोपहर के भोजन के बाद छाछ (मट्ठ...

शरीर में पानी की कमी: लक्षण, कारण और बचाव के असरदार उपाय


शरीर में पानी की कमी: लक्षण, कारण और बचाव के असरदार उपाय

​हमारा शरीर लगभग 60-70% पानी से बना है, इसलिए स्वस्थ रहने के लिए शरीर में पानी का सही संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। जब शरीर से निकलने वाले पानी की मात्रा, ग्रहण किए गए पानी से अधिक हो जाती है, तो डिहाइड्रेशन या पानी की कमी की स्थिति उत्पन्न होती है।

1. शरीर में पानी की कमी के प्रमुख लक्षण

​अगर आपका शरीर पर्याप्त हाइड्रेटेड नहीं है, तो वह कई संकेतों के माध्यम से आपको आगाह करता है। यहाँ कुछ सामान्य लक्षण दिए गए हैं:

  • सिर दर्द: बार-बार या लगातार सिरदर्द होना डिहाइड्रेशन का एक शुरुआती संकेत हो सकता है।
  • याददाश्त में कमी: एकाग्रता की कमी और याददाश्त में भटकाव महसूस होना।
  • मुँह से दुर्गंध: मुँह सूखना और सांसों में बदबू आना।
  • अचानक खाने की इच्छा: कभी-कभी शरीर पानी की मांग को भूख समझ लेता है, जिससे नमकीन या मीठा खाने की तीव्र इच्छा होती है।
  • मांसपेशियों में ऐंठन: शरीर में जकड़न, ऐंठन या मांसपेशियों में दर्द महसूस होना।
  • पेशाब में बदलाव: पेशाब का कम आना या उसका गहरा पीला रंग होना।
  • त्वचा का रूखापन: त्वचा का बेजान और रूखा दिखना।
  • लगातार प्यास: बार-बार मुँह सूखना और बहुत अधिक प्यास लगना।
  • पाचन संबंधी समस्या: सीने में हल्की जलन, पेट में भारीपन या एसिडिटी होना।
  • थकान: सामान्य से अधिक थकान या कमजोरी महसूस करना।

​2. शरीर में पानी की कमी के क्या कारण हो सकते हैं?

​पानी की कमी के पीछे कई जीवनशैली से जुड़े कारण जिम्मेदार होते हैं, जैसे:

  • ​दिनभर में पर्याप्त पानी का सेवन न करना।
  • ​अत्यधिक गर्मी या तेज धूप में काम करना।
  • ​भारी व्यायाम या शारीरिक मेहनत के बाद पानी की पूर्ति न करना।
  • ​कैफीन (चाय/कॉफी) का अत्यधिक सेवन।

​3. पानी की कमी दूर करने के लिए आवश्यक उपाय

​डिहाइड्रेशन से बचने और शरीर को स्वस्थ रखने के लिए आप निम्नलिखित उपाय अपना सकते हैं:

पानी पीने की सही आदत डालें

​पूरे दिन में थोड़े-थोड़े अंतराल पर पानी पीते रहें। केवल प्यास लगने का इंतजार न करें, बल्कि इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।

डाइट में तरल पदार्थों को शामिल करें

  • फल और सब्जियां: तरबूज, खीरा, संतरा और लौकी जैसे पानी से भरपूर फलों और सब्जियों का सेवन करें।
  • नारियल पानी और नींबू पानी: ये प्राकृतिक इलेक्ट्रोलाइट्स प्रदान करते हैं जो शरीर में पानी की कमी को तेजी से पूरा करते हैं।

ध्यान रखें.. 

​शारीरिक श्रम या व्यायाम करते समय अपने पास पानी की बोतल जरूर रखें और थोड़े-थोड़े अंतराल पर घूंट-घूंट करके पानी पिएं।

निष्कर्ष:

​शरीर में पानी की कमी को नजरअंदाज करना सेहत के लिए महंगा पड़ सकता है। थकान, सिरदर्द और त्वचा के रूखेपन जैसे छोटे दिखने वाले लक्षण अक्सर बड़े स्वास्थ्य जोखिमों की ओर इशारा करते हैं। सही समय पर पानी का पर्याप्त सेवन और संतुलित आहार अपनाकर आप न केवल ऊर्जावान रह सकते हैं, बल्कि भविष्य में होने वाली स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से भी बच सकते हैं। याद रखें, 'जल ही जीवन है' और आपकी स्वस्थ जीवनशैली की शुरुआत पानी से ही होती है।

✍️ लेखक : विजय कुमार कश्यप 

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